
दिन-ब-दिन खतरनाक मोड़ ले रहे इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे रोकने की अब तक कोई पहल नहीं हुई है। दोनों पक्षों के सैकड़ों बेकसूर लोग मारे जा रहे हैं, हजारों मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं और लाखों की आबादी पलायन से जूझ रही है। नौ दिन बाद भी संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। उसने अपनी जिम्मेदारी युद्ध में मरने वालों और बेघर हुए लोगों की संख्या की पुष्टि तक सीमित कर रखी है। युद्ध के इलाकों में उसकी टीम अब तक नहीं पहुंची है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश भी बयान जारी करने से आगे नहीं बढ़े। युद्ध से दुनिया भी दो धड़ों में बंट गई है। अरब देश हमेशा की तरह फिलिस्तीन के साथ हैं तो बाकी इजरायल के साथ। अमरीकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के इजरायल दौरे से आस बंधी थी कि वह युद्ध रोकने पर चर्चा करेंगे, पर उन्होंने ‘हम इजरायल के साथ मिलकर लड़ेंगे’ जैसे बयान देकर आग में घी डालने से ज्यादा कुछ नहीं किया।
युद्ध कहीं भी हो, सारी दुनिया प्रभावित होती है। रूस-यूक्रेन के युद्ध ने पहले से दुनिया को चिंतित कर रखा था। इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध ने संकट और बढ़ा दिया है। पश्चिम एशिया के इन दोनों पक्षों में पहले भी कई युद्ध हो चुके हैं, पर इस बार टकराव सारी हदें लांघ चुका है। ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों को खदेडऩे के लिए इजरायल रासायनिक हथियार (सफेद फास्फोरस) का इस्तेमाल भी शुरू कर चुका है। फिलिस्तीन के आतंकी समूह हमास के खिलाफ इजरायल की ताबड़तोड़ सैन्य कार्रवाई तो समझ आती है, पर बेकसूर लोगों पर बर्बरता किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। हालांकि भारत ने इजरायल में फंसे करीब 18 हजार भारतीयों को निकालने का अभियान शुरू कर दिया है, पर फिलिस्तीन के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई लंबी चलती है तो पश्चिम एशिया के कुछ और देशों में रहने वाले भारतीय संकट से घिर सकते हैं। जॉर्डन में करीब 20 हजार, कतर में 75 हजार, लेबनान में 8 हजार और मिस्र में 4 हजार भारतीय बसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभी से कदम उठाए जाने चाहिए।
दरअसल, दुनिया में जगह-जगह युद्ध टालने के लिए संयुक्त राष्ट्र की ओर से ठोस योजनाओं की दरकार है। उस पर दुनिया में अमन-चैन कायम रखने की जिम्मेदारी है। इस मोर्चे पर यह अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार ‘दंतविहीन शेर’ साबित हो रहा है। इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध के दौरान उसकी निष्क्रियता पूरी मानव सभ्यता के लिए भारी पड़ रही है।