
अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से विदाई के साथ दुनिया लियोनल मेसी के रूप में ऐसे खिलाड़ी को विदा होते देख रही है, जिसकी महानता केवल गोल और ट्रॉफियों में ही नहीं थी। गेंद के पैरों में आते ही रास्ता खोज लेना, एक क्षण में दिशा बदल जरूरत पडऩे पर अकेले दम पर मुकाबले का रुख बदल देना उनकी असाधारण प्रतिभा का परिचायक था। लेकिन इस प्रतिभा की सबसे कठिन परीक्षा मैदान से बाहर ही हुई। इसीलिए यह कहा जा सकता है कि अगर 'महानता' सिर्फ जीतने का नाम होती तो मेसी की कहानी शायद इतनी महान नहीं होती।
अर्जेंटीना के लिए विश्व कप न जीत पाने की निराशा, बड़े मुकाबलों में मिली हार और २०१६ में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास की हताशा के बीच दुनिया ने उनके बारे में अपने निष्कर्ष निकाल लिए थे। सवाल उठने लगे थे कि क्लब में महान, लेकिन देश के लिए अधूरे मेसी क्या कभी अपनी कहानी बदल पाएंगे? इन सवालों के बीच वह लौटे, खेलते रहे, जीते और अंतत: विश्व कप भी जीता। मेसी का यही सबसे महत्वपूर्ण सबक देश-दुनिया की सरहदों से परे सभी के लिए है। हम अपने बच्चों और युवाओं के बारे में राय बनाने में बहुत जल्दी करते हैं। कम अंक आए तो प्रतिभा पर सवाल, प्रतियोगी परीक्षा में मनचाही रैंक नहीं मिली तो क्षमता पर संदेह। एक मैच में खराब प्रदर्शन के बाद खिलाड़ी के भविष्य का फैसला। सोशल मीडिया ने इस जल्दबाजी को और बढ़ा दिया है, जहां कुछ घंटों की घटना किसी व्यक्ति की पूरी पहचान तय कर देती है। मेसी का जीवन युवाओं के लिए यह सबक है कि खुद को दूसरों के आईने में मत देखो। मैदान और जीवन में, दोनों जगह हर विफलता के बाद गति बढ़ाना जरूरी नहीं। कभी अपनी दिशा देखना, अपनी ताकत पहचानना और फिर उसी जिद-जज्बे के साथ लौटना जरूरी होता है। पुरानी पीढ़ी के लिए यह सीख कि युवाओं को उनकी हर विफलता के बाद यह बताने के बजाय कि वे क्या नहीं कर पाए, यह भरोसा देना ज्यादा जरूरी है कि वे आगे क्या कर सकते हैं। मेसी ने अपने देश के साथ उस रिश्ते को बदला, जिसे कभी उनकी सबसे बड़ी कमजोरी माना जाता था। 2016 की निराशा के बाद लौटकर उन्होंने अर्जेंटीना को कोपा अमरीका जिताया, 2022 में विश्व कप दिलाया और 2026 में 39 की उम्र में फिर विश्व कप फाइनल तक पहुंचाया।
अर्जेंटीना के लिए सर्वाधिक मैच, सर्वाधिक गोल- ये आंकड़े भी शायद उनकी पूरी कहानी नहीं कह पाते। उन्होंने अपने खेल के साथ अपनी उम्र और भूमिका को समायोजित किया। 2026 के विश्व कप फाइनल में हार ने भी उनकी महानता को कम नहीं किया। शायद मेसी लंबे समय तक इसलिए याद रहेंगे कि उन्होंने सिर्फ फुटबॉल नहीं बदला, बल्कि अपनी कहानी का क्लाइमेक्स अपनी काबिलियत, अपनी जिद और अपने जज्बे से लिखा और 'खेल' को 'सिर्फ जीतने' से कहीं बड़ा अर्थ दे दिया।