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PATRIKA PODCAST : संतुष्ट नहीं होने देता अभिमान

अभिमान में ही व्यक्ति स्वयं के बारे में ‘अपने मुंह मियांं मिट्ठू बनता है। अपनी प्रशंसा करते थकता नहीं है। किसी को शरीर का, ज्ञान का, धन या पद का अभिमान हो सकता है।
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भारत

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Shaily Sharma

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Updated: 30 Oct 2026, 6:59 PM IST

patrika podcast

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Gulab Kothari Articles : स्पंदन : आज शिक्षित वर्ग सर्वाधिक दु:खी जान पड़ता है। अभिमान ही उनके जीवन का नेतृत्व करता है। कर्ता भाव से जकड़े हुए है। जो इनकी बुद्धि में नहीं आता, उसका अस्तित्व स्वीकार्य नहीं है। मन की भाषा, संवेदनाओं से इनका पाला ही नहीं पड़ता। अत: श्रद्धा, भक्ति, करुणा, समर्पण जैसे मानवीय गुणों से ये रूखे ही दिखाई पड़ते हैं।