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भारत की सबसे बड़ी आर्थिक पूंजी बनेंगे या चुनौती

भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए जेन जी और जेन अल्फा को केवल डिजिटल उपभोक्ता नहीं, बल्कि कुशल, नवाचारी और जिम्मेदार युवा शक्ति बनाना होगा।
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जयपुर

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Opinion Desk

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विजय गर्ग आर्थिक विशेषज्ञ एवं कर प्रणाली के जानकार

Aug 19, 2026

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भारत आज ऐसे दौर से गुजर रहा है, जब दुनिया के कई बड़े देश तेजी से बूढ़ी होती आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं भारत के पास युवाओं की बड़ी और ऊर्जावान पीढ़ी है। लेकिन इस ताकत का अर्थ केवल यह नहीं कि हमारे पास काम करने वाले हाथ अधिक हैं। असली सवाल इन हाथों में कौशल कितना है, दिमाग में नई सोच कितनी है, तकनीक का इस्तेमाल वे किस तरह करते हैं। इसी संदर्भ में 'जेन जी' और 'जेन अल्फा' को समझना जरूरी है। आमतौर पर 1997-2012 के बीच जन्मे लोगों को 'जेन जी' और उसके बाद की पीढ़ी को 'जेन अल्फा' कहा जाता है।

जनसंख्या अनुमान के अनुसार भारत में 'जेन जी' की संख्या करीब 40.7 करोड़ और 'जेन अल्फा' की करीब 33.2 करोड़ है। ये भारत के अगले दो-तीन दशकों के बाजार, रोजगार, उद्यमिता, तकनीक और सामाजिक बदलाव की दिशा तय करने वाली पीढिय़ां हैं। 'जेन जी' ने इंटरनेट के साथ अपनी दुनिया बनाई है। 'जेन अल्फा' के लिए स्मार्टफोन, वीडियो, ऑनलाइन शिक्षा, गेमिंग और एआइ नए नहीं हैं। यही बदलाव अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। आज किसी उत्पाद को खरीदने से पहले युवा उसके विषय में इंटरनेट पर जानकारी लेता है। सोशल मीडिया पर ब्रांड की विश्वसनीयता तय होती है। भुगतान के लिए यूपीआइ का इस्तेमाल सामान्य है। शिक्षा, मनोरंजन, बैंकिंग, खरीदारी और यहां तक कि नौकरी खोजने का तरीका बदला है। इस बदलाव ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नया उपभोक्ता दिया है, जो तेज, डिजिटल और अपनी पसंद को लेकर अधिक स्पष्ट है। हालांकि, यहां एक सावधानी भी जरूरी है। केवल डिजिटल होना आर्थिक शक्ति की गारंटी नहीं है। डिजिटल सुविधा तभी आर्थिक ताकत बनेगी, जब उसके साथ अच्छी शिक्षा, कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध हों। भारत के सामने असली चुनौती इसी जगह है।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष लगातार यह रेखांकित करता रहा है कि भारत का डेमोग्राफिक डिविडेंड अपने आप आर्थिक विकास में नहीं बदलेगा। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और सम्मानजनक रोजगार में निवेश जरूरी है। यदि युवा शिक्षित और कुशल हैं, लेकिन पर्याप्त रोजगार नहीं हैं तो यही डेमोग्राफिक डिविडेंड चुनौती बन जाएगा। इसके उलट यदि उन्हें आधुनिक कौशल, पूंजी, बाजार और अवसर मिलते हैं तो यही युवा भारत की सबसे बड़ी आर्थिक पूंजी बन सकते हैं। ऐसे में 'जेन जी' और 'जेन अल्फा' के विषय में चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि वर्ष 2035, 2040 और 2047 का भारत इन्हीं पीढिय़ों के ज्ञान और श्रम से बनेगा। 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में युवाओं पर विशेष जोर दिखाई दिया। इसका अर्थ यह है कि सरकार भी एआइ, शोध, नवाचार, खेल और नए कौशल को आर्थिक विकास का हिस्सा मान रही है। अब चुनौती घोषणाओं को जमीन तक पहुंचाने की है।

जेन जी की विशेषता है कि इसका एक हिस्सा नौकरी को जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं मानता। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम इसी मानसिकता का उदाहरण है। एआइ इस परिवर्तन को और तेज करेगा। इसलिए भविष्य की शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं हो सकता। साथ ही, जेन जी और जेन अल्फा को केवल बाजार का उपभोक्ता समझना बड़ी भूल होगी। यह पीढ़ी बाजार को बदलने के साथ नए बाजार भी बना सकती है। पर्यावरण, स्थानीय उत्पाद, सामाजिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी उसके खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। क्विक-कॉमर्स इसका एक उदाहरण है। भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है। देश के छोटे उत्पादकों, कारीगरों, स्थानीय ब्रांडों और पारंपरिक उद्योगों को डिजिटल बाजार से जोड़ा जाए तो जेन जी और जेन अल्फा केवल विदेशी ब्रांडों के ग्राहक नहीं रहेंगे, वे भारतीय उत्पादों के सबसे बड़े बाजार और प्रचारक भी बन सकते हैं। भारत युवा शक्ति का लाभ तभी उठा सकेगा, जब सरकार, उद्योग और समाज मिलकर शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसर बढ़ाएं। छोटे शहरों और गांवों के युवाओं को भी समान डिजिटल व शैक्षणिक अवसर मिलें।

जेन जी और जेन अल्फा को देश के भावी नागरिक, उद्यमी, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता के रूप में देखना होगा। भारत के पास मानव संसाधन की असाधारण शक्ति है। जेन जी और जेन अल्फा यह तय करेंगी कि भारत वर्ष 2047 में केवल बड़ी अर्थव्यवस्था होगा या एक ऐसा विकसित राष्ट्र भी होगा, जहां आर्थिक विकास के साथ ज्ञान, अवसर और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। जेन जी को केवल नौकरी नहीं, अवसर चाहिए। जेन अल्फा को केवल स्क्रीन नहीं, दिशा चाहिए। भारत को केवल युवा आबादी नहीं, कुशल और जिम्मेदार युवा शक्ति चाहिए। यदि शिक्षा उन्हें ज्ञान दे, तकनीक उन्हें अवसर दे, उद्योग उन्हें काम दे और समाज उन्हें विश्वास दे तो भारत की युवा पीढ़ी केवल देश की अर्थव्यवस्था को आगे नहीं बढ़ाएगी, बल्कि भारत की विकास यात्रा की दिशा ही बदल सकती है। वर्ष 2047 का भारत आज की पीढ़ी के हाथों में तैयार हो रहा है। सवाल यह नहीं है कि जेन जी और जेन अल्फा भारत का भविष्य हैं या नहीं। सवाल यह है कि हम उनके लिए कैसा भारत तैयार कर रहे हैं।