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यूनेस्को से अलगावः बना हुआ था अमरीका की आंख का कांटा

अमरीका का संयुक्त राष्ट्र की संस्था एजुकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (यूनेस्को) से बाहर आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है
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Updated: 15 Oct 2017, 12:24 PM IST
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- अतुल कौशिश वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक टिप्पणीकार,तीन दशक की पत्रकारिता का अनुभव

यूनेस्को, सामान्यतया विश्व के पुरामहत्व के स्थलों की सुरक्षा के लिए जाना जाता है पर यह शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी कार्य करता है। अमरीका में यूनेस्को द्वारा घोषित पुरामहत्व के २३ स्थल हैं जबकि भारत में ३५ पुरामहत्व के स्थल हैं।

अमरीका का संयुक्त राष्ट्र की संस्था एजुकेशनल साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (यूनेस्को) से बाहर आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। यूनेस्को लंबे समय से अमरीका की आंख का कांटा बना हुआ है। शीतयुद्ध के दौरान अमरीका यह संदेह करता रहा है कि पेरिस स्थित यह एजेंसी रुस समर्थित है। वर्ष १९८४ में रोनाल्ड रीगन ने इसी आधार पर यूनेस्को से अमरीका के बाहर निकलने की घोषणा की थी। वर्ष २००२ में जॉर्ज बुश के समय में फिर वापसी हुई। वर्ष २०११ में बराक ओबामा प्रशासन ने फिलिस्तीन को सदस्य बनाने के विरोध में यूनेस्को को दी जाने वाली सहायता राशि में कटौती कर दी। अब अमरीका के यूनेस्को छोडऩे के बाद इजरायल ने भी यूनेस्को छोडऩे का ऐलान कर दिया।

यूनेस्को डायरेक्टर ने इन देशों के अलग होने पर गहरा दुख व्यक्त किया है। अब अमरीका और इजरायल यूनेस्को के नॉन मेंबर ऑब्जर्वर होंगे। यूनेस्को सामान्यतया विश्व के पुरामहत्व के स्थलों की सुरक्षा के लिए जाना जाता है। लेकिन यह शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी कार्य करता है। अमरीका में यूनेस्को द्वारा घोषित पुरामहत्व के २३ स्थल हैं और इस दृष्टि से उसका विश्व में १० वां स्थान है जबकि भारत ३५ पुरामहत्व के स्थलों के साथ ६ वें स्थान पर है। इजरायल का मानना है कि यूनेस्को पुराममहत्व के स्थलों की सुरक्षा करने की बजाए उन्हें बर्बाद कर रहा है।

इजरायल-अमरीका ने कई बार इस बात का विरोध दर्ज कराया है कि यूनेस्को ने इजरायल के दक्षिणी हिस्से में फिलिस्तीनी क्षेत्र हेबरॉन को अधिकृत कर रखा है। इस इजरायल अधिकृत क्षेत्र को फिलिस्तीन के पुरामहत्व के स्थल के रूप में घोषित किया गया। यूनेस्को अब तक बने विभिन्न देशों के डायरेक्टर्स में से कतर, मिश्र और फ्रांस से बने डायरेक्टर को छोडक़र अमरीका ने किसी भी डायरेक्टर को अपना मित्र नहीं माना है। माना जा रहा है कि गुप्त मतदान की प्रक्रिया से शीर्घ ही नया डायरेक्टर चुन लिया जाएगा।

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