दूरदृष्टा कुलिश जीः 14 जून 1995 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित 'मनुष्य ऋतु चक्र को कितना बदल सकता है' आलेख
कर्पूर चंद्र कुलिश जी का मानना था कि प्रकृति में मूल रूप से गर्मी और सर्दी ही दो प्रमुख अवस्थाएं हैं, जिनके उतार-चढ़ाव से वर्षा सहित छह ऋतुओं का निर्माण होता है। कुलिश जी ने कहा था कि आज जलवायु परिवर्तन को लेकर अनेक आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं-कहीं धरती के अत्यधिक गर्म होने की चेतावनी है तो कहीं ध्रुवीय बर्फ पिघलने से समुद्र का स्तर बढ़ने की चिंता। उद्योगों की चिमनियों, एसी से निकलने वाली गैसों और बढ़ते प्रदूषण को इसका कारण माना जाता है, साथ ही ओजोन परत और ग्रीनहाउस प्रभाव जैसे शब्द चर्चा में हैं। कुलिश जी का मत है कि ऋतुचक्र प्रकृक्ति के शीत-उष्ण संतुलन से संचालित होता है। इसलिए केवल मौसम की चर्चा करने के बजाय प्रदूषण और विषैले धुएं के मूल कारणों पर प्रहार करना ही जलवायु संकट का वास्तविक समाधान है।