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संपादकीयः सुरक्षा बलों से सीखें पर्यावरण संरक्षण

नित-प्रतिदिन विकास के पथ पर प्रगति और इसमें कंक्रीट के जंगलों का निरंतर फैलाव हरियाली को लीलता जा रहा है। हर साल अरबों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। तापमान में होती जा रही बढ़ोतरी और ग्लोबल वार्मिंग की बिगड़ती स्थिति इसका प्रमाण है कि काटे जा रहे पेड़ों के अनुपात में भरपाई नहीं हो रही है।

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Mar 09, 2026

देश की सीमाओं और राष्ट्र के भीतर आंतरिक सुरक्षा के मोर्चों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका से पूरा जग वाकिफ है। ये सुरक्षा बल सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सीमा को सुरक्षित किए हुए हैं। देश में कभी कोई विपदा आती है, भूकंप जैसी आपदा या अन्य कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है, तब भी केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान मदद के लिए पहुंच जाते हैं। अब देश के पर्यावरणीय वातावरण को मजबूत करने का बीड़ा भी इन बलों ने उठाया है। अलग-अलग इलाकों में ग्यारह लाख से ज्यादा जवानों ने पांच साल में सात करोड़ से ज्यादा पौधे लगा दिए। पांच साल में ये पौधे पेड़ों का रूप ले चुके हैं। इनकी खासियत यह है कि इनमें ज्यादातर सौ साल से ज्यादा समय तक सलामत रहने वाले हैं। इससे हरियाली, ऑक्सीजन, बरसात सबकी स्थिति सुधर जाएगी, जो प्रकृति को संवारने में काम आएगी।

यहां यह उल्लेख करना भी आवश्यक होगा कि केंद्रीय सुरक्षा बलों ने प्रकृति में योगदान का यह काम देश की सुरक्षा के अपने मूल काम की कीमत पर नहीं किया है। इसका प्रमाण मांगने की जरूरत नहीं है कि देश की सुरक्षा इन बलों के लिए सर्वोपरि है, जिसके लिए वे हर समय सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तत्पर रहते हैं। उन्होंने यह दर्शाया है कि अपने मूल काम को पूरा करते हुए भी कई मानव हितैषी कार्य किए जा सकते हैं। इस तरह के कार्य का यह एकमात्र उदाहरण नहीं है। सेना, केंद्रीय सुरक्षा बल और अद्र्ध सुरक्षा बलों के जवान कई जगह सामाजिक कुरीतियां दूर करने, शिक्षा के प्रचार-प्रसार, चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता सहित कई कार्यों में योगदान करते रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण का काम इसी कड़ी में एक बड़ा मील का पत्थर है, जो सभी के लिए प्रेरणादायी है और ऐसे कई समाजोपयोगी कार्यों के मार्ग प्रशस्त करेगा। नित-प्रतिदिन विकास के पथ पर प्रगति और इसमें कंक्रीट के जंगलों का निरंतर फैलाव हरियाली को लीलता जा रहा है। हर साल अरबों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं। तापमान में होती जा रही बढ़ोतरी और ग्लोबल वार्मिंग की बिगड़ती स्थिति इसका प्रमाण है कि काटे जा रहे पेड़ों के अनुपात में भरपाई नहीं हो रही है। निश्चित तौर पर इसमें दोष सरकारों और सरकारी नीतियों का है, पर केंद्रीय सुरक्षा बलों ने इसे सिर्फ सरकार का काम समझकर चुप बैठना गवारा नहीं किया। वे इस मैदान में कूदे और पर्यावरण संरक्षण में जुट गए।

इस प्रयास का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि आज पर्यावरण संकट आम नागरिक के जीवन से सीधे जुड़ा प्रश्न बन चुका है। जब सुरक्षा बल जैसे अनुशासित और समर्पित संगठन इस दिशा में पहल करते हैं तो समाज को एक सशक्त संदेश मिलता है कि प्रकृति की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि सरकारी संस्थान, सामाजिक संगठन और आम नागरिक इसी भावना से आगे बढ़ें, तो हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन संभव हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों की यह पहल अनुकरणीय उदाहरण है।

Published on:
09 Mar 2026 01:44 pm
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