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प्रकृति, श्रम और संतुलन का उत्सव: वेदों की दृष्टि से होली

मनुष्य और धरती दुश्मन नहीं, बल्कि साथी हैं और जब हम प्रकृति, श्रम और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, तभी असली होली रंग, प्रकाश, शांति और कल्याण हमारे जीवन में आती है।

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जयपुर

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Opinion Desk

Mar 01, 2026

सूर्य प्रसाद सूरज बीरे - पूर्व अध्यक्ष (आर्य समाज नीदरलैंड्स),

होली, जिसे हम प्यार से फगुआ भी कहते हैं, केवल रंगों का त्योहार नहीं है। यह नए जीवन, नई ऊर्जा, क्षमा और मिल-जुलकर आगे बढऩे का संदेश देता है। वेदों में जो 31 विशेष होली संबंधी मंत्र मिलते हैं, वे हमें याद दिलाते हैं कि मनुष्य, प्रकृति और पूरा ब्रह्मांड, सब एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। आज, जब दुनिया में जलवायु परिवर्तन, मानसिक तनाव, युद्ध, नफरत और अकेलापन बढ़ रहा है, तब होली और ये मंत्र हमें एक दूसरा रास्ता दिखाते हैं, रंग, प्रकाश, सादगी, सम्मान और एकता का रास्ता। वेद के ये 31 मंत्र हमें तीन बड़ी बातें सिखाते हैं। पहली, प्रकृति का सम्मान- धरती, बारिश, फसल, पेड़-पौधे, जानवर ये सब हमारे साथी हैं। दूसरी, मेहनत की पवित्रता- हल चलाना, बीज बोना, फसल काटना, जानवरों की देखभाल करना ये केवल काम नहीं, पूजा के बराबर हैं। तीसरी, जीवन का चक्र- सर्दी के बाद गर्मी, अंधेरे के बाद प्रकाश, दुख के बाद सुख हर चीज बदलती है और हर कठिन समय के बाद एक नई शुरुआत आती है।

साथ ही, ये 31 मंत्र हमें अन्तरात्मा की होली भी सिखाते हैं, यानी भीतर की सफाई। इनमें बार-बार यह भावना आती है कि अगर किसी कर्म में कमी या ज्यादती रह जाए, तो ईश्वर (अग्नि) उसे सुधार दे और हमारे अच्छे संकल्प पूर्ण करे। वे हमें याद दिलाते हैं कि समृद्धि केवल धन नहीं, बल्कि संतुलन, कृतज्ञता, साझेदारी और सादगी में भी है। कुल मिलाकर, ये मंत्र संदेश देते हैं कि मनुष्य और धरती दुश्मन नहीं, बल्कि साथी हैं और जब हम प्रकृति, श्रम और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, तभी असली होली रंग, प्रकाश, शांति और कल्याण हमारे जीवन में आती है। होली भी यही कहती है। होलिका दहन बुराई, नफरत, ईष्र्या, अहंकार, इन सबको आग में जलाने का प्रतीक है। रंगों की होली, नए मौसम, नई फसल, नई उम्मीद और नए रिश्तों का स्वागत है।

आज पूरी दुनिया कुछ बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। जलवायु परिवर्तन: मौसम बदल रहा है, गर्मी, बाढ़, सूखा बढ़ रहा है। प्रकृति से दूरी: ज्यादातर समय मोबाइल, कंप्यूटर और स्क्रीन पर गुजर जाता है। तनाव और अकेलापन: तेज दौड़ती जिंदगी, प्रेशर, अकेला महसूस करना। विभाजन: अलग-अलग धर्म, संस्कृति, भाषा और सोच के कारण दूरी और गलतफहमियां। वेद के मंत्र और होली का संदेश हमें कहते हैं, 'मनुष्य और प्रकृति दुश्मन नहीं, साथी हैं। रंग मिलकर ही सुंदर लगते हैं, इंसान भी।' होली का प्रभाव भारत में ही नहीं, अपितु बाहर भी उतना ही है। विदेशों में भी भारतीय और दूसरे समुदाय और अलग-अलग देश के लोग इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाते है। कई अन्य पृष्ठभूमि के लोग साथ रहते हैं। भाषा अलग, खाने अलग, रीति-रिवाज अलग, लेकिन दिल की जरूरतें एक जैसी हैं, प्यार, सम्मान, सुरक्षा और अपनापन।

होली हमें सिखाती है कि किसी पर जबरदस्ती रंग नहीं लगाना, सम्मान भी एक रंग है। किसी को उसके धर्म, त्वचा के रंग, भाषा या पासपोर्ट से मत आंको, इंसान की असली पहचान उसकी मानवता है। मंदिर, समाज-भवन, परिवार- ये सब जगहें हैं जहां हम फिर से समुदाय महसूस करते हैं। जब हम होली पर साथ बैठकर हवन करते हैं, भजन गाते हैं, सरल भोजन और प्रसाद बांटते हैं और माफी मांगते और देते हैं, तब हम केवल एक त्योहार नहीं मनाते, बल्कि समाज को मजबूत बनाते हैं।

वेद के मंत्र बार-बार कहते हैं कि धरती (सीता) का सम्मान करो। पेड़-पौधों, अनाज, जानवरों और पानी को बचाओ। फसल, अनाज और बारिश- ये सब ईश्वर के उपहार हैं। आज, जब जंगल कट रहे हैं, समुद्र प्रदूषित हो रहे हैं, हवा दूषित हो रही है, तब ये पुरानी आवाजें हमें नई तरह से पुकारती हैं- कम बर्बादी - ज्यादा कृतज्ञता, कम प्लास्टिक- ज्यादा प्रकृति, कम लालच- ज्यादा संतुलन। होली के रंग हमें याद दिला सकते हैं कि असली रंग हरी धरती, नीला आसमान, स्वच्छ पानी और स्वस्थ पेड़-पौधे हैं। आज की दुनिया में लोग बाहर से मुस्कुराते हैं, मगर अंदर से थके हुए, बोझिल, चिंतित और कभी-कभी टूटे हुए होते हैं।

होली का एक मनोवैज्ञानिक संदेश भी है, पुरानी बातों, झगड़ों और शिकायतों को छोडऩा सीखो। दिल पर जमा हुआ धूल, नफरत, गुस्सा, जलन इसे धो डालो। हंसी, गीत, रंग, संगत, ये सब दिल का इलाज हैं। जब हम किसी को सच्चे मन से कहते हैं, 'भूल-चूक माफ, चलो नए सिरे से शुरू करते हैं', तो यह एक अंदरूनी होली होती है- दिल के भीतर की होली।