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Rajasthan Crime: 90 वर्षीय दादा की हत्या में पौत्र निकला मास्टरमाइंड, बहन की लव मैरिज से थे नाराज

देसूरी थाना क्षेत्र के गुड़ा भोपसिंह के नदी में 90 वर्षीय बुजुर्ग अमरसिंह का शव मिलने के मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे में खुलासा कर दिया। जानिए हत्या की वजह-
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Aug 15, 2026
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वारदात को लेकर जानकारी साझा करते हुए पुलिस अधिकारी। Photo- Patrika

देसूरी (पाली)। देसूरी थाना क्षेत्र के गुड़ा भोपसिंह के नदी में 90 वर्षीय बुजुर्ग अमरसिंह का शव मिलने के मामले में पुलिस ने महज 24 घंटे में पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने हत्या के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि घटना में शामिल विधि से संघर्षरत एक नाबालिग को बाल कल्याण नियमों के तहत संरक्षण में लिया है।

बाली वृताधिकारी पारस चौधरी ने बताया कि 12 अगस्त को गुड़ा भोपसिंह के पास नदी में अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने की सूचना मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और एमओबी टीम की सहायता से साक्ष्य जुटाए।

मृतक की पहचान करीब 90 वर्षीय अमरसिंह राजपूत निवासी गुड़ा भोपसिंह के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में हत्या अन्य स्थान पर कर शव नदी में फेंके जाने की आशंका हुई।

पूछताछ में खुला हत्या का राज

पुलिस ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। इस दौरान मृतक के परिवार के ही एक विधि से संघर्षरत बालक की गतिविधियां संदिग्ध मिलीं। पूछताछ में सामने आया कि वह मृतक का पौत्र है।

पुलिस के अनुसार पिता की मौत के बाद दादा की कथित संवेदना की कमी तथा बहन की लव मैरिज को लेकर दादा की नाराजगी से वह क्षुब्ध था। इसके चलते उसने अपने दोस्त घाणेराव निवासी पूरण मेघवाल के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।

नदी में पड़ा मिला शव

पुलिस जांच में सामने आया कि वारदात से पहले बालक ने इंटरनेट पर सर्च किया। पुलिस के अनुसार मृतक के शरीर पर चाकू व स्क्रूड्राइवर के 3-4 वार किए गए।

हत्या के बाद विधि से संघर्षरत बालक, घाणेराव निवासी पूनमचंद उर्फ पूरण मेघवाल (20) और खेत की रखवाली करने वाले सायरा थाना क्षेत्र एवं हाल गुड़ा भोपसिंह निवासी खरताराम भील (50) की मदद से शव को बोरे में डाला। इसके बाद रात में स्कूटी पर डालकर घर से करीब 200 मीटर दूर नदी में शव फेंक दिया। 12 अगस्त की सुबह शव नदी में पड़ा मिला।

कॉल हिस्ट्री और सर्च हिस्ट्री बनी अहम कड़ी

पुलिस के अनुसार खुलासे में कॉल हिस्ट्री, इंटरनेट सर्च और अन्य तकनीकी साक्ष्य महत्वपूर्ण साबित हुए। मृतक 10 अगस्त की रात घर पर सोया था, लेकिन 11 अगस्त को उसके गायब रहने के बावजूद गुमशुदगी दर्ज नहीं कराई। 12 अगस्त को नदी में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। 13 अगस्त को पोस्टमार्टम के बाद मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।

इनकी रही भूमिका

मामले के खुलासे में बाली वृताधिकारी पारसराम चौधरी, देसूरी थानाधिकारी ऊर्जाराम, घाणेराव चौकी प्रभारी शैतानसिंह, कांस्टेबल संतराम मीणा, धर्मेंद्र कुमार और राकेश मीणा की विशेष भूमिका रही।

Updated on:
15 Aug 2026 05:50 pm
Published on:
15 Aug 2026 05:50 pm