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Rajasthan Budget 2026-27: संसाधन-संकुचित प्रदेश से रणनीतिक विकास इकोनॉमी की ओर

यह बजट राजस्थान को क्रमिक विस्तार से संरचनात्मक संरेखण की ओर ले जाता हुआ प्रस्तुत करता है। यह भूगोल को लॉजिस्टिक्स से, जलवायु को प्रतिस्पर्धात्मकता से, विनियमन में ढील को निवेश से और डिजिटल शासन को राजकोषीय विवेक से जोड़ता है। कथा सिर्फ अधिक खर्च करने की नहीं है, बल्कि ऐसे खर्च की है जो आर्थिक संरचना को रूपांतरित करे।

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Feb 12, 2026
बजट की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसकी स्थानिक सोच है।

प्रो. गौरव वल्लभ, सदस्य (प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद),

राजस्थान का बजट 2026-27 केवल अपने आकार के कारण ही नहीं, बल्कि उस रणनीतिक पुनस्र्थापन के कारण भी ध्यान आकर्षित करता है, जिसे यह प्रस्तुत करता है। एक स्तर पर इसकी राजकोषीय संरचना स्पष्ट है- 3,25,740.14 करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्तियां, 3,50,054.07 करोड़ रुपए का राजस्व व्यय और 79,492 करोड़ रुपए का राजकोषीय घाटा- जो यह दर्शाता है कि राज्य निर्माण और विकास के लिए खर्च करने को तैयार है। लेकिन इससे भी गहरा परिवर्तन यह है कि राजस्थान अपनी संरचनात्मक सीमाओं-शुष्कता, बिखरी जनसंख्या और ऐतिहासिक अवसंरचनात्मक कमी- को रणनीतिक विकास के मॉडल में बदलने का प्रयास कर रहा है।

आर्थिक प्रक्षेपवक्र स्वयं बहुत कुछ कहता है। पिछली सरकार के अंत से अब तक राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 40% से बढ़कर 21.52 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है, जबकि प्रति व्यक्ति आय 2,02,349 रुपए से ऊपर पहुंच चुकी है। यह केवल चक्रीय पुनरुद्धार नहीं, बल्कि आर्थिक आधार के विस्तार का संकेत है। विकास व्यय में 36.9% की वृद्धि होकर 53,978 करोड़ रुपए तक पहुंचना और पूंजीगत व्यय का एक लाख करोड़ रुपए के पार जाना दर्शाता है कि सरकार दशकों में फैलने वाली अवसंरचना परियोजनाओं को संकुचित समय-सीमा में पूरा कर इस संक्रमण को तेज करना चाहती है। इस बजट की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसकी स्थानिक सोच है। राजस्थान विकास को किसी एक महानगरीय केंद्र तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्रीय आर्थिक नोड्स को सशक्त कर रहा है।

दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के तहत जोधपुर-पाली-मारवाड़ क्षेत्र का विकास पश्चिमी राजस्थान को राष्ट्रीय विनिर्माण आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ता है। साथ ही, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के अंतर्गत लॉजिस्टिक्स हब और इनलैंड कंटेनर डिपो यह संकेत देते हैं कि स्थलरुद्ध राज्यों को भौगोलिक लाभ के बजाय दक्षता के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। औद्योगिक नीति को लॉजिस्टिक्स अवसंरचना से जोड़कर राजस्थान स्वयं को भारत के निर्यात पारितंत्र में स्थापित कर रहा है, न कि केवल घरेलू उपभोग के बाजार के रूप में। यह कल्याण-आधारित विकास से व्यापार-संएकीकृत विकास की ओर स्पष्ट बदलाव है। इस बजट का एक कम चर्चित, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू लेन-देन लागत में कमी है। ऋणों पर कम स्टाम्प ड्यूटी, घटाए गए पंजीकरण शुल्क और पूर्णत: डिजिटाइज्ड संपत्ति प्रणालियां सीधे पूंजी निर्माण को प्रभावित करती हैं।

अनेक राज्यों में उच्च लेन-देन लागत औपचारिक ऋण और संपत्ति पंजीकरण को हतोत्साहित करती हैं। इन लागतों को घटाकर राजस्थान उद्यमिता और संपत्ति औपचारिकीकरण के लिए प्रवेश बाधाएं कम कर रहा है। यहां विकास केवल खर्च से नहीं, बल्कि विनियमन में ढील से भी संभव हो रहा है। ऋण प्रबंधन सुधार भी संस्थागत परिपक्वता को दर्शाते हैं। गारंटी रिडेम्पशन फंड और कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड में निवेश यह संकेत देता है कि राज्य प्रतिक्रियात्मक उधारी के बजाय अग्रिम प्रावधान पर ध्यान दे रहा है। राज्य सरकार प्रतिभूति स्विचिंग तंत्र को अपनाना इस बात का संकेत है कि राजस्थान अब अपने बैलेंस शीट को रणनीतिक रूप से प्रबंधित कर रहा है- कुछ वैसा ही जैसे कोई कॉर्पोरेट ट्रेजरी करता है। यह उप-राष्ट्रीय राजकोषीय प्रबंधन में गुणात्मक बदलाव है। मानव पूंजी हस्तक्षेप भी गहरे पुनर्संयोजन को दर्शाते हैं। सीएम राइज कार्यक्रम और स्कूल अवसंरचना उन्नयन केवल शिक्षा सुधार नहीं, बल्कि उत्पादकता सुधार हैं।

एआइ-सक्षम प्रयोगशालाएं, व्यावसायिक विस्तार और युवाओं के लिए 10 लाख रुपए तक के उद्यमिता ऋण यह दर्शाते हैं कि जनसांख्यिकीय लाभांश स्वत: नहीं मिलता- उसे रोजगार-उपयुक्तता की पाइपलाइन के माध्यम से विकसित करना पड़ता है। कृषि क्षेत्र में भी दृष्टि केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं है। किसानों के लिए 25,000 करोड़ रुपए के ब्याज-मुक्त ऋण और सूक्ष्म सिंचाई समर्थन आय स्थिरता प्रदान करते हैं, जबकि फेंसिंग, कस्टम हायरिंग सेंटर और यंत्रीकरण सब्सिडी पैमाने की दक्षता की ओर संक्रमण को दर्शाते हैं। इनपुट लागत घटाकर और साझा मशीनरी तक पहुंच बढ़ाकर राज्य कृषि को उत्पादकता-आधारित समेकन की दिशा में ले जा रहा है।

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में, 2026-27 का बजट राजस्थान को क्रमिक विस्तार से संरचनात्मक संरेखण की ओर ले जाता हुआ प्रस्तुत करता है। यह भूगोल को लॉजिस्टिक्स से, जलवायु को प्रतिस्पर्धात्मकता से, विनियमन में ढील को निवेश से और डिजिटल शासन को राजकोषीय विवेक से जोड़ता है। कथा केवल अधिक खर्च करने की नहीं है, बल्कि ऐसे खर्च की है जो राज्य की आर्थिक संरचना को रूपांतरित करे। यदि अनुशासन के साथ क्रियान्वयन हुआ, तो यह बजट वह क्षण सिद्ध हो सकता है जब राजस्थान अपनी सीमाओं से परिभाषित होने के बजाय भारत की विकास कहानी में अपनी रणनीतिक भूमिका के लिए पहचाना जाएगा।

Published on:
12 Feb 2026 07:39 pm
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