शरीर ही ब्रह्माण्ड: माया ही ब्रह्म का बंधन
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क हा जाता है, 'जात न पूछो साधु की।Ó यानी साधु की कोई जाति नहीं होती। इसलिए उससे उसकी जाति के बारे में नहीं पूछी जानी चाहिए। इसके विपरीत हमारे यहां एक 'कहावतÓ राजनीति में खासा स्थान रखती है।