नवरात्र के नौ दिन मूल रूप से तीन गुणों - रजस, तमस और सत्व में बांटे गए हैं, जो त्रिगुण के नाम से भी जाने जाते हैं। किसी भी जीव के अस्तित्व के लिए ये तीन गुण ही मुख्य आधार हैं। रजो, तमो और सतो, इन तीनों गुणों के बिना कोई अस्तित्व संभव नहीं है।
सद्गुरु जग्गी वासुदेव
संस्थापक, ईशा फाउंडेशन
नवरात्र का उत्सव पूर्ण रूप से देवी से जुड़ा हुआ है। कर्नाटक में दशहरा में चामुंडी की पूजा होती है, जबकि बंगाल में दुर्गा की। इसी तरह देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न देवियों की उपासना होती है, लेकिन मूल रूप से नवरात्र का समय देवी आराधना या शक्ति की उपासना से जुड़ा है।
नवरात्र के नौ दिन मूल रूप से तीन गुणों - रजस, तमस और सत्व में बांटे गए हैं, जो त्रिगुण के नाम से भी जाने जाते हैं। किसी भी जीव के अस्तित्व के लिए ये तीन गुण ही मुख्य आधार हैं। रजो, तमो और सतो, इन तीनों गुणों के बिना कोई अस्तित्व संभव नहीं है। यहां तक कि एक अणु भी इन गुणों से मुक्त नहीं है। हर अणु में इन तीनों गुणों या तत्वों की ऊर्जा, स्पंदन व प्रकृति का कुछ न कुछ अंश पाया जाता है। अगर ये तीनों तत्व मौजूद नहीं होंगे, तो कोई भी चीज टिक नहीं सकती, वह बिखर जाएगी। इसलिए हर चीज में ये तीनों ही गुण मौजूद हैं।
अब सवाल यह है कि आप इन तीनों को किस अनुपात में मिलाते हैं। तमस का शाब्दिक अर्थ है, निष्क्रियता और ठहराव। रजस का आशय है, सक्रियता और जोश। जबकि एक तरह से सत्व का मतलब है, अपनी सीमाओं को तोडऩा, विसर्जन, विलयन व एकाकार। तीन मुख्य आकाशीय पिण्डों - सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा से हमारे शरीर की मूल संरचना का गहरा संबंध है। पृथ्वी को तमस का, सूर्य का रजस का और चंद्रमा को सत्व का प्रतीक मानते हैं। जो लोग अधिकार, सत्ता, अमरत्व व ताकत की कामना करते हैं, वे देवी के तमस रूप की आराधना करेंगे, जैसे काली व धरती माता। जो लोग धन-दौलत, ऐश्वर्य, जीवन व सांसारिकता से जुड़ी चीजों की कामना करते हैं, वे स्वाभाविक तौर पर देवी के रजस रूप की आराधना करेंगे, जिसमें देवी लक्ष्मी व सूर्य आते हैं। जो लोग ज्ञान, चेतना, उत्कर्ष, और नश्वर शरीर की सीमाओं से ऊपर उठने की कामना करते हैं, वे देवी के उस सत्व रूप की आराधना करेंगे, जिसका प्रतीक सरस्वती और चंद्रमा हैं। नवरात्र के पहले तीन दिन तमस के माने जाते हैं, जिसकी देवी प्रचंड और उग्र हैं, जैसे दुर्गा या काली। इसके अगले तीन दिन रजस या लक्ष्मी से जुड़े माने जाते हैं, जो बहुत सौम्य हैं, लेकिन सांसारिकता से जुड़े हुए हैं। आखिरी तीन दिन सत्व से जुड़े माने जाते हैं, जिसकी देवी सरस्वती हैं, जो विद्या और ज्ञान से संबंधित हैं।
इन तीनों गुणों में अपनी जिंदगी निवेश करने के तरीके से आपके जीवन की दशा व दिशा तय होती है। लेकिन, अगर आप इन तीनों ही तत्वों से ऊपर उठ जाते हैं तो फिर मामला शक्ति का नहीं, बल्कि मुक्ति से जुड़ जाता है। तो इस प्रकार ये तीन गुण आपको अलग-अलग तरीकों से सामथ्र्यवान और शक्तिशाली बनाते हैं।