ओपिनियन

लेना होगा सबक

हादसा होता है तो सभी सरकारी विभाग मुस्तैद हो उठते हैं। दुनिया को दिखाने के लिए नोटिस भी थमा दिए जाते हैं।

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Dec 31, 2017
fire in mumbai buildings

हादसा होता है तो सभी सरकारी विभाग मुस्तैद हो उठते हैं। दुनिया को दिखाने के लिए नोटिस भी थमा दिए जाते हैं।

मुंबई के एक रेस्टोरेंट में लगी आग पन्द्रह जनों को लील गई। मौतें हुई इसलिए क्योंकि रेस्टोरेंट के वॉशरूम से निकलने का रास्ता लोगों को नहीं मिला। धुएं में दम घुटने से तड़प-तड़प कर लोगों की मौत हो गई। दुखद तथ्य ये कि मरने वालों में २८ साल की वह लडक़ी भी शामिल है जिसने चंद मिनटों पहले ही अपनी सालगिरह का केक काटा था।

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ये हादसा भले मुंबई में हुआ हो लेकिन ऐसी कहानी आए दिन देश के दूसरे शहरों में दोहराई जाती है। पूरे देश में बिना नियम-कायदे के होटल-रेस्टोरेंट धड़ल्ले से चल रहे हैं। इनके पास न तो आग बुझाने के पूरे साधन होते हैं और न ही भगदड़ मचने पर बाहर निकलने के सुरक्षित रास्ते। कोई गंभीर हादसा होता है तो सभी सरकारी विभाग मुस्तैद होने का दिखावा करते हैं। दुनिया को दिखाने के लिए होटल-रेस्टोरेंट मालिकों को नोटिस भी थमा दिए जाते हैं। एकाध को चंद दिनों के लिए बंद भी कर दिया जाता है।

बात ठंडी पड़ी नहीं कि सब कुछ फिर सामान्य हो जाता है। मानो इंसान की जान बेवजह जाने का किसी को कोई अफसोस ही न हो। हादसों से हम सबक लेना ही नहीं चाहते। न सरकारें और न पुलिस-प्रशासन। और तो और आम नागरिक भी इनसे सबक नहीं लेते। ऐसी घटनाओं पर संसद में एक दिन के हंगामे से न पहले कभी कोई फर्क पड़ा है और न आगे पडऩे वाला है।

मुंबई महानगर निगम देश की सबसे बड़ी स्वायत्त संस्था है। अनेक छोटे राज्यों से बड़ा बजट उसके पास है। बावजूद इसके नियम-कायदों के बिना मायानगरी में हजारों रेस्टोरेंट मिलीभगत के जरिये चल रहे हैं। जब तक इस पर कड़ाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों में जानें जाती रहेंगी। नेता और अधिकारी हैं कि घडिय़ाली आंसू यूं ही बहाते रहेंगे।

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Published on:
31 Dec 2017 12:59 pm
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