
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों का दायरा इन 20-25 सालों में तेजी से बढ़ा है। प्रदेश में बेतरतीब तरीके से शहरीकरण हो रहा है, जिसकी जद में शहरों से लगे गांव आ रहे हैं, जोकि न तो पूरी तरह गांव रह जाते और न ही शहर का हिस्सा बन पा रहे हैं। शहरी सीमा से लगे गांवों को समय-समय पर आधिकारिक रूप से भी शहरों में शामिल किया जा रहा है। शहरों में उपलब्ध होने वाले रोजगार-कारोबार सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की वजह से शहरी आबादी में तेजी से इजाफा होता जा रहा है।
सरकार ने तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सुव्यवस्थित विकास की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विधानसभा के इसी बजट सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक 2026 को पारित किया था। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में अनियंत्रित विस्तार और अवैध प्लॉटिंग पर नियंत्रण स्थापित करते हुए योजनाबद्ध विकास को गति देना है। सरकार अब शहरीकरण प्रीमियम योजना लेकर आ रही है। शहरीकरण प्रीमियम के तहत एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगरीय निकायों के आसपास के उपयुक्त ग्रामीण क्षेत्रों यानी पेरि-अर्बन विलेजेस को चरणबद्ध तरीके से नगरीय निकायों में शामिल करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। केंद्र सरकार से प्रीमियम अनुदान प्राप्त करने के लिए नए शामिल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास, चरणबद्ध टैक्स लगाने सहित अन्य जरूरी शर्तों को पूरा करना होगा।
गांवों को नगर निगम या शहरी सीमा में शामिल करने से वहां बुनियादी सुविधाओं सहित सुव्यवस्थित विकास होता है। लेकिन, दूसरी तस्वीर यह भी है कि वे ग्रामवासी अब शहरी होने की वजह से टैक्स और प्रशासनिक बदलाव जैसी समस्याओं से दो-चार होने लगते हैं। साथ ही ऐसे ग्रामीण इलाकों पर शहर में शामिल होने का ठप्पा तो लग जाता है, लेकिन हकीकत में बुनियादी सुविधाएं वर्षों तक नहीं मिल पाती हैं। सरकार को चाहिए कि समयबद्ध तरीके से उनका समुचित और सुनियोजित विकास करे।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
Updated on:
09 Oct 2026 01:46 am
Published on:
09 Oct 2026 01:46 am
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