
छत्तीसगढ़ में सड़कों की बुरी स्थिति है। राजधानी रायपुर, जहां शासन-प्रशासन के उच्चाधिकारियों से लेकर सरकार बैठी है, सहित पूरे प्रदेश में सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे हैं..! मानसून के पहले जहां अधिकतर सड़कों पर धूल उड़ती रहती है, वहीं मानसून में तो कहीं-कहीं ये दलदल-सी हो जाती हैं।
खराब सड़कों को लेकर हाईकोर्ट भी नाराजगी जाहिर कर चुका है और शासन-प्रशासन से जवाब तलब कर चुका है। खराब सड़कों को लेकर समय-समय पर क्या गांव क्या शहर, सभी जगह धरना-प्रदर्शन-आंदोलन हो चुके हैं। सड़क को लेकर जब लोग उग्र हो उठते हैं तो लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए 'लेप' लगाने का काम यानी पैचवर्क कर दिया जाता है।
इसके अलावा शासन-प्रशासन और सरकार द्वारा दो वार्षिक आयोजन भी किए जाते हैं, जिसके तहत मानसून से पहले और मानसून के बाद फटकार और चेतावनी के साथ पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों-कर्मचारियों-ठेकेदारों को ये दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं कि इतने दिनों में सड़कें ठीक कर दी जाएं।
सड़कों का खराब होना एक बड़ी समस्या है, जिसके कई कारणों में से एक भ्रष्टाचार भी है। भ्रष्टाचार के इस खेल में ऊपर से लेकर नीचे तक कई लोग संलिप्त होते हैं, थोड़े से फायदे के लिए वे लोग आम नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ करते हैं। गुणवत्तापूर्ण सामग्री और अच्छी निर्माण तकनीक के उपयोग से सड़कों की जीवन अवधि बढ़ाती है।
पीडब्ल्यूडी सड़कों की मरम्मत के लिए एक नई तकनीक अपनाने जा रहा है। पेट्रोल मेंटेनेंस यूनिट, जिसे कि रोड एंबुलेंस का नाम दिया गया है। इस रोड एंबुलेंस के माध्यम से सड़कों की मरम्मत और गुणवत्ता सुधारने का कार्य 24 से 48 घंटों में किया जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता हैं कि जहां सड़कें नाममात्र को रह गई हैं या बड़े-बड़े गड्ढे हैं यानी कि 'कैंसर' जैसी बीमारी हो चुकी है, उनका इलाज रोड एंबुलेंस जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में कैसे हो सकेगा?-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
Updated on:
30 Oct 2026, 1:36 AM IST
Published on:
30 Oct 2026, 1:36 AM IST
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