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तकनीक को अपनाने में बूमर्स भी अब जेन-जी से पीछे नहीं

आज बूमर्स टेलीमेडिसिन का सहजता से उपयोग करके डॉक्टर से संवाद कायम कर रहे हैं। ऑनलाइन दवा मंगवा लेते हैं।
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भारत

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Opinion Desk

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डॉ. राजेन्द्र

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Updated: 3 Nov 2026, 5:59 PM IST

boomers

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आज चारों तरफ जहां जेन-जी की बात हो रही है तो बूमर्स को भी तकनीक के उपयोग में कमतर नहीं आंका जा सकता। बूमर्स की खास बात यह है कि तकनीक के उपयोग में जेन-जी की तुलना में यह पीढ़ी अधिक परिपक्वता भी प्रदर्शित कर रही है। दरअसल यह माना जाता है और सही भी है कि जेन-जी डिजिटल विकास के साथ पले बढ़े हैं। तकनीक की भाषा में कहा जाए तो 1997-2012 के दौरान जन्मे युवाओं की पीढ़ी को जेन-जी के नाम से जाना जाता है तो बूमर्स 1946-1964 के दौरान जन्मे लोगों की पीढ़ी है। यह कम से कम साठ पार की पीढ़ी है।खास बात यह है कि यह पीढ़ी वास्तव में रिटायर्ड न होकर आज सभी मोर्चों पर अधिक सक्रिय है। इसका एक बड़ा कारण समय की उपलब्धता, तकनीक सुविधा, वित्तीय सक्षमता और आत्मनिर्भरता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो पैसों और साधनों की उपलब्धता ने बूमर्स को अधिक सशक्त बनाया है। मैकिंजे के सर्वे में यह उभरकर आया है कि बूमर्स में सीखने की ललक अधिक है। यही कारण है कि जहां एक और जेन-जी तकनीक के साथ आगे बढ़ रहे हैं वहीं अनुकूल परिस्थितियों ने बूमर्स को नई चीजें सीखने और उसे उपयोग में लेने के लिए अधिक प्रेरित किया है। एआइ का उपयोग हो चाहे डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन खरीदारी हो या सोशल मीडिया का उपयोग बूमर्स दो कदम आगे ही दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि बूमर्स नापतौल करने में कोई कमी नहीं छोड़ते। ऑनलाइन खरीदारी से पहले ऑनलाइन रिव्यू देखते हैं और एआइ को भी जानकारी का जरिया बनाने में आगे हैं। बूमर्स के साथ सकारात्मक तथ्य यह है कि उनकी क्रय-शक्ति, वित्तीय स्थिरता ने उन्हें अधिक साहसी या यों कहें कि रिस्क लेने वाला बना दिया है।

जिस तरह से आज एकल परिवार होने लगे हैं व बच्चे कहीं दूर काम करने लगे हैं तो इस पीढ़ी को एक अलग माहौल मिल रहा है। यही कारण है कि यह पीढ़ी निर्भरता के स्थान पर आत्मनिर्भर अधिक होने लगी है। दरअसल तकनीक ने बुढ़ापे को संघर्षशील नहीं बनाकर आनंददायक बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर अधिक सक्रियता से परस्पर वर्चुअल संवाद और जानकारियां का आदान प्रदान हो जाता है। इंटरनेट और ईमेल से जानकारियां साझा हो जाती हैं। आज बूमर्स टेलीमेडिसिन का सहजता से उपयोग करके डॉक्टर से संवाद कायम कर रहे हैं। ऑनलाइन दवा मंगवा लेते हैं। बैंकों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और डिजिटल बैंकिंग ने सब आसान कर दिया है। हालांकि तकनीक पर अत्यधिक और आंख मींचकर निर्भरता को उचित नहीं ठहराया जा सकता, पर जिस तरह से बूमर्स ने समय के साथ तकनीक को आत्मसात् करने में सक्रियता दिखाई है उससे निश्चित रूप से बुजुर्ग को अधिक सशक्त बने हैं।

डॉ. राजेन्द्र,(प्रसाद शर्मा स्वतंत्र लेखक)