
सत्ता बने सेवा का माध्यम
इतिहास गवाह है कि सत्ता जब सेवा का माध्यम बनने के बजाय अहंकार का साधन बन जाती है, तब शासक धीरे-धीरे खुद को कानून, नैतिकता और जवाबदेही से ऊपर समझने लगता है। शायद सत्ता का मद इंसान को यह भुला देता है कि कुर्सी स्थायी नहीं, लेकिन उसके फैसलों के परिणाम जरूर स्थायी हो सकते हैं। सबसे ऊपर एक नैतिक सत्य है कि इंसान अपने कर्मों से कभी बच नहीं सकता।
- ओम प्रकाश हुंडिया, हैदराबाद
संतुलित उपयोग सिखाएं
आज के डिजिटल युग में मोबाइल और इंटरनेट बच्चों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। तकनीक ने शिक्षा और जानकारी के नए रास्ते खोले हैं, लेकिन इसके बढ़ते उपयोग ने बच्चों के वास्तविक बचपन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खेल के मैदानों की जगह मोबाइल गेम और मित्रों के साथ बातचीत की जगह सोशल मीडिया ने ले ली है। तकनीक का संतुलित उपयोग सिखाया जाना चाहिए।
- कमल कुमार कुमावत, गोविन्दगढ़
बैलेट पेपर से न हों चुनाव
विपक्ष बैलेट पेपर से चुनाव कराने की लगातार मांग कर रहा है। जबकि कागज के लिए कई पेड़ों को काटना पड़ता है। कागज निर्माण में भरपूर पानी, भाप और बड़े पैमाने पर विद्युत का भी इस्तेमाल होता है। पृथ्वी पर पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए जंगल का 33 प्रतिशत होना आवश्यक है। वर्तमान में यह 16 प्रतिशत तक घट चुका है। बैलेट पेपर से चुनाव करवाने पर पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा।
- स्वप्निल शर्मा, मनावर, मध्यप्रदेश
दूसरों का सुकून न छीनें
आजकल शादी-विवाह, धार्मिक आयोजनों, सामाजिक समारोहों और चुनाव जीतने के बाद निकाली जाने वाली विजय रैलियों एवं जुलूसों में तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाना आम होता जा रहा है। कई बार ध्वनि का स्तर इतना अधिक होता है कि आसपास के घरों में रहना तक मुश्किल हो जाता है। उत्सव मनाइए, विजय का आनंद लीजिए, लेकिन दूसरों का सुकून मत छीनिए।
- गौरव चौरोटिया, ब्यावर, राजस्थान