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‘वॉलंटरी एग्जिट ऑफर’ क्या वास्तव में है स्वैच्छिक?

ओरेकल पहले ही अपने भारतीय कामकाज से बहुत से लोगों को निकाल चुकी है और दूसरी कंपनियां भी यही करेंगी। हमने सालों तक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को भारतीय टेक की अगली बड़ी चीज बताकर उनका जश्न मनाया है।
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भारत

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Opinion Desk

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प्रवीण कौशल

•

Updated: 29 Oct 2026, 4:15 PM IST

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हैदराबाद में माइक्रोसॉफ्ट में काम करने वाले मेरे एक दोस्त ने सोमवार रात मुझे मैसेज किया- 'मेल आ गया'। फिर एक मिनट बाद- 'तुम होते तो क्या करते?' वह माइक्रोसॉफ्ट के उन लगभग 60,000 कर्मचारियों में से एक है, जिन्हें कंपनी छोडऩे के बदले पैसे की पेशकश की गई है। यह कंपनी के दुनियाभर के 2,23,000 कर्मचारियों के एक-चौथाई से भी ज्यादा है। यह पेशकश अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा और भारत की कुछ चुनिंदा टीमों में लेवल 70 और उससे नीचे के कर्मचारियों के लिए है। माइक्रोसॉफ्ट इसे 'वॉलंटरी एग्जिट ऑफर' कहती है और तकनीकी तौर पर देखें तो यह है भी वही। किसी को नौकरी से निकाला नहीं गया है और कोई भी मना करके अपनी नौकरी पर बना रह सकता है। मेरे पास उसके लिए कोई अच्छा जवाब नहीं था, क्योंकि मैं जानता हूं कि ऐसे मामलों में आमतौर पर क्या होता है।

जब आपके मैनेजर की टीम 'भाग लेने वाली' सूची में हो और कंपनी कहे कि वह अपने कार्यबल को बदलती जरूरतों के हिसाब से ढाल रही है, तो आपको नहीं लगता कि आपको कोई विकल्प दिया जा रहा है। आप सोचने लगते हैं कि मना करने पर क्या होगा। क्या छह महीने बाद छंटनी होगी और तब पैकेज छोटा होगा या मिलेगा ही नहीं? माइक्रोसॉफ्ट ने ऐसा कुछ नहीं कहा है। लेकिन जिन लोगों को वह मेल मिला है, वे यही सोच रहे हैं और इसी से तय होगा कि उनमें से कितने लोग हस्ताक्षर करेंगे। इसके पीछे की वजह समझना मुश्किल नहीं है। माइक्रोसॉफ्ट इस साल लगभग 175 अरब डॉलर खर्च करने वाली है, ज्यादातर डेटा सेंटरों और चिप्स पर। निवेशक जानना चाहते हैं कि यह पैसा वापस कब आएगा। वेतन उन गिने-चुने बड़े खर्चों में से है, जिन्हें कोई कंपनी जल्दी घटा सकती है। इस साल वसंत में माइक्रोसॉफ्ट ने अमरीका में लगभग 9,000 कर्मचारियों को बायआउट की पेशकश की थी। जुलाई में उसने 4,800 नौकरियां खत्म कीं, ज्यादातर गेमिंग में। और अब यह। मुझे हैरानी हुई प्रभावित टीमों की सूची देखकर।

खबरों के मुताबिक इसमें विंडोज, एक्सबॉक्स, फाइनेंस और एचआर के साथ-साथ कोपायलट और एआइ एक्सपीरियंस की टीमें भी शामिल हैं। यानी एआइ बनाने वाले लोग भी उसकी लागत से सुरक्षित नहीं हैं। खबरों के अनुसार सेल्स, कमर्शियल बिजनेस और सिक्योरिटी को इससे बाहर रखा गया है। इससे काफी कुछ पता चलता है कि कंपनी अपनी कमाई का स्रोत कहां मानती है। भारत के लिए यह बहुत मायने रखता है। माइक्रोसॉफ्ट की यहां बड़ी इंजीनियरिंग और सपोर्ट टीमें हैं। ओरेकल पहले ही अपने भारतीय कामकाज से बहुत से लोगों को निकाल चुकी है और दूसरी कंपनियां भी यही करेंगी। हमने सालों तक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को भारतीय टेक की अगली बड़ी चीज बताकर उनका जश्न मनाया है। हम इस बात पर कम बात करते हैं कि जब किसी पेरेंट कंपनी को चुपचाप लागत घटानी होती है, तो उसकी नजर सबसे पहले इन्हीं पर जाती है।

भारतीय आइटी इसलिए बढ़ा, क्योंकि ज्यादा काम का मतलब था ज्यादा लोगों की भर्ती। एआइ इस रिश्ते को तोड़ रहा है। विदेशी ग्राहक अब छोटी टीमें और कम बिल चाहते हैं, और उम्मीद करते हैं कि एआइ से जो बचत हो, उसमें उनका भी हिस्सा हो। बेंगलूरु के एक 38 साल के इंजीनियर के बारे में सोचिए, जिस पर होम लोन है, कार लोन है और जिसके दो बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। अगर वह वेतन रुकता है, तो खर्च भी उसके साथ रुक जाता है। हमारे टेक शहरों में बिल्डरों ने पूरे-पूरे प्रोजेक्ट इस भरोसे पर तय किए हैं कि ये वेतन आते रहेंगे। उनमें से कुछ को बड़ा झटका लगने वाला है। सरकार इसमें से कुछ भी रोक नहीं सकती, लेकिन थोड़ी मदद जरूर कर सकती है। फिलहाल किसी उचित स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के तहत मिलने वाली रकम सिर्फ पांच लाख रुपए तक कर-मुक्त है। इससे ऊपर की रकम पर वेतन की तरह टैक्स लगता है। ऐसी योजना के बाहर दिए गए सामान्य सेवरेंस पर पूरा टैक्स लगता है। सालों से यह पांच लाख रुपए की सीमा वहीं की वहीं है, जबकि किराया, फीस और घरों की कीमतें आसमान छू गई हैं। एक मिड-लेवल प्रोफेशनल के लिए यह रकम मुश्किल से कुछ महीनों की ईएमआइ के बराबर है।

वित्त मंत्री को यह सीमा काफी बढ़ानी चाहिए और कम से कम अगले कुछ सालों के लिए इसे सेवरेंस और फुल-एंड-फाइनल सेटलमेंट पर भी लागू करना चाहिए। वेतनभोगी लोग पहले से ही भारत के प्रत्यक्ष करों का बड़ा हिस्सा चुकाते हैं। व्यक्तिगत आयकर संग्रह अब कॉर्पोरेट टैक्स से ज्यादा है। बहुत कम भारतीय आयकर भरते हैं और जो भरते हैं, उन्हें नौकरी जाने पर लगभग कुछ नहीं मिलता। उन्हें अपनी एग्जिट की रकम का ज्यादा हिस्सा रखने देने से सरकार पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन आगे का रास्ता तलाश रहे किसी परिवार के लिए इसका मतलब हो सकता है कुछ और महीने, जिनमें वे नया हुनर सीख सकें या फिर से शुरुआत कर सकें। लोगों को भी अपना खयाल खुद रखना होगा। अगर हो सके तो इतनी बचत कर लें जो दो-तीन साल चल सके। यह मानकर कोई बड़ा नया लोन लेने से पहले बहुत सोच-समझ लें कि आपकी नौकरी सुरक्षित है। एआइ टूल्स का अच्छी तरह इस्तेमाल करना सीखें, क्योंकि जो लोग इनसे असली काम करवा पाएंगे, कंपनियां उन्हीं को रखेंगी। इस सब से कुछ नया निकलेगा। हमेशा निकलता है। लेकिन वहां तक पहुंचना मुश्किल होगा और बहुत से परिवारों के लिए यह दर्दनाक होगा। इसे स्वैच्छिक कह देने से यह आसान नहीं हो जाता।

प्रवीण कौशल,(लोक नीति विश्लेषक एवं टिप्पणीकार)