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बालवाहिनी में बच्चों की सुरक्षा का हो पुख्ता बंदोबस्त

अकसर देखने में आता है कि कार्रवाई के नाम पर वाहनों का चालान कर दिया जाता है, जबकि लापरवाही के मामलों में चालक के साथ ही स्कूल प्रबंधन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। - अ​भिषेक श्रीवास्तव

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स्कूल में बच्चों के लाने-ले जाने के लिए परिवहन व्यवस्था आम तौर पर शिक्षण संस्थाएं भगवान भरोसे छोड़ देती है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर अदालतों और सरकार से मिले निर्देशों की उपेक्षा जम कर होती है। स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा के प्रति कितने गंभीर हैं, इसका ताजा उदाहरण राजस्थान में उदयपुर के हिरणमगरी क्षेत्र में हुई घटना से लगाया जा सकता है। नशे में धुत चालक ने स्कूल वैन तेज गति से दौड़ा दी, जिसके कारण ब्रेकर से उछलकर तीन बच्चे वाहन से गिर गए। गनीमत रही कि यह हादसा मुख्य मार्ग पर नहीं हुआ। स्कूल वाहनों को लेकर हादसों की खबरें आए दिन सामने आती है। जब घटना बड़ी होती है तो संबंधित महकमे दिखावे के लिए सड़क पर उतरकर कार्रवाई करते हैं, लेकिन जैसे ही बात ठंडी पड़ती है, सारी कार्रवाई फिर फाइलों के बोझ़ तले दब जाती है।

स्कूलों के वाहन कैसे हों, इसको लेकर भी गाइडलाइन बनी हुई है। बाल वाहिनी के चालक के आचरण के संबंध में भी स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन प्रदेश में कुछ स्कूलों को छोड़ दें तो कहीं भी इसकी सही ढंग से पालना होते नहीं दिखती।

सड़क पर दौड़ती अधिकांश बाल वाहिनी में ड्राइवर का नाम, मोबाइल नम्बर, पता, लाइसेंस, वाहन मालिक का नाम व नम्बर, चाइल्ड हेल्पलाइन नम्बर, यातायात पुलिस नम्बर, परिवहन विभाग हेल्पलाइन नम्बर तथा वाहन का पंजीयन आदि लिखा नहीं दिखता। खानापूर्ति के लिए सिर्फ एकाध नंबर लिखे होते हैं। हालत यह है कि प्रदेशभर में बाल वाहिनी के नाम पर अनफिट और कंडम वाहन दौड़ते दिख जाते हैं। इनकी गति भी निर्धारित मानक से काफी अधिक होती है।

ऐसे में जरूरी है कि प्रदेश सरकार बच्चों की सुरक्षा के प्रति स्कूलों पर सख्ती बरते। जरूरी नहीं कि किसी भी कार्य के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाए। प्रशासन, परिवहन और यातायात पुलिस को मामले में गंभीरता बरतते हुए लापरवाह चालकों के साथ ही संबंधित स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। अकसर देखने में आता है कि कार्रवाई के नाम पर वाहनों का चालान कर दिया जाता है, जबकि लापरवाही के मामलों में चालक के साथ ही स्कूल प्रबंधन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। अगर कुछ ऐसे उदाहरण आते हैं जहां बच्चों की सुरक्षा के मामले में लापरवाही पर स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई हुई तो निश्चित तौर पर इसका व्यापक असर होगा। प्रशासन के साथ ही परिवहन और पुलिस महकमे को भी स्कूल वाहनों की जांच का अभियान नियमित और व्यापक स्तर पर चलाना चाहिए।

abhishek.srivastava@in.patrika.com

Published on:
16 Jan 2025 09:49 pm
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