
ड्यूटी पर २३ में से 17 दिन देर से आना अनुशासनहीनता का आंकड़ा हो सकता है, लेकिन क्या यह किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालने का अंतिम और निर्विवाद आधार हो सकता है? सैन फ्रांसिस्को के एक स्टोर में एआइ मैनेजर 'लूना' ने जब ऐसे ही एक कर्मचारी को बर्खास्त करने की सिफारिश की, तो सवाल कर्मचारी की गलती से कहीं बड़ा हो गया- क्या मशीन को किसी इंसान की रोजी-रोटी पर फैसला लेने का अधिकार दिया जा सकता है? अगर हां, तो फिर उसके 'सही प्रतीत होने वाले गलत निर्णयों' की जवाबदेही किसे देंगे?
भविष्य का सवाल यह नहीं है कि एआइ कितने फैसले ले सकता है, सवाल यह है कि किन फैसलों का अधिकार उसे दिया जाना चाहिए? यहां एआइ के पक्षधर कुछ लोग कह सकते हैं कि मानव हस्तक्षेप होने पर फैसले पक्षपातपूर्ण हो सकते हैं। माथा देखकर तिलक किया जा सकता है। बिल्कुल सच। इसकी गुंजाइश होती है। लेकिन क्या महज 'मैथ्स' देखकर फैसला 'क्लिक' कर देना भी कारगर होगा? कार्यस्थल केवल स्प्रेडशीट और उपस्थिति तालिकाओं से नहीं चलते। वहां मानवीय परिस्थितियां, व्यक्तिगत संकट और संवाद-संवेदना भी मायने रखते हैं। भूल और गलती के लिए भी एक 'स्पेस' फैसलों को मानवीय रखने में मदद करता है। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि जिस 'लूना' ने कर्मचारी को अनुशासनहीनता पर बाहर का रास्ता दिखाया, वह खुद अपने ही बनाए नियम भूल गई और स्टोर को मुनाफे में लाने में अब तक बुरी तरह विफल रही। पांच महीनों में उसकी पूंजी एक लाख डॉलर से घटकर ६१,१८६ डॉलर रह गई। ऐसे में सवाल यह है कि अगर मशीन भी नियम भूल सकती है, गलत आकलन कर सकती है और अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकती तो उसके फैसलों को अंतिम सत्य मानने का अधिकार उसे किसने दिया? मशीन को फैसला करने की कुर्सी दी जा सकती है, लेकिन उस कुर्सी के पीछे इंसान की जवाबदेही हटाई नहीं जा सकती। आंकड़े परिस्थितियां बता सकते हैं, उनका अर्थ नहीं। और जहां अर्थ समझने की जरूरत है, वहां अंतिम फैसला अभी भी इंसान के पास ही रहना चाहिए। यदि ऐसा होने लगा तो कॉर्पोरेट व्यवस्था अधिक कुशल होने के बजाय अधिक क्रूर और असंवेदनशील हो जाएगी।
बड़ा खतरा यह कि प्रबंधन तब कड़े और अलोकप्रिय फैसलों की आड़ के रूप में एआइ का इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए अब नीति-निर्माता और कानूनविदों को चाहिए कि वे मशीनों की सीमाएं और जवाबदेही के कड़े नियम तय करने के बारे में भी विचार करें। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि तकनीक को रोकना तो कोई समाधान है ही नहीं, लेकिन उसे बिना सीमाओं के आगे बढऩे देना भी समझदारी नहीं। भविष्य अधिक बुद्धिमान मशीनों का हो, यह बेशक बहुत अच्छा है, लेकिन वह अधिक जिम्मेदार इंसानों का भी होना चाहिए।