ओपिनियन

GUEST EDITOR – निरंतर नया सीखते रहें और अपनी राह खुद बनाएं

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, समाजशास्त्र, प्रबंधन और साइबर लॉ, एनएलपी, रेकी, ग्राफोलॉजी जैसे विषयों से जुड़ी मेरी पढ़ाई ने मुझे अलग-अलग दृष्टिकोणों से चीजों को समझने का अवसर दिया।
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Updated: 31 Oct 2026, 3:53 PM IST
dr lata suresh
dr lata suresh

भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान में नॉलेज रिसोर्स सेंटर तथा संस्थागत साझेदारियों एवं कॉर्पोरेट संचार की प्रमुख डॉ. लता सुरेश अकादमिक नेतृत्व, शोध, लेखन, प्रशिक्षण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 34 वर्षों से अधिक के पेशेवर अनुभव के साथ वे एक अकादमिक प्रशासक, लेखिका, कवयित्री, शोधकर्ता, प्रशिक्षक और गायिका के रूप में अपनी पहचान रखती हैं। एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रीय पुरस्कार, नारी शक्ति सम्मान और टर्की एक्सीलेंस अवार्ड सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित डॉ. लता का मानना है कि सीखने की इच्छा, आत्मनिर्भरता और अपने पैशन के प्रति समर्पण व्यक्ति को आगे बढऩे की ताकत देते हैं। अपने जीवन के सफर, संघर्षों, उपलब्धियों और अनुभवों को साझा करते हुए वे कहती हैं कि समय की पाबंदी, कुछ नया सीखने की ललक और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा ने मेरे जीवन को दिशा दी। मैंने कभी सीखने से परहेज नहीं किया। जो सीखना चाहा, उसके लिए समय निकाला। जीवन में कई ऐसे मोड़ आए, जहां परिस्थितियों ने मेरी योजनाओं को बदला, लेकिन मैंने आगे बढऩे की कोशिश नहीं छोड़ी। शिक्षा, संस्थागत नेतृत्व, लेखन, सामाजिक सेवा और संगीत मेरे जीवन के अलग-अलग पहलू हैं, लेकिन इन सबके केंद्र में सीखने, संवेदनशील बने रहने और कुछ नया सृजित करने का भाव है।

हमेशा रहा उत्साह
मैं हमेशा से समय की पाबंद रही हूं। मुझे कभी भी कुछ नया सीखने से परहेज नहीं रहा। जो सीखना था, उसके लिए मैंने समय निकाला। स्कूल के दिनों से ही मुझे अलग-अलग गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिला। मेरे शिक्षकों ने हमेशा आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित किया। माता-पिता भी शुरू से सहयोगी रहे। शादी के बाद मेरे पति ने भी हर कदम पर मेरा साथ दिया। मुझे लगता है कि जीवन में आगे बढऩे के लिए अपनी मेहनत के साथ परिवार और मार्गदर्शकों का सहयोग भी बहुत मायने रखता है। मैंने हमेशा कोशिश की कि किसी एक क्षेत्र तक खुद को सीमित न रखूं। मुझे लगता था कि सीखने के लिए बहुत कुछ है और हर नया अनुभव हमें कुछ न कुछ सिखाता है। यही सोच मेरे जीवन में आगे भी काम आई।

समाज सेवा की इच्छा ने दिखाई नई राह
मुझे शुरू से समाज सेवा में विशेष रुचि थी। मैं उदयपुर जाकर सोशल वर्क की पढ़ाई करना चाहती थी, लेकिन वहां जाने का अवसर नहीं मिल पाया। इसके बाद मैंने राजस्थान विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में मास्टर्स किया। उस समय मैं यूपीएससी की तैयारी भी कर रही थी। मैंने प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी और मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुटी हुई थी। इसी दौरान मुझे दुर्लभजी अस्पताल में काम करने का अवसर मिला। मैंने काम के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उस समय मेरे सामने कई जिम्मेदारियां थीं, लेकिन मैंने कभी यह नहीं सोचा कि परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं तो आगे नहीं बढ़ा जा सकता। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि व्यक्ति को अपनी राह खुद बनाने की कोशिश करनी चाहिए। मैं कभी किसी पर निर्भर नहीं रही और अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए लगातार प्रयास करती रही।

समय के साथ खुद को बदलना सीखा
जब मैंने अपने कॅरियर की शुरुआत की, तब कंप्यूटर का चलन धीरे-धीरे बढ़ रहा था। मैंने हमेशा समय की जरूरत को समझने और उसके अनुरूप खुद को तैयार करने की कोशिश की है। मेरे लिए शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रही। मैंने अलग-अलग विषयों का अध्ययन किया, नए कौशल सीखे और अपनी समझ को व्यापक बनाया। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, समाजशास्त्र, प्रबंधन और साइबर लॉ, एनएलपी, रेकी, ग्राफोलॉजी जैसे विषयों से जुड़ी मेरी पढ़ाई ने मुझे अलग-अलग दृष्टिकोणों से चीजों को समझने का अवसर दिया।
मैं मानती हूं कि जीवन में आगे बढऩे के लिए लगातार सीखते रहना जरूरी है। केवल यह सोचकर नहीं बैठना चाहिए कि हमने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली है या कोई उपलब्धि हासिल कर ली है। दुनिया बदल रही है, इसलिए हमें भी अपने ज्ञान और कौशल को समय के साथ विकसित करना चाहिए।

मेरे मेंटर ने लेखन के लिए प्रेरित किया
मेरे जीवन में मेरे मेंटर उदय पारीक की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्हें एचआर के क्षेत्र में अग्रणी व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। उनकी प्रेरणा से ही मैं लेखन के क्षेत्र में आगे बढ़ी। कई बार व्यक्ति के भीतर प्रतिभा होती है, लेकिन उसे सही दिशा देने वाले किसी मार्गदर्शक की जरूरत होती है। मेरे लिए उदय पारीक ऐसे ही मार्गदर्शक रहे। मैं हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कविता और कहानियां लिखती हूं। लेखन ने मुझे अपने विचारों और अनुभवों को अभिव्यक्त करने का अवसर दिया। मैंने महसूस किया कि अपने आसपास होने वाली घटनाओं को केवल देखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समझना और उनसे मिलने वाली सीख को दूसरों तक पहुंचाना भी जरूरी है।
अब तक मैंने कई पुस्तकें लिखी हैं और 70 से अधिक शोध पत्रों एवं लेखों के माध्यम से अपने विचार साझा किए हैं। मेरे लेखन में प्रबंधन, नेतृत्व, सामाजिक सरोकार, ज्ञान और मानवीय संवेदनाओं जैसे विषय शामिल रहे हैं। मेरे लिए लेखन केवल पेशा नहीं, बल्कि स्वयं को समझने और अपने अनुभवों को समाज से साझा करने का माध्यम है।

यात्राओं ने समझने का नजरिया दिया
अपने काम और शोध के सिलसिले में मैंने कई देशों की यात्रा की है। इन यात्राओं ने मुझे अलग-अलग संस्कृतियों, लोगों और परिस्थितियों को समझने का अवसर दिया। जब हम अपने परिचित वातावरण से बाहर निकलते हैं, तो दुनिया को देखने का नजरिया भी बदलता है।
मेरी एक पुस्तक 'इंसानियत की उड़ान' भी यात्रा से जुड़े अनुभवों से प्रेरित है। कुछ लोग कजाकिस्तान से आते समय अजरबैजान में फंस गए थे। उस घटना और उससे जुड़े मानवीय अनुभवों ने मुझे प्रभावित किया। मैंने इस अनुभव को पुस्तक के माध्यम से अभिव्यक्त किया।
मुझे लगता है कि यात्राएं केवल नई जगहों को देखने के लिए नहीं होतीं। वे हमें लोगों के संघर्ष, उनकी परिस्थितियों और उनके भीतर मौजूद उम्मीदों को समझना भी सिखाती हैं। अलग-अलग देशों में जाने से मुझे यह अनुभव हुआ कि भाषा और संस्कृति अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवीय संवेदनाओं का महत्त्व हर जगह है। मैंने हमेशा अपने संस्कारों और भारतीय संस्कृति से जुड़े रहने की कोशिश की है। मेरा मानना है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए दुनिया से सीखना चाहिए। जब हम अपने मूल्यों को व्यवहार में उतारते हैं, तो वे हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाते हैं।

युवाओं को स्वतंत्र सोचना भी सीखना चाहिए
आज के युवाओं के लिए मेरा संदेश है कि पढऩे-लिखने के साथ स्वतंत्र रूप से सोचने की आदत भी विकसित करें। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना या डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि हम जो पढ़ रहे हैं, उसका वास्तविक जीवन में क्या उपयोग है और उससे हम किस तरह समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। पहले की शिक्षा पद्धति में सैद्धांतिक ज्ञान पर अधिक जोर दिया जाता था। अब नई शिक्षा नीति में कौशल विकास को भी महत्त्व दिया जा रहा है। मुझे लगता है कि यह बदलाव जरूरी है। युवाओं को अपनी रुचि के अनुसार कौशल विकसित करने चाहिए और बदलते समय के अनुरूप खुद को तैयार करना चाहिए। मैंने भी अपने जीवन में यही किया है। जब जिस चीज की जरूरत महसूस हुई, उसे सीखने की कोशिश की। मेरा मानना है कि अवसरों की प्रतीक्षा करने के बजाय खुद को अवसरों के योग्य बनाना चाहिए। माता-पिता की भी इसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें समय देना, उनकी बात सुनना और उनकी रुचियों को समझना भी जरूरी है। यदि बच्चों को सही समय पर सही दिशा मिल जाए, तो उनके जीवन की दिशा बदल सकती है।

पेरेंटिंग पर किताब लिख रही हूं
बच्चों के विकास और परवरिश को लेकर मेरी विशेष रुचि है। मैं पेरेंटिंग पर एक पुस्तक लिख रही हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि आज के समय में माता-पिता के लिए बच्चों को समझना और उन्हें सही दिशा देना पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गया है। मैं गर्भधारण संस्कार से जुड़ी गतिविधियां भी करती हूं। इस दौरान मैंने महसूस किया है कि कई बार हम संस्कारों के मूल भाव को समझने के बजाय उन्हें केवल आयोजन या फोटो सेशन तक सीमित कर देते हैं। मेरा मानना है कि किसी भी संस्कार का महत्त्व उसके बाहरी स्वरूप से अधिक उसकी भावना और उद्देश्य में होता है। बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता का समय, व्यवहार और सोच बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं। बच्चे केवल हमारी कही हुई बातें नहीं सीखते, बल्कि हमें देखकर भी बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम उन्हें अच्छे संस्कार देने के साथ अपने व्यवहार में भी उन मूल्यों को अपनाएं।

संगीत मेरे लिए रचनात्मकता का माध्यम

मेरे जीवन में संगीत का विशेष स्थान है। मेरे पति सुरेश गहलोत गजल गायक हैं और मुझे भी गायन में रुचि है। मैं कई मंचों पर उनके साथ सहगायिका के रूप में प्रस्तुति दे चुकी हूं। संगीत मुझे सुकून देता है। मुझे लगता है कि संगीत मन को शांत करने के साथ उसे सक्रिय भी रखता है। इससे रचनात्मकता बढ़ती है और जीवन में एक अलग तरह का संतुलन आता है। जब हम लगातार काम करते हैं, तो अपने लिए ऐसे समय की जरूरत होती है, जिसमें हम अपनी रुचि के काम कर सकें। मेरे लिए संगीत केवल एक शौक नहीं है। यह मेरे जीवन का ऐसा हिस्सा है, जो मुझे मानसिक शांति देता है और अपने भीतर की रचनात्मकता से जुड़े रहने में मदद करता है। मुझे लगता है कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में ऐसी गतिविधियों के लिए समय निकालना चाहिए, जो उसे खुशी और आत्मविश्वास देती हों।

एक छोटी-सी आत्मीयता
मुझे अपने जीवन की एक घटना आज भी याद है। मैं एक बार किसी दीक्षांत समारोह में गई थी। मैंने कार्यक्रम के लिए गाउन पहना था। समारोह समाप्त होने के बाद जब मैं गाउन उतारने जा रही थी, तभी वहां मौजूद एक महिला सुरक्षा गार्ड ने मुझसे कहा, ‘मैम, आप अच्छी लग रही हैं।’ उसकी बात सुनकर मैंने उसे गले लगा लिया। मेरे लिए यह एक सहज प्रतिक्रिया थी, लेकिन उस महिला के लिए यह बहुत भावुक कर देने वाला क्षण बन गया। उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसने मुझसे कहा कि उसने कभी सोचा नहीं था कि कोई उसे भी इस तरह गले लगा सकता है। उसे लगा कि मैंने उसे वह सम्मान दिया, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी। उस घटना ने मुझे एक बार फिर महसूस कराया कि हमारे छोटे-छोटे व्यवहार भी किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में कितना महत्त्व रख सकते हैं। हम अक्सर लोगों को उनके पद, काम या सामाजिक स्थिति के आधार पर देखते हैं, जबकि हर व्यक्ति सम्मान और आत्मीयता का हकदार है। मेरा मानना है कि हमें सहज रूप से रहना चाहिए। हम जहां भी जाएं, हमारे व्यवहार में संवेदनशीलता और सम्मान दिखाई देना चाहिए। अच्छे काम की खुशबू हमेशा फैलती है और लोगों के दिलों तक पहुंचती है।

गलत को गलत कहने का साहस होना चाहिए
अपने पेशेवर जीवन में मैंने देखा है कि कई जगह महिलाओं को खुद को साबित करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ते हैं। ऐसी परिस्थितियों में मेरा मानना है कि अपने काम के प्रति सजग रहना और अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही, यदि हमें लगता है कि कुछ गलत हो रहा है, तो उसे गलत कहने में संकोच नहीं करना चाहिए। अपनी बात को तथ्यों और ठोस तर्कों के साथ रखना चाहिए। केवल चुप रहना या परिस्थितियों को स्वीकार कर लेना हमेशा सही रास्ता नहीं होता। मेरे लिए आत्मविश्वास का अर्थ केवल अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना नहीं है, बल्कि जरूरत पडऩे पर अपने विचारों और मूल्यों के पक्ष में खड़े होना भी है। महिलाओं को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। आर्थिक आत्मनिर्भरता महत्त्वपूर्ण है, लेकिन मानसिक मजबूती और अपनी बात रखने का साहस भी उतना ही जरूरी है।

संस्थागत नेतृत्व के साथ समाज के लिए काम करने की चाह
वर्तमान में मैं भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान में नॉलेज रिसोर्स सेंटर तथा संस्थागत साझेदारियों एवं कॉर्पोरेट संचार से जुड़ी जिम्मेदारियां निभा रही हूं। मेरा काम ज्ञान संसाधनों को मजबूत करने, संस्थागत सहयोग विकसित करने, अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करने से जुड़ा है। इस दौरान मुझे राष्ट्रीय स्तर की कई संस्थागत पहलों में योगदान देने का अवसर मिला है। मैंने अकादमिक गतिविधियों, शोध और संस्थागत विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों में भाग लिया है। मेरे लिए यह अनुभव महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि संस्थानों को मजबूत बनाना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि ज्ञान और अवसरों को अधिक लोगों तक पहुंचाने का माध्यम भी है।अकादमिक और पेशेवर गतिविधियों के साथ मुझे सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहना भी जरूरी लगता है। मैं मानती हूं कि व्यक्ति के अनुभवों का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह उनसे मिली सीख को दूसरों के साथ साझा करे और समाज के लिए उपयोगी योगदान दे सके।

अपनी किताबों को करना है पूरा
इस समय मेरा विशेष ध्यान अपनी पुस्तकों को पूरा करने पर है। मैं चाहती हूं कि जिन विषयों पर लंबे समय से काम कर रही हूं, उन्हें व्यवस्थित रूप से पाठकों तक पहुंचा सकूं। मेरे लिए लेखन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें हर नया अनुभव कुछ नया सोचने और लिखने की प्रेरणा देता है। मैंने जीवन में यह सीखा है कि अपने पैशन को समय देना बहुत जरूरी है। जब हम अपनी रुचि के काम से जुड़ते हैं, तो हमारे भीतर हिम्मत आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके लिए अनुशासन भी चाहिए और लगातार प्रयास करने की इच्छा भी। मेरी कोशिश रही है कि सीखने, काम करने और अपने आसपास के लोगों से जुड़े रहने की प्रक्रिया कभी न रुके। मैं चाहती हूं कि अपने अनुभवों, लेखन और काम के माध्यम से लोगों को प्रेरित कर सकूं। मेरे लिए जीवन का सार ज्ञान अर्जित करने, सेवा का भाव बनाए रखने और सृजन करते रहने में है। मुझे लगता है कि यदि हम अपने काम के प्रति ईमानदार रहें, दूसरों का सम्मान करें और सीखने की इच्छा बनाए रखें, तो हम न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

उपलब्धियों को मिले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
मेरे लिए यह संतोष की बात है कि शिक्षा, शोध, लेखन और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में किए गए मेरे काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। मुझे अब तक 35 से अधिक पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया है। इनमें एपीजे अब्दुल कलाम राष्ट्रीय पुरस्कार, नारी शक्ति सम्मान, कम्युनिकेशंस माएस्ट्रो अवार्ड, वल्र्ड बुक ऑफ रिकॉड्र्स से जुड़ा सम्मान, टर्की एक्सीलेंस अवार्ड और अमेरिका का एसएलए एशियन प्रोफेशनल अवॉर्ड शामिल हैं। शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए आइआइयू ऑस्ट्रेलिया की ओर से मानद डॉक्टरेट भी प्रदान की गई है। इसके अलावा, ब्रिटिश काउंसिल द्वारा समर्थित बर्मिंघम विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम में कॉमनवेल्थ प्रोफेशनल फेलोशिप प्राप्त करना मेरे लिए एक महत्त्वपूर्ण अनुभव रहा है।मैं इन सम्मानों को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखती, बल्कि इन्हें अपने काम के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाने वाली प्रेरणा मानती हूं। मेरे लिए किसी भी पुरस्कार का वास्तविक महत्त्व इस बात में है कि वह आगे भी बेहतर काम करने, नए विषयों को समझने और समाज के लिए उपयोगी योगदान देने की प्रेरणा दे। मेरा विश्वास है कि सीखने और सृजन की प्रक्रिया निरंतर चलती रहनी चाहिए।

Updated on:
31 Oct 2026, 3:53 PM IST
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