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आपकी बातः भारत की कार्य- संस्कृति में सुधार को लेकर आपके क्या विचार हैं?

पाठकों ने इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं दी हैं, प्रस्तुत हैं पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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Jan 28, 2026

जवाबदेही तय करना जरूरी
भारत की कार्य संस्कृति में सुधार के लिए लोकसेवा से जुड़े प्रत्येक कर्मी को उसे दिए गए काम को पूरी ईमानदारी के साथ निर्धारित समय से पहले पूरा करना चाहिए । साथ ही सभी कर्मियों पर काम का समान बोझ डालने, समान सुविधाएं देने, प्रतिभावान कर्मियों को पुरस्कृत करने तथा पदोन्नति के लिए एक समान नीति बनाईं जानी चाहिए। आरक्षित वर्ग के कर्मियों को सामान्य वर्ग के कर्मियों से पहले पदोन्नत नहीं किया जाना चाहिए तथा सभी की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। - वसंत बापट, भोपाल
कड़ी मेहनत के लिए पुरस्कृत करें
कार्य संस्कृति एक सतत् प्रक्रिया है जिसके निरन्तर प्रयास और समर्पण की जरूरत होती है । कर्मचारियों के कार्यकाल और उनके जीवन के बीच संतुलन बनाने के लिए भी खास ध्यान देना चाहिए और उनकी कड़ी मेहनत के लिए उन्हें पुरस्कृत करना चाहिए। - मनवीर चंद कटोच, जयपुर
कार्य-जीवन संतुलन अनिवार्य
भारत की कार्य संस्कृति में सुधार का उद्देश्य टॉक्सिक कार्यस्थल संस्कृति को कम करना और उत्पादकता बढ़ाना है। कार्य-जीवन संतुलन और कर्मचारियों के लिए लचीले काम के घंटे और रिमोट वर्किंग विकल्पों को बढ़ावा देना चाहिए। मानसिक तनाव को कम करने के लिए समय-समय पर ब्रेक और छुट्टियां सुनिश्चित करना और काम के बाद के घंटों में काम के ईमेल या कॉल से बचना चाहिए। नेतृत्व और कर्मचारियों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए 'ओपन-डोर पॉलिसी' अपनाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना आवश्यक है। नई तकनीकें और कौशल सीखने के लिए समय और संसाधन उपलब्ध कराना अनिवार्य है। - डॉ. मुकेश भटनागर, भिलाई
परिणामों से प्रगति को मापें
भारत की कार्य-संस्कृति में सुधार आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। अक्सर देखा जाता है कि काम के घंटों की संख्या को ही मेहनत का पैमाना मान लिया जाता है, जबकि वास्तविक प्रगति परिणामों से मापी जानी चाहिए। एक स्वस्थ कार्य-संस्कृति वही होती है, जहां समय की कद्र, अनुशासन और आपसी सम्मान को प्राथमिकता मिले। कर्मचारियों को निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर देना, उनकी बात सुनना और योग्यता के अनुसार आगे बढ़ने का रास्ता देना संस्थानों को मजबूत बनाता है। - रोहित सोलंकी, नर्मदापुरम
गुणवत्ता पर फोकस जरूरी
कंपनियों व नियोक्ताओं को काम की गुणवत्ता को मापने की संस्कृति अपनाने पर ही फोकस करना चाहिए। घंटों के बजाय परिणाम आधारित मूल्यांकन करने, सीमाओं का सम्मान, मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता तथा वैश्विक स्तर पर विकास में अग्रणी आने का ध्येय रख काम के घंटों और जीवन संतुलन बनाए रखने के प्रयास जरूरी हैं। समावेशी सहानुभूति पूर्ण स्थल देश के आर्थिक विकास और कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा दे सकेगा। - शिवजी लाल मीना, जयपुर

Published on:
28 Jan 2026 03:05 pm
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