
sharir hi brahmand
Gulab Kothari Article शरीर ही ब्रह्माण्ड: अव्यय पुरुष सृष्टि में ब्रह्म का रूप ही है। सृष्टि का प्रथम सत्य है। जल समुद्र का प्रथम बुद्बुद् है। इस बुद्बुद् का केन्द्र परात्पर है, परिधि मायाबल है। वेदत्रयी ही बुद्बुद् है- केन्द्र ऋक्, परिधि साम, मध्य में यत्+जू। यहां यह केन्द्र में ‘यत्’ रूप पुरुष प्रतिष्ठित है। यही केन्द्र हृदय बनता है- अव्यय मन का। मनोमयी अव्यय की कामना हृदय के ब्रह्मा प्राण की अशनाया बनती है। इन्द्र और विष्णु प्राण इस क्षुधा/कामना की पूर्ति करते हैं। उस हृदय को ही ब्रह्म की मूल प्रकृति कहा जाता है। अव्यय पुरुष एवं प्रकृति मिलकर ही ‘एकोहं बहुस्याम्’ रूप विश्व का निर्माण और संचालन करते हैं।
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की बहुचर्चित आलेखमाला है - शरीर ही ब्रह्माण्ड। इसमें विभिन्न बिंदुओं/विषयों की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्याख्या प्रस्तुत की जाती है। गुलाब कोठारी को वैदिक अध्ययन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उन्हें 2002 में नीदरलैन्ड के इन्टर्कल्चर विश्वविद्यालय ने फिलोसोफी में डी.लिट की उपाधि से सम्मानित किया था। उन्हें 2011 में उनकी पुस्तक मैं ही राधा, मैं ही कृष्ण के लिए मूर्ति देवी पुरस्कार और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान से सम्मानित किया गया था। 'शरीर ही ब्रह्माण्ड' शृंखला में प्रकाशित विशेष लेख पढ़ने के लिए क्लिक करें नीचे दिए लिंक्स पर-
Podcast- नाम ब्रह्म का-प्रपंच माया के- |https://www.patrika.com/opinion/sharir-hi-brahmand-20601016
Podcast:दशम द्वार:चेतना का अवतरण-https://www.patrika.com/news-bulletin/podcast-dshm-dvar-chetna-ka-avtrn-20562674
Podcast: शरीर ही ब्रह्माण्ड : अंधकार और मौन में माया का साम्राज्य-https://www.patrika.com/news-bulletin/sharir-hi-brahmand-andhkar-maun-maya-ka-samrajya-gulab-kothari-article-20544791
Podcast:शरीर ही ब्रह्माण्ड:माया भीतर द्रष्टा, बाहर विश्व- https://www.patrika.com/opinion/podcast-shrir-hi-brhmand-maya-bhitr-drshta-bahr-vishv-20527081
Updated on:
29 May 2026, 8:25 PM IST
Published on:
29 May 2026, 8:25 PM IST
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