संपादकीय: लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन से अटकता विकास
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जीवन में अनेक निमित्त बनते हैं, संयोग बनते हैं, जो हमें सांकेतिक भाषा में संदेश देते हैं। कई उपादान या कारण हमारी प्रवृत्तियों को हवा देते हैं। इनमें से कुछ हमें प्रवृत्तियों के जाल में बांधने वाले होते हैं तो कुछ मुक्त होने की प्रेरणा भी देते हैं।
Gulab Kothari Articles : स्पंदन : त्याग नहीं, नियंत्रण श्रेष्ठ : जीवन में हम जो कुछ भी करते हैं, यथार्थ मानकर ही करते हैं। जो कुछ हमें दिखाई पड़ता है, वह भी यथार्थ है। हमारी देह भी यथार्थ है, बुद्धि भी यथार्थ है। हमारा कल भी हमने यथार्थ मानकर ही जिया, आज भी हमारा यथार्थ है।