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Road Accident Deaths: क्यों ‘गोल्डन ऑवर’ को लेकर संवेदनशील हुई सरकार, जानें क्या होता है ABCDE प्रोटोकॉल?

Road Accident Deaths: भारत में हर साल औसतन 1.5 से 1.75 लाख से ज्यादा लोगों की मौत सड़क दुघर्टनाओं में हो जाती है। सड़क पर होने वाली मौतों में कमी लाने को लेकर केंद्र सरकार गंभीर हो गई है। आइए जानते हैं कि केंद्र सरकार क्या-क्या प्रयास कर रही है।

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Feb 24, 2026
सड़क हादसों में हर साल करीब 1.5 से 1.75 लाख लोगों की मौत हो जाती है।

Road Accident Deaths in India : भारत में सड़क दुघर्टनाओं में हर रोज 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से बहुत से लागों को अगर ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान चिकित्सा मिल जाए, तो उनकी जान बच सकती है। सड़क पर दुघर्टना से पीड़ित व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के झंझटों से बचने के चक्कर में राहगीर उन्हें सड़क पर ही छोड़ देते हैं। दूसरा घटनास्थल के आसपास के निजी अस्पताल मरीज की पहचान और इलाज में खर्च हुई राशि की रिकवरी के चक्कर में इलाज की उपेक्षा कर देते हैं, जिसके चलते कई व्यक्तियों की मौत हो जाती है। इस बारे में केंद्र और दिल्ली सरकार का फैसला काफी मददगार साबित होने वाला है।

गोल्डन ऑवर में ​मेडिकल हेल्प से मौतों में आ सकती है कमी

भारत में सड़क दुर्घटनाओं में हर वर्ष औसतन 1.75 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती हैं। इनमें से कई लोगों की समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप से रोकी जा सकती हैं। अध्ययनों से संकेत मिलता है कि यदि पीड़ितों को दुर्घटना के पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती करा दिया जाए, तो लगभग 50% मौतों को टाला जा सकता है। देश में देश में हर साल लगभग 4.5 लाख से लेकर 4.8 लाख सड़क दुघर्टनाएं होती हैं।

सड़क हादसों से मौतों में कमी लाने के लिए सरकार गंभीर

इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम राहत को मंजूरी दी। योजना के तहत किसी भी श्रेणी की सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त प्रत्येक पात्र पीड़ित को दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलेगा। वहीं, दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र की ‘राह-वीर’ योजना लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को 25,000 रुपये नकद पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाने की क्या होगी व्यवस्था?

इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS) 112 हेल्पलाइन के साथ एकीकरण यह सुनिश्चित करता है कि दुर्घटना पीड़ित ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर अस्पताल पहुंच सकें। सड़क दुर्घटना पीड़ित, राह-वीर (गुड समैरिटन) या दुर्घटना स्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 पर कॉल कर निकटतम नामित अस्पताल की जानकारी और एंबुलेंस सहायता प्राप्त कर सकता है, जिससे आपातकालीन सेवाओं, पुलिस और अस्पतालों के बीच त्वरित समन्वय संभव हो सके।

What is Golden Hour: कितना महत्वपूर्ण होता है गोल्डन ऑवर?

डॉ. ज्योत्सना श्रीवास्तव ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि सड़क पर दुघर्टनाओं के सबसे ज्यादा शिकार पुरुष युवाओं के होते हैं, जो जोशोखरोश में रोड सेफ्टी प्रोटोकॉल्स फॉलो नहीं करते। वह गाड़ी या बाइक चलाते समय स्पीड लिमिट, हेलमेट्स, घुटना और केहुनी प्रोटेक्टर्स का कोई ख्याल नहीं रखते हैं। यहां हेलमेट पहने और स्पीड लिमिट का ख्याल चालान कटने से बचाने के लिए किया जाता है। एक्सीडेंट के बाद ‘गोल्डन ऑवर’ यानी के प्रथम 60 मिनट सबसे महत्त्वपूर्ण हैं। अगर कोई पैरामेडिक या डॉक्टर मौजूद है तो ABCDE प्रोटोकॉल का पालन करना होता है। आइए, इसे समझने की कोशिश करते हैं।

क्या होता है ABCDE प्रोटोकॉल?

  • A – Assessment of damage and injury extent: सबसे पहले यह आकलन करना होता है कि जोखिम कितना है।
  • B – Breathing : मरीज सांस ले रहा है या नहीं। सांस नली में कुछ फंसा तो नहीं है। व्यक्ति की सांस उखड़ी हुई हो तो चेस्ट इंजरी की संभावना है।
  • C – assess circulations: दुघर्टना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की हाथ और पैरों की नब्ज की जांच करनी चाहिए। हां, दोनों हाथों और दोनों पैरों की जांच करना चाहिए।
  • D – Disability: इसमें फ़्रैक्चर को देखा जाता है की हाथ पैर में कुछ टेढ़ा तो नहीं लग रहा है।
  • E- Expose: इसमें पूरी जांच की जाती है। इसे ज़्यादातर ट्रॉमा यूनिट के लिए छोड़ देना उचित रहता है।

कितना महत्वपूर्ण होती है बचपन की ट्रेनिंग?

ज्योत्सना बताती हैं कि हमारे समय में स्काउट, गाइड और एनसीसी की ट्रेनिंग में यह सब सिखाया जाता था। इसकी ड्रिल्स बचपन से ही कराते थे। इसके अलावा बर्न के भी पहले घण्टे के मैनेजमेंट को सिखाते थे, अब इस बारे में कहीं बात ही नहीं होती। बच्चों को रटवा के एग्जाम में नंबर लाने दो बस, जीवन रक्षा सीख कर क्या होगा?

प्रधानमंत्री ने अपने आवास सेवा तीर्थ से लिया ये पहला फैसला

प्रधानमंत्री ने अपना आवास सेवा तीर्थ में स्थानांतरण के बाद सबसे पहला निर्णय प्रधानमंत्री ने पीएम राहत योजना (Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment - PM RAHAT) के बारे में लिया और इस योजना के शुभारंभ को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सा सहायता के अभाव में कोई भी जीवन न खो जाए।

घायलों को अस्पताल पहुंचाने वालों को मिलेगा 25 हजार रुपये

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्र की ‘राह-वीर’ योजना लागू करने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत गंभीर रूप से घायल सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को 25,000 रुपये नकद पुरस्कार और प्रशंसा प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

'योजना का मकसद बगैर भय के लोगों को मदद के लिए प्रेरित करना'

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस बारे में कहा कि यह पहल लोगों को घायलों की तुरंत सहायता करने और संवेदनशीलता दिखाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि योजना का मकसद लोगों को बिना भय के आगे आकर मदद करने के लिए प्रेरित करना है।

What is Rah Veer scheme: क्या है ‘राह-वीर’ योजना?

योजना के तहत जो भी व्यक्ति किसी गंभीर रूप से घायल पीड़ित को गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाने की व्यवस्था करेगा, वह 25,000 रुपये के पुरस्कार का पात्र होगा। यदि एक ही दुर्घटना में कई पीड़ितों को बचाया जाता है, तब भी प्रति घटना अधिकतम 25,000 रुपये का ही पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा, हर साल दस उत्कृष्ट ‘राह-वीर’ को 1 लाख रुपये का राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया जाएगा, अधिकारियों ने बताया।

पुरस्कार की घोषणा से लोगों में बढ़ेगी जागरूकता

हेलमेटमैन के नाम से मशहूर राघवेंद्र ने पत्रिका से कहा कि देश में हर रोज 1300 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें करीब 500 लोगों की मौत हो जाती है। इन घटनाओं में हर रोज 800 लोग सड़कों पर घायल हो जाते हैं। गुड समैरिटन कानून बनने के बाद भी लोग गोल्डन ऑवर में कई लोग कानूनी जटिलताओं या पुलिस कार्रवाई के डर से दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने से हिचकिचाते हैं। लोगों को अभी भी इस कानून के बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन 25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि से लोगों में इस कानून को लेकर जागरूकता बढ़ेगी और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोग आगे आएंगे।

क्या कहता है मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019?

यह योजना मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत गुड समैरिटन नियमों (Good Samaritan Law) के अनुरूप है, जो स्वेच्छा से दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले व्यक्तियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं। केंद्र सरकार ने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए इन प्रावधानों के साथ आर्थिक प्रोत्साहन भी जोड़ा है।

सरकार का V2V सुरक्षा तकनीक लागू करने का है प्लान

केंद्र सरकार वाहन-से-वाहन (V2V) सुरक्षा तकनीक शुरू करने की योजना बना रही है। इस बारे में पिछले महीने हुई संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने वाहन-से-वाहन संचार प्रणालियों के विकास के लिए 30 GHz रेडियो आवृत्ति आवंटित की है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने में मदद मिलेगी।

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