-एसकेआईटी की ओर से चल रही पांच दिवसीय वेबीनार सीरीज संपन्न, पांचवे दिन सिस्टर शिवानी ने किया संबोधित। - समाज के आधारभूत ढांचे में बताया खुषियों की जड। मोबाईल से हर रोज एक घंटा की दूरी बनाने की जरूरी। - कहा सफलता के बदले पैमाने। पैसा कमाने से अधिक इसे कमाने का तरीका महत्वपूर्ण।
जयपुर. सफलता का मापदंड कोई अंक नहीं हो सकता। इसका मानक आपके द्वारा कमाए गए पैसे भी नहीं हो सकते। सफलता का अर्थ देने से है। जीवन में सार्थक, सकारात्मक एवं बेहतर सोच के साथ आगे बढे। सफलता की अनुभूति स्वयं ही हो जाती है। जीवन से जुडी कुछ ऐसी ही आधारभूत बाते ब्रह्माकुमारी सिस्टर षिवानी ने बुधवार को स्वामी केषवानंद इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी की ओर से आयोजित वेबीनार में कही। वे पांच दिन से काॅलेज की ओर से चल रही वेबिनार सीरीज “बियॉन्ड दा बाउंड्रीज- रिइंवेंटिंग हॉरिजन्स” के अंतिम दिन “बेक टू बेसिक्स- हैल्थ, हैप्पीनेस एंड पीस” विषय पर बतौर मुख्य वक्ता स्काॅलर्स को संबोधित कर रही थी। इस दौरान उन्होंने जीवन में आधारभूत तथ्यों से रूबरू करवाते हुए जीवन में सफलता की परिभाषा, स्वास्थय, खुषियां, शांति, सोषल मीडिया, मेडिटेषन जैसे मुद्दों पर संबोधित किया।
इस दौरान एसकेआईटी के चेयरमेन सुरजाराम मील ने ब्रह्मा कुमारी शिवानी का स्वागत किया। उन्होंने षिवानी के अंग दान के क्षेत्र में किये गए प्रयास भी सभी के लिए प्रेरणा के स्त्रोत बताया तथा उनके सिद्धांतो को जीवन में उतारने की आवष्यक्ता बताई। कार्यक्रम के समापन सत्र में रजिस्ट्रार रचना मील ने धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम में प्रो. पुनीत शर्मा, एंकर डीडी नेशनल व टेक्निकल एजुकेशन एक्सपर्ट मॉडरेटर की भूमिका में रहे तथा डॉ नेहा पुरोहित (एसोसिएट प्रोफेसर) ने कार्यक्रम में एंकर के रूप में भुमिका निभाई I गौरतलब है कि पांच दिन तक चली वेबीनार के दौरान देष के विभिन्न क्षेत्रो से नामचीन हस्तियों ने विभिन्न मुद्दों पर वेबीनार में संबोधित किया।
कमाने का जरिया महत्वपूर्ण, भोजन घर का बेहतर
सिस्टर षिवानी ने चर्चा में बोलते हुए कहा कि सफल होने का मतलब है “देना” । आप ने किसी को कितना दिया , यह महत्वपूर्ण है। वो व्यक्ति ही सफल है, जो ज्यादा से ज्यादा देता है। देने का मतलब चीजो का देना ही नहीं होता प्यार देना, स्नेह देना, समय देना भी देने की कैटोगरी में आता है। समाज में ये महत्वपूर्ण नहीं है कि आप ने कितना कमाया है, कैसे कमाया, यह महत्वपूर्ण है। उन्होंने घर एवं धर्मालय के भोजन को बेहतर बताते हुए इसमें सकारात्मक एनर्जी जुडी होने की बात कही। जबकि इसके मुकाबले उन्होंने बाहर के खाने का उपयोग ना करने की अपील की।
सफलता कोई नंबर नहीं
आज कल जो विधार्थी ज्यादा नंबर लाते है उन को सफल बोलते है पर सफल वो भी है जो सब की सहायता करता है सब का सम्मान करता है। आज कल लोगो का दिमाग व मन बहुत कमजोर है थोड़ी सी असफलता मिलते ही गलत करने का मन होने लगता है। हम लोगो को सुबह एक घंटे अपने मोबाइल से दूर रहना चाहिए और मेडिटेशन कर के अपने आप को मजबूत बना सकते है।