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राजस्थान की धरती ने हमेशा पानी की हर बूंद और हर पेड़ की कीमत समझी है। यही कारण है कि यहां हरियाली को जीवन का पर्याय माना जाता है। लेकिन विडंबना देखिए कि जिस पेड़ को कभी हरियाली बढ़ाने, रेगिस्तान की रेत रोकने और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लगाया गया था, वही आज प्रदेश की जैव विविधता, जल संसाधनों और वन्य जीवन का सबसे बड़ा ‘शत्रु’ बन चुका है। विलायती बबूल (प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा) और दूसरी ओर जलकुंभी जैसी विदेशी आक्रामक प्रजातियां राजस्थान के पर्यावरण पर ऐसे ‘हरे आक्रमण’ का प्रतीक बन गई हैं, जो दिखाई तो हरियाली देती हैं, लेकिन भीतर से प्रकृति का दम घोंट रही हैं।
पर्यावरण की असली ताकत पेड़ों की संख्या नहीं, बल्कि उसकी जैव विविधता होती है। यदि एक विदेशी प्रजाति सैकड़ों देशी पौधों का अस्तित्व निगल जाए, चरागाह खत्म कर दे, भूजल सोख ले और वन्यजीवों के लिए संकट पैदा कर दे, तो वह हरियाली नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी का विनाश है। यही कारण है कि आज जूलीफ्लोरा राजस्थान के जंगलों, अरावली, टाइगर रिजर्व और शहरों तक में फैलकर प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहा है।
इस संकट की सबसे बड़ी सीख यह है कि पर्यावरण संरक्षण केवल पौधे लगाने का नाम नहीं है। दशकों पहले बिना दीर्घकालिक वैज्ञानिक अध्ययन के विदेशी प्रजातियों को बढ़ावा देने का निर्णय आज भारी पड़ रहा है। यह वही भूल है, जिसका खामियाजा अब वन विभाग, किसान, पशुपालक और वन्यजीव सभी भुगत रहे हैं।
सरकार ने ‘विलायती बबूल हटाओ-चारागाह बचाओ अभियान’ शुरू किया है, लेकिन इस चुनौती का आकार इतना बड़ा है कि केवल औपचारिक अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। जरूरत मिशन मोड में काम करने की है। ड्रोन और जीआइएस आधारित मैपिंग, वैज्ञानिक तरीके से जड़ों सहित उन्मूलन, हटाए गए क्षेत्रों में तुरंत देशी घास और स्थानीय वृक्षों का रोपण तथा ग्राम पंचायतों से लेकर स्कूलों तक जनभागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
इसी तरह जलाशयों में फैलती जलकुंभी भी पानी का दम घोंट रही है। एक ओर विलायती बबूल जमीन का पानी पी रहा है, दूसरी ओर जलकुंभी तालाबों और झीलों की सांस रोक रही है। यदि इन दोनों आक्रामक प्रजातियों पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो प्रदेश का जल संकट और गहरा होगा, चरागाह सिकुड़ेंगे और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
आशीष जोशी: ashish.joshi@in.patrika.com
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Updated on:
25 Jul 2026, 1:09 PM IST
Published on:
25 Jul 2026, 1:08 PM IST
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