भागचंद जैन मित्रपुरा, अध्यक्ष, अखिल भारतीय जैन बैंकर्स फोरम, जयपुर
भगवान महावीर एक विलक्षण जीवन दृष्टा थे। उन्होंने कर्म सिद्धांत को अपनाया और कर्म करने पर जोर दिया। उन्होंने संदेश दिया कि मनुष्य जन्म से नहीं कर्म से महान बनता है । स्व कल्याण में व्यक्ति स्वयं सक्षम है। मानव जीवन में पूर्णता प्राप्त करने की क्षमता होती है। यह संदेश दिया कि हमारे सुख- दुख के लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं। हमारे कर्मों का फल हमें स्वयं ही भोगना है। मुक्ति का उपाय हम सभी के पास है। अपनी शक्ति का पूर्ण उपयोग करके कर्मों के क्षय द्वारा हम संसार में आवागमन से मुक्त हो सकते हैं। महावीर ने कर्म सिद्धांत के द्वारा आम जन में आत्म विश्वास जमाया। भगवान महावीर ने ईश्वर की सत्ता की जगह कहा हम सब में ईश्वर बनने की क्षमता है। मनुष्य स्वयं अपना कर्त्ता है। यह सृष्टि अनादि, अनंत है एवं कर्म सिद्धांतों पर चलती है। फल देने या दंडित करने का कार्य ईश्वर का नहीं है। तीर्थंकर महावीर ने - अप्पा सो परमप्पा - का उपदेश देकर बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक जीव और आत्मा को परमात्मा बनने का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि गुणों की लिहाज से पूर्ण विकसित आत्मा ही परमात्मा है।
वर्तमान में विश्व कई समस्याओं से जूझ रहा है। महावीर द्वारा प्रतिपादित जीवनशैली एवं सिद्धांतों में इनका समाधान है। भगवान महावीर के बताए गए सिद्धांत सार्वकालिक और सार्वभौमिक हैं, ये कल-आज और कल हर समय उपयोगी हैं।
विश्वशांति का मार्ग महावीर के अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांतवाद, क्षमा के सिद्धांत को अपनाककर विभिन्न देशों के बीच युद्ध एवं तनाव को खत्म करने में सफलता मिल सकती है। आतंकवाद और सांप्रदायिकता विश्व शांति मार्ग में बड़ी बाधा है। महावीर के सिद्धांत हिंसक लोगों का हृदय परिवर्तन करने में सक्षम हैं।
आर्थिक विषमता की समस्या का हल
असंतुलित आर्थिक विकास भी संपूर्ण विश्व के समक्ष एक प्रमुख चुनौती है। विश्व के कुछ ही देश विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आते हैं। कई देशों में भुखमरी, कुपोषण की विकराल समस्या है । महावीर के अपरिग्रह के सिद्धांत में इन समस्या का समाधान है। संपन्न देश जरूरतमंद देशों की आवश्यक सहायता कर अपने समकक्ष लाने का प्रयास कर सकते हैं। इस तरह विश्व समृद्धि एवं शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
स्वस्थ्य जीवन
महावीर के अहिंसा के सिद्धांत से शाकाहार, योग और ध्यान द्वारा स्वस्थ्य जीवन जिया जा सकता है। पहला सुख निरोगी काया माना गया है। प्रकृति के समीप रहकर व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है।
पर्यावरण एवं प्रदूषण की समस्या
वैश्विक स्तर पर प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। इस कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। जगह—जगह ग्लेशियर पिघल रहे हैं, महा-सागरों का जल स्तर बढ़ रहा है। महावीर की स्थावर जीवों के घात से यथासंभव बचने की शिक्षा को अपनाकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। महावीर की गूढ़ अहिंसा में पृथ्वी को अनावश्यक नहीं खोदना, नदियों में दूषित जल एवं अपशिष्ट नहीं मिलाना, वायु प्रदूषण नहीं फैलाना, हरे-भरे पेड़ो को नहीं काटना आदि उपाय सम्मिलित हैं। इस बारे में जागरूकता फैलाकर प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है ।
मानव अधिकारों का संरक्षण
बड़ी मछली छोटी मछली को निगल जाती है, लेकिन महावीर के सिद्धांत सर्वोदय का संदेश देते हैं, जिसमें न केवल मानव को, बल्कि जीवमात्र के संरक्षण की भावना व्यक्ति गई है। महावीर से पूर्व शूद्रों को निम्न स्थान प्राप्त था। नारी की भी स्थिति हीन थी, उसके लिए साधना के मार्ग बंद थे। महावीर स्वामी ने कठोर वर्ण व्यवस्था का प्रतिकार किया। उन्होंने चंदनबाला जैसी नारी को न केवल दीक्षित किया वरन साध्वी संघ का नेतृत्व भी सौंपा। वर्तमान में यद्यपि वर्ण, जातिप्रथा व्यवस्था में सुधार हुआ है तथापि अमरीका जैसे विकसित देश एवं अफ्रीका जैसे गरीब देशों में अब भी काले गोरे का भेद देखने में आता है। भारत जैसे देश में जातिप्रथा एवं कट्टरवाद, धर्म, संप्रदाय के नाम पर अशांति अब भी फैलाई जाती है। महावीर के समता के सिद्धांत को स्वीकार करके वसुधैव कुटुंबकम की धारणा मूर्त रूप ले सकती है।
विज्ञान की दिशा
महावीर ने अणु, परमाणु, जीव, अजीव, पुद्गल की अवधारणा को बहुत पहले ही विस्तृत रूप से प्रस्तुत कर दिया था। महावीर के दिए गए उपदेश से हम आधुनिक विज्ञान की दिशा में और आगे बढ़ सकते है, विश्व का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
गुणों की पूजा महावीर के सिद्धांत में व्यक्ति पूजा की जगह नहीं है, गुणों की ही पूजा की जाती है। सही अर्थ में महावीर के सिद्धांत जैन धर्मावलंबियों के लिए ही नहीं हैं, सभी के लिए हैं, जन-जन के लिए हैं। जीवन की इस आपाधापी में महावीर का मार्ग ही सही मार्ग है। महावीर के सिद्धांत सार्वभौमिक, सर्वमान्य, सर्व हितैषी हैं। ये आज भी जस के तस मान्य हैं । तीर्थंकर का बताया मार्ग सर्वकालीन होता है। जैन धर्म के सिद्धांत अनादि, अनंत हैं। किसी भी समस्या का समाधान महावीर के सिद्धांतों में निहित है। सभी सिद्धांत एक दूसरे के पूरक हैं, किसी भी एक सिद्धांत की पालना से हम अपने गंतव्य पर पंहुच सकते हैं।
अब समय आ गया है कि जीओ और जीने दो, अहिंसा परमो धर्म, परस्परोपग्रहो जीवानाम् की अवधारणा को जन मानस द्वारा आत्मसात किया जाए। भगवान महावीर का जन्म कल्याणक अहिंसा सहित सभी पांच अणु/ महाव्रतों का का पालन करते हुए मनोयोग से मनाए जाने की नितांत आवश्यकता है।