
ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर में नल से जल पहुंचाने की भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन है। पिछले दिनों केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के दोनों दलों के सांसदों (लोकसभा और राज्यसभा) की बैठक हुई, जिसमें 'माननीयों' ने मिशन के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल उठाए और नाराजगी व्यक्त की।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार छत्तीसगढ़ के 83.94 प्रतिशत ग्रामीण घरों में नल से जल का कनेक्शन दे दिया गया है। ये आंकड़े बिल्कुल सही हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या नल कनेक्शन कर देने मात्र से उसमें से जल आ जाता है? प्रदेश में जल जीवन मिशन के कार्यों में भारी लापरवाही हुई है; कहीं पानी ही नहीं है और टंकी बना दी गई है, तो कहीं घरों में नल कनेक्शन दे दिए गए पर पानी ही नहीं आता उनमें। कैग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2024 तक प्रदेश में 1034.26 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं और 40 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। कैग की इस रिपोर्ट के मुताबिक भी शत-प्रतिशत कवरेज नहीं मिल सका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही दलों के सांसदों ने बैठक में जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही को लेकर विस्तार से बताया। जमीनी सच्चाई से अवगत कराया। साथ ही इसके समयबद्ध और सही क्रियान्वयन को लेकर सुझाव भी दिए।
छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि जमीनी स्तर पर पानी नहीं पहुंच रहा, तो यह योजना के मूल उद्देश्य को प्रभावित करता है और जनता के विश्वास को कमजोर करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की यह महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण योजना का सफल क्रियान्वयन तभी हो सकेगा, जब दोनों सरकारें (केंद्र व राज्य) इसकी कड़ी निगरानी करें। साथ ही माननीयों को भी चाहिए कि वे सिर्फ नाराजगी व्यक्त न करें, बल्कि संकल्प से सिद्धि के ध्येय वाक्य पर अमल करते हुए हर घर में नल से जल पहुंचाने के लिए जुट जाएं।-अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com
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Updated on:
25 Sept 2026 01:59 am
Published on:
25 Sept 2026 01:58 am
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