शरीर ही ब्रह्माण्ड: माया ही ब्रह्म का बंधन
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कहीं किसी के चेहरे पर असंतोष नहीं था। 'तो हमारा सर्वमान्य निर्णय है कि धृष्टद्युम्न हमारे प्रधान सेनापति हों।Ó युधिष्ठिर बोले, 'अब हम अपनी सेना को प्रयाण का आदेश दे सकते हैं।Ó 'युद्धभूमि का चयन हो गया क्या?Ó अर्जुन ने पूछा।