
Bihar Flood: बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने गुरुवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र राघोपुर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान वे सरायपुर और तेरसिया समेत कई जलमग्न गांवों में पहुंचे और प्रभावित लोगों के बीच राशन और राहत सामग्री बांटी। जमीनी हालात का जायजा लेने के बाद तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत कार्य जमीन पर कहीं नहीं दिख रहा और सारा काम सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।
हाल ही में हुए एक नाव हादसे का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई सरकारी नाव के टूटने और टकराने की वजह से तेरसिया गांव के दो होनहार युवकों की जान चली गई।
उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को सरकारी आर्थिक मदद के लिए कई दिनों तक भटकना पड़ा। जब इस मामले को लेकर अधिकारियों से लगातार सवाल पूछे गए, तब जाकर दबाव में प्रशासन हरकत में आया। तेजस्वी ने कहा कि क्षेत्र में उनके पहुंचने से ठीक पहले आनन-फानन में पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता के चेक सौंपे गए।
बाढ़ की स्थायी समस्या पर तेजस्वी यादव ने कहा कि सरायपुर और तेरसिया के ग्रामीणों को हर साल छाती तक गहरे पानी और बाढ़ की तबाही से जूझना पड़ता है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर असुरक्षित नावों से बाढ़ के पानी के बीच से सफर करने को मजबूर हैं।
तेजस्वी ने कहा कि बाढ़ की इस समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान एक ऊंचे पुलिया (कलवर्ट) का निर्माण है। अगर ऐसा पुलिया बन जाए, तो लोग साल भर सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकेंगे, जिससे भविष्य में मासूम लोगों की जान जाने से बचा जा सकेगा। सरकार से तुरंत निर्माण कार्य शुरू करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि अगर सत्ताधारी पक्ष ने इसमें कोई ढिलाई बरती, तो वे इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने के लिए अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करेंगे।
राहत शिविरों और भोजन वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल के दौरान बाढ़ के समय पाया नंबर 10 तक सामुदायिक रसोई सुचारू रूप से चलती थीं, जिससे यह सुनिश्चित होता था कि हर प्रभावित व्यक्ति को भोजन मिले। लेकिन मौजूदा व्यवस्था के तहत इसे पाया नंबर 1 तक ही सीमित कर दिया गया है, जहां बाढ़ के कारण लोगों का पहुंचना मुश्किल है।
तेजस्वी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए नावों की कमी है और राहत के नाम पर जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है। प्रशासनिक कुप्रबंधन और जमीनी स्तर पर लापरवाही के कारण बाढ़ का हर पीड़ित परेशान है।