
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी
पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी के अग्रलेख ‘हाथी के दांत’ को पाठकों ने सिस्टम को आईना दिखाने वाला बताया है। पाठकों का कहना है कि सरकारों के भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस के दावों और हकीकत में बहुत अंतर रहता है। प्रतिक्रियाएं विस्तार से…
सरकारें कहती कुछ हैं और करती कुछ हैं। नियम-कानूनों को ताक पर रखकर भ्रष्टाचार की गलियां निकालने में अफसरशाही माहिर होती है। भ्रष्टाचार का कोई मामला पकड़ भी लिया जाए तो जांच में इतना समय लग जाता है कि सारे प्रयास निरर्थक साबित होते हैं। बड़ी मछलियों को छोड़ छोटे मच्छर मारकर न्याय की इतिश्री कर दी जाती है। सही ही कहा है, 'बकरी पत्ती खात है ताकि खेंचत खाल, जो नर बकरी खात है वाको कौन हवाल।'
-कुलदीप पारीक, नागौर
अग्रलेख आईना दिखाता है कि किस तरह शासन प्रणालियों में पारदर्शिता के दावों और जमीनी हकीकत में भारी अंतर होता है। व्यवस्था में सुधार के लिए केवल दिखावे की औपचारिकताएं काफी नहीं हैं। जब तक सिस्टम में बैठे बड़े मगरमच्छों पर बिना किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होगी और दोषियों को त्वरित सजा नहीं मिलेगी, तब तक आम जनता का तंत्र पर से विश्वास बना रहना आसान नहीं है। जरूरत इस बात की है कि नौकरशाही पारदर्शी बने, अभियोजन की प्रक्रिया तेज हो और व्यवस्था के 'खाने और दिखाने के दांत' एक समान हों।
-कमल कुमार कुमावत, गोविंदगढ़ (जयपुर)
गुलाब कोठारी ने अपने अग्रलेख में भ्रष्टाचार को प्रमुख रूप से उजागर करते हुए व्यवस्था के दोहरे चरित्र को सामने रखा है। एक तरफ नशामुक्ति का दिखावा, वहीं दूसरी तरफ राजस्व के लालच में गांवों तक अंग्रेजी शराब को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में बच्चों के लापता होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मादक पदार्थों की बेरोकटोक बिक्री और भयानक रूप ले चुकी मानव तस्करी केवल दिखावटी छापों से नहीं रुकेगी। इसके लिए ठोस इच्छाशक्ति और कठोर कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है। भ्रष्टाचारियों को स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि दोषी पाए जाने पर कठोर से कठोरतम सजा तय है।
-गोकुल चंद यादव, मुंडावर, जिला खैरथल
अब भ्रष्टाचार को ऐसी लाइलाज बीमारी माना जाने लगा है, जिसकी कोई दवा नहीं है। भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। वैसे भ्रष्टाचार कई देशों में फैला है, मगर हमारे यहां भी इसकी जड़ें काफी गहरी हो गई हैं। अब तो लगने लगा है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश शायद ही लग पाएगा। जांच में देरी भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। भ्रष्टाचारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
-साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर
अग्रलेख ‘हाथी के दांत’ सत्ता और प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार की दोहरी नीति को उजागर करता है। छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई कर वाहवाही लूटना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती बड़े पदों पर बैठे प्रभावशाली लोगों को भी कानून के दायरे में लाने की है। सत्ता बदलने पर व्यवस्था नहीं बदलती। भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष होनी चाहिए। जनता को दिखावटी कार्रवाई नहीं, परिणाम चाहिए।
-गोपाल अरोड़ा, जोधपुर
Updated on:
3 Nov 2026, 7:32 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 7:32 PM IST
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