पटना

‘आरक्षण खत्म करना तो दूर, समीक्षा की बात भी स्वीकार नहीं’, चिराग पासवान ने साफ किया पार्टी का स्टैंड

Chirag Paswan on Reservation: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण किसी को दी गई खैरात या दया नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि आरक्षण समाप्त करने की बात तो दूर, इसकी समीक्षा की चर्चा भी उन्हें और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को स्वीकार्य नहीं है।
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Aug 23, 2026
Chirag Paswan
लोजपा (रामविलास) अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान (X)

Chirag Paswan on Reservation: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया है। 10 फरवरी, 2020 को संसद में दिए गए अपने भाषण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई खैरात या किसी को दी गई रियायत नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आरक्षण खत्म करने की बात तो दूर, न तो वे और न ही उनकी पार्टी कभी इसकी समीक्षा (रिव्यू) को भी स्वीकार करेगी।

आरक्षण संवैधानिक अधिकार, कोई मेरबानी नहीं- चिराग पासवान

शेयर किए गए वीडियो में चिराग पासवान लोकसभा को संबोधित करते हुए कहते हैं कि भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बीच हुए पूना पैक्ट का ही परिणाम है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आने वाले लोगों के लिए आरक्षण एक संवैधानिक अधिकार बना है।

उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी को मिला कोई दान या मेहरबानी नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कानूनी चुनौतियों और बेवजह के विवादों के बार-बार उठने वाले सिलसिले को खत्म करने के लिए आरक्षण से जुड़े सभी कानूनों को संविधान की 9वीं अनुसूची में स्थायी रूप से शामिल करने की वकालत की।

NDA सरकार ने आरक्षण को किया मजबूत- चिराग पासवान

शेयर किए गए वीडियो में, चिराग पासवान ने आगे कहा कि NDA सरकार ने आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने के बजाय उसे और मजबूत किया है। सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (EWS) को दिए गए आरक्षण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस कदम ने आरक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया है।

चिराग ने यह भी कहा कि जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम को कमजोरर करने की कोशिशें की गईं, तो उनकी पार्टी सबसे पहले समीक्षा याचिका लेकर आगे आई थी। इसके बाद, केंद्र सरकार ने संसद का सत्र बढ़ाया और कुछ ही दिनों में संसद के दोनों सदनों में संशोधन विधेयक पारित कर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी और सरकार आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इस मामले में किसी भी नकारात्मक बदलाव की कोई गुंजाइश नहीं है।

Updated on:
23 Aug 2026 05:32 pm
Published on:
23 Aug 2026 05:30 pm
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