ओपिनियन

Patrika Opinion: जरूरी हैं पानी को दूषित होने से बचाने के उपाय

घर-घर नल जैसी योजनाएं तो ठीक हैं पर सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि लोगों के घरों तक पीने का शुद्ध पानी पहुंचे। और, सरकारों के भरोसे रहना ही काफी नहीं, लोगों को भी पानी को दूषित होने से बचाने के जतन करने होंगे।

2 min read
Aug 28, 2024

पीने के पानी को लेकर यह ताजा रिपोर्ट सचमुच चिंता पैदा करने वाली है कि दुनिया में आधे से ज्यादा लोगों को पानी की शुद्धता को लेकर संदेह है। इनमें ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो अपने यहां उपलब्ध पेयजल की बजाय वैकल्पिक उपाय के रूप में मिनरल वाटर का इस्तेमाल करना ज्यादा पसंद करते हैं। जाहिर है दुनिया की बड़ी आबादी साफ और सुरक्षित पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर चिंतित है। तमाम उपायों के बावजूद शुद्ध पानी उपलब्ध होना भी बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पिछले दिनों ही विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि स्वच्छ जल की कमी से हर वर्ष २६० अरब डॉलर का नुकसान होता है। भारत जैसे देश में जहां जल संकट पहले ही एक चुनौती बन कर उभरा है, वहां स्वच्छ जल की कमी निश्चित ही स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विपरीत असर डालने वाली होगी।

शुद्ध पेयजल की उपलब्धता को लेकर विकसित देश अमरीका में भी संकट कम नहीं है। नेचर कम्युनिकेशन पत्रिका में जो शोध प्रकाशित हुआ है उसके मुताबिक अमरीका में भी अल्प अवधि में ही ३९ फीसदी लोगों को पेयजल के कारण गंभीर नुकसान होने की आशंका है। यह सर्वविदित तथ्य है कि जहां भी स्वच्छ जल की उपलब्धता में कमी आएगी वहां जलजनित बीमारियों में तेजी से इजाफा होना तय है। स्वास्थ्य पर विपरीत असर से श्रमशक्ति की उत्पादकता पर भी असर पड़ता है। एक तरफ स्वच्छ जल की अनुपलब्धता से आशंकित लोग मिनरल वाटर का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक अध्ययनों से यह बात भी सामने आई है कि बोतलबंद पानी या आरओ का फिल्टर किया हुआ पानी लंबे समय तक इस्तेमाल करना भी बीमारियों को न्योता दे सकता है। हमारी नदियों व दूसरे जलाशयों का पानी पहले ही जहरीले रसायनों के कारण दूषित होता जा रहा है। जो बचा हुआ है उसका अंधाधुंध दोहन हो रहा है। ऐसे में हमारी चिंता उस जल को ही स्वच्छ और शुद्ध बनाए रखने की होनी चाहिए जो प्राकृतिक रूप से बरसात के दौरान मिलता है। आज तो हालत यह हो रही है कि विकास की अंधी दौड़ में नदी-तालाब प्रदूषित होते जा रहे हैं। आबादी के विस्तार के साथ-साथ जलाशयों को बचाए रखने की भी बड़ी चुनौती सामने आ रही है।

जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए सरकारें अपने स्तर पर प्रयास भी कर रही हैं। ये प्रयास जिस रफ्तार से होने चाहिए उतने दिख नहीं रहे। घर- घर नल जैसी योजनाएं तो ठीक हैं पर सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि लोगों के घरों तक पीने का शुद्ध पानी पहुंचे। और, सरकारों के भरोसे रहना ही काफी नहीं, लोगों को भी पानी को दूषित होने से बचाने के जतन करने होंगे।

Published on:
28 Aug 2024 10:09 pm
Also Read
View All

अगली खबर