वैश्विक आर्थिक मंचों पर भी भारत की बात को दूसरे देशों ने गौर से सुना है। ब्रिक्स समिट हो या फिर आसियान हमें हर जगह तवज्जो दी गई है।
- सुदेश वर्मा
जोलोग हमारी विदेश नीति को कमतर आंक रहे हैं उनको समझना होगा कि यह हमारी विदेश नीति ही है जिसकी वजह से आज वैश्विक मंचों पर भारत की बात को तरजीह दी जाती है। वर्ष २०१७ में तो विश्व के पटल पर भारत सशक्त तरीके से उभरा है। डोकलाम के मसले पर चीन के साथ हमने जो रुख रखा उसका लोहा तो समूचे विश्व ने माना है। चीन की ओर से आक्रामक शैली की बयानबाजी के बावजूद हमने अपने परिपक्व लोकतंत्र और मजबूत सैन्य शक्ति की ओर जिस तरह से चीन का ध्यान आकृष्ट किया डोकलाम के मुद्दे पर भारत को बड़ी जीत हासिल हुई।
सबसे बड़ी बात यह है कि तनाव के हालात के बावजूद हमारे चीन के साथ संबंध खराब नहीं हुए। वैश्विक आर्थिक मंचों पर भी भारत की बात को दूसरे देशों ने गौर से सुना है। चाहे ब्रिक्स समिट हो या फिर आसियान हमारी बात को हर जगह तवज्जो दी गई है। बड़ी बात तो यह है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भी भारत ने अपनी दावेदारी मजबूती से रखी है। इस तरह के प्रयास पिछली सरकारों के कार्यकाल में हुए ही नहीं।
दक्षिण चीन सागर के मसले पर भी चीन की दखलंदाजी पर हमने जिस तरह से आपत्ति जताई वह सबके सामने हैं। जापान हो नेपाल या फिर आस्ट्रेलिया सब देशों के साथ भारत के रिश्ते मजबूत ही हुए हैं। रहा सवाल पाकिस्तान का। जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में पाकिस्तान अलग-थलग होता जा रहा है उसमें भी भारत के प्रयास ही रंग लाए हैं। आतंकवाद को प्रश्रय देने वाले पाकिस्तान के मंसूबों को नाकामयाब करने की हमारी उपलब्धि की भी अपनी कहानी है।
समूचे विश्व ने देखा कि किस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए आतंकियों को उनके घर में घुस कर मारा गया। भारत ऐसा कर सकता है यह पहले किसी को भरोसा नहीं होता था लेकिन इस सरकार ने वह कर दिखाया। पाक समर्थित आतंकी संगठनों के फंडिंग के रास्ते रोक कर एक तरह से इनकी कमर तोडऩे का काम ही हुआ है। नोटबंदी का सरकार ने जो कदम उठाया उसका ही नतीजा रहा कि कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं थम गईं।
हां, भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान ने जरूर कायरतापूर्ण प्रदर्शन किया है। भारत सरकार ने उसके मंसूबों का खुलासा करते हुए विश्व समुदाय के सामने बेनकाब किया है। यह भारत की कूटनीति का ही नतीजा था कि पाकिस्तान के सैन्य कोर्ट ने जिस भारतीय नागरिक जाधव को फांसी की सजा सुनाई उस पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने रोक लगा दी। रहा सवाल पाक के साथ बातचीत का, भारत पहले ही कह चुका है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकती। देर-सबेर पाकिस्तान को भी यह समझ में आ ही जाएगा।