शरीर ही ब्रह्माण्ड: माया जानती है – ब्रह्म का निवास
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Gulab Kothari Article : कामना से शरीर का पोषण भी होता है। कामना का जो स्वरूप वासना या भावना में रहता है, वही कर्म की दिशा बन जाता है। फल भी उसी अनुरूप प्राप्त होते हैं। आगे की कामनाएं भी उसी तरह बदलने लग जाएंगी। इन्द्रियों से मन तक पहुंच वाले विषय उसी तरह विषय की व्याख्या करेंगे। बुद्धि का वही रूप हो जाएगा। श्वास-प्रश्वास के स्पन्दन भी पूरे शरीर में उसी प्रकार का वातावरण बनाएंगे।