
Woman Guest Editor: शहरी चकाचौंध से कोसों दूर बालोद जिले का वनांचल डौंडी इन दिनों एक शांत सामाजिक बदलाव की सुखद बयार महसूस कर रहा है। इस बदलाव की धुरी बनी हैं ग्राम गुजरा निवासी 30 वर्षीय जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम। अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर नीलिमा ने राजनीति और जनप्रतिनिधित्व को पद के बजाय निस्वार्थ सेवा का माध्यम बनाया है। अनाथ, निर्धन और दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास के प्रति उनके समर्पण को देख स्थानीय लोग उन्हें 'आधुनिक सावित्रीबाई फुले' पुकारते हैं।
जनसेवा के इसी समर्पण को रेखांकित करते हुए वर्ष 2022 में तत्कालीन राज्यपाल अनुसूईया उइके ने उन्हें राज्यस्तरीय 'शक्ति सम्मान अवार्ड' से नवाजा था। वर्तमान में वे आदिवासी छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने और वनांचल तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
'वीरांगना कोया लया' की संगठित शक्ति: व्यक्तिगत प्रयास को व्यापक विस्तार देने के लिए उन्होंने बालोद, कांकेर, धमतरी, केशकाल और महासमुंद की 20 से अधिक छात्राओं को संगठित कर 'वीरांगना कोया लयासमूह' का गठन किया। यह समूह सुदूर आदिवासी टोलों में शिक्षा और लोक-स्वास्थ्य के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने का जिम्मा संभालता है।
दो बच्चों को गोद लिया: अभावों के बीच अब तक करीब 120 बच्चों को बुनियादी शिक्षा से जोड़ चुकीं नीलिमा ने रूढि़वादिता के विरुद्ध भी अभियान छेड़ा है। जमही और दंतेवाड़ा के दो अनाथ बच्चों को गोद लेकर वे अपने संसाधनों से उनके पालन-पोषण व संपूर्ण शिक्षा का व्यय वहन कर रही हैं।
Updated on:
25 Oct 2026, 1:48 AM IST
Published on:
25 Oct 2026, 1:48 AM IST
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