शहडोल

पाली रात 12 बजे : जन्मे कृष्ण, शहर में गूंजा नंद के घर आनन्द भयो जय कन्हैयालाल की

भाद्रकृष्ण पक्ष अष्टमी की रात 12 बजते ही हर कोई खुशी से झूम उठा।
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Updated: 25 Aug 2016, 9:00 PM IST
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पाली. भाद्रकृष्ण पक्ष अष्टमी की रात 12 बजते ही हर कोई खुशी से झूम उठा। शंख की गूंज, जयकारों, घंटे-घडि़याल की ध्वनि और नंद के आनन्द भयो के स्वर से रात का सन्नाटा खो गया। शहर की गलियां और मोहल्ले रोशनी से दमक उठे। जन्माष्टमी के चार योग (तिथि-अष्टमी, चन्द्रमा-वृषभ का, अद्र्धरात्रि व रोहिणी नक्षत्र) में आने का हर कोई साक्षी बनने और प्रभु जन्म की खुशी मनाने को आतुर नजर आया। भगवान के जन्म का समय होते ही लोगों ने पहले नंद घर आनन्द भयो जन कन्हैयालाल की... बोलकर उनका स्वागत किया और बाल गोपाल का पंचामृत से अभिषेक कर आभूषणों से शृंगार कर झूला झूलाया। पंजीरी और पंचामृत का प्रसाद लेकर भगवान को शीश नवाया। फूलों से सजे गीता सत्संग भवन में शाम ढलते ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। जो रात बारह बजे तक अनवरत जारी रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान का जन्म होने से पहले महंत प्रेमानंद के सान्निध्य में भजन गाकर प्रभु की आराधना की। प्रभु का जन्म होने पर अभिषेक कर भगवान को मंजीरी व पंचामृत का प्रसाद चढ़ाया। व्यंक्टेश भगवान मंदिर, रघुनाथ मंदिर, नागा बाबा बगेची में महंत सुरेश गिरी के सान्निध्य में, राजाराम मंदिर व नृसिंह भगवान मंदिर के साथ अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान के भजन गाए। प्रभु का जन्म होने पर प्रसाद लिया।

व्रत व उपवास रखकर की आराधना

भगवान के जन्मोत्सव पर श्रद्धालुओं ने व्रत व उपवास रखा। कई लोगों ने घरों में भगवान कृष्ण के बीज मंत्रों व ओम् नमो वासुदेवाय... मंत्र के साथ हवन व पूजन कर भगवान को रिझाने का जतन किया। कई लोगों ने गायों का पूजन किया और चारा खिलाकर पुण्य लाभ कमाया।

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