
बिहार विधानसभा चुनावों से पहले विपक्षी दलों के महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। अब इस रस्साकशी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की एंट्री ने लालू यादव की राजद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली JMM ने बिहार में 12 सीटों की मांग रख दी है, जिनमें तारापुर और बेलहर जैसी सीटें शामिल हैं।
JMM का कहना है कि 2024 के झारखंड चुनाव में उन्होंने RJD को 6 सीटें दी थीं और एक मंत्री पद भी सौंपा था, ऐसे में अब RJD को उस उपकार का बदला चुकाना चाहिए। JMM के बिहार महासचिव सतीरमन सिंह ने RJD के सामने 12 संभावित सीटों की सूची पेश कर दी है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी इन सीटों पर खुद को मजबूत मानती है और इन्हें हर हाल में चाहती है।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस नेता पप्पू यादव ने हेमंत सोरेन के समर्थन में बयान देकर सियासी पारा और चढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि JMM को महागठबंधन में शामिल किया जाए। हेमंत सोरेन को हमारे साथ रहना चाहिए। पप्पू यादव का यह बयान RJD पर दबाव बढ़ाने वाला है, जो पहले से ही कांग्रेस की 70 सीटों की मांग से जूझ रही है।
2020 के विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी RJD अब महागठबंधन में सभी सहयोगियों की मांगों से परेशान दिख रही है। कांग्रेस 2020 जैसी स्थिति दोहराना चाहती है और 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है, जबकि RJD कांग्रेस को कम सीट देना चाहती है।
ऐसे में JMM की 12 सीटों की मांग और पप्पू यादव का समर्थन राजद नेता तेजस्वी यादव के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। अगर JMM को सीटें मिलती हैं तो कांग्रेस और RJD की झोली से कुछ हिस्सेदारी कम करनी होगी। वहीं अगर JMM की मांग ठुकराई जाती है, तो वो अलग राह भी चुन सकती है, जिससे महागठबंधन का गणित गड़बड़ा सकता है।
2020 में NDA ने 125 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी जबकि महागठबंधन 110 सीटों पर सिमट गया था। ऐसे में अगर JMM को महागठबंधन में जगह मिलती है, तो यह समीकरण को बदल भी सकता है, लेकिन फिलहाल सीटों की यह सियासत राजद की टेंशन को जरूर बढ़ा रही है।