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पतंग की डोर नहीं, मौत की धार है चाइनीज मांझा

बड़ा सवाल यह है कि जब चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है तो यह बन कहां रहा है, इसकी सप्लाई चेन कैसी है और तस्करी के रास्ते कौनसे हैं?

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जयपुर

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Opinion Desk

Jan 14, 2026

- योगेश कुमार गोयल स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

चाइनीज मांझा आज केवल पतंगबाजी का एक साधन नहीं, बल्कि एक ऐसा खामोश हत्यारा बन चुका है, जो हवा में अदृश्य रहते हुए सड़कों पर चलती जिंदगियों की गर्दन पर ब्लेड की तरह वार कर रहा है। इंदौर में 11 जनवरी को हुए हादसे में बाइक सवार 45 वर्षीय रघुवीर धाकड़ का गला चाइनीज मांझे से कट गया और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उसी दिन नीट की तैयारी कर रहे नरेंद्र जामोद भी इसी मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। ये दोनों घटनाएं कोई अपवाद नहीं हैं बल्कि उस लंबी शृंखला की ताजा कडिय़ां हैं, जिसमें पिछले कुछ वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में राह चलते लोग और बेजुबान पक्षी चाइनीज मांझे का शिकार बनते आ रहे हैं।

इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पिछले करीब पांच वर्षों से चाइनीज मांझे पर देशभर में प्रतिबंध है तो यह मौत का धागा खुलेआम बाजारों और गलियों में कैसे बिक रहा है। बड़ा सवाल यह है कि जब चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है तो यह बन कहां रहा है, इसकी सप्लाई चेन कैसी है और तस्करी के रास्ते कौनसे हैं? स्थानीय स्तर पर की जाने वाली कार्रवाईयों से छोटे दुकानदार तो पकड़े जाते हैं लेकिन इस अवैध कारोबार की जड़ें जस की तस बनी रहती हैं। कई राज्यों में इस मांझे के उपयोग पर सख्त सजा का प्रावधान है, फिर भी यह धड़ल्ले से बिक और इस्तेमाल हो रहा है। राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित लगभग हर राज्य से ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जहां राहगीर घायल हुए या अपनी जान गंवा बैठे। कुछ दिनों तक हंगामा होता है, पुलिस अभियान चलाती है लेकिन जैसे ही मामला ठंडा पड़ता है, यह कारोबार फिर से पनपने लगता है। चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध केवल राज्यों का फैसला नहीं है बल्कि इसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा पर्यावरण और जनसुरक्षा के मद्देनजर प्रतिबंधित किया गया है।

एनवॉयर्नमेंट प्रोटेक्शन एक्ट-1986 की धारा-5 के तहत इसके इस्तेमाल पर पांच साल तक की सजा और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। कानून साफ कहता है कि इस मांझे की बिक्री और इससे पतंग उड़ाना अपराध है। इसके बावजूद जिस तरह से यह धागा लोगों की जिंदगी की डोर काट रहा है, वह कानून की कमजोरी नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक उदासीनता का प्रमाण है। चाइनीज मांझे को लेकर जागरूकता लाई जानी चाहिए। असल जरूरत आधे-अधूरे अभियानों की नहीं, बल्कि एक व्यापक और ईमानदार रणनीति की है। चाइनीज मांझे की सप्लाई चेन को तोडऩा, इसके निर्माण और आयात पर सख्ती से नजर रखना और दोषियों को उदाहरणात्मक सजा देना समय की मांग है। आज जरूरत इस बात की है कि समाज यह स्वीकार करे कि चाइनीज मांझा केवल एक अवैध वस्तु नहीं, बल्कि जानलेवा हथियार है।