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Road Accident Death India : देश में हर रोज 500 से ज्यादा लोगों की सड़क हादसों में हो जाती है मौत, क्या V2V सुरक्षा तकनीक से दुघर्टनाओं में आएगी कमी?

Road Accident Death in India: भारत में सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए V2V सुरक्षा तकनीक लागू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। यह तकनीक क्या है? कैसे सड़क हादसों में कमी लाएगी? किन देशों में लागू हो चुकी है? कितना खर्च आएगा? यहां जानिए सबकुछ।

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Accident Death in India

Accident Death in India

Road Accident Death India : दुनिया में भारत सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों के मामले में पहले स्थान पर है। दुनिया की 11% सड़क दुघर्टनाएं सिर्फ भारत में होती है। भारत में हर साल लगभग 4,50,000-4,80,000 सड़क दुघर्टनाएं होती हैं। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सरकार V2V को लागू करने की योजना बना रही है। यह व्यवस्था क्या है? किन देशों में लागू है? इनको लागू करने में क्या चुनौतियां हैं, इसके बारे में जानने के लिए पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।

सालाना 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की चली जाती है सड़क हादसों में जान

देश में हर साल सड़क दुघर्टनाओं के चलते औसतन 1,50,000 -1,75,000 लाख से ज्यादा लोग जान गंवा बैठते हैं। सड़क हादसों में कम से कम लोगों की जान जाए, इसके लिए सरकार वाहन-से-वाहन (V2V) सुरक्षा तकनीक शुरू करने की योजना बना रही है।

पिछले हफ्ते नई दिल्ली में संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने वाहन-से-वाहन संचार प्रणालियों के विकास के लिए 30 GHz रेडियो आवृत्ति आवंटित की है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने में मदद मिलेगी।

वाहन से वाहन के बीच में कैसे बिठाया जाएगा तालमेल?

V2V संचार एक वायरलेस तकनीक है जो वाहनों को एक-दूसरे से संवाद करने और गति, स्थान, त्वरण, ब्रेकिंग आदि जैसी वास्तविक समय की जानकारी साझा करने में सक्षम बनाएगी। यह व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) की उपश्रेणी है और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अंतर्गत आती है।

V2V प्रणाली विमानन क्षेत्र की तकनीक की तरह करेगा काम

यह प्रणाली विमानन क्षेत्र की तकनीक के समान है, जिसमें विमान अपनी स्थिति, गति और ऊंचाई प्रसारित करते हैं, और आसपास के विमान और ग्राउंड स्टेशन इसे प्राप्त करते हैं। यह प्रणाली विश्व भर में विमानन क्षेत्र में मजबूती से काम कर रहा है, अब इसे सड़क क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। हालांकि कुछ देशों में वी-टू-वी लागू हो चुका है और इसका फायदा भी उन्हें मिल रहा है।

V2V कैसे काम करेगा?

MoRTH के अधिकारियों के अनुसार, V2V सिस्टम के लिए कारों में एक ऑन बोर्ड यूनिट (OBU) लगाई जाएगी ताकि आसपास के वाहन वायरलेस तरीके से आपस में जानकारी का आदान-प्रदान कर सकें। यह ड्राइवर को ब्लैक स्पॉट, बाधाओं, सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों, कोहरे या किसी भी संभावित खतरे के बारे में सचेत करेगा।

V2V की रेंज 300 मीटर तक होगी, एक स्स्टिम पर कितना आएगा खर्च?

V2V System : आम तौर पर, वी-टू-वी सिस्टम की रेंज 300 मीटर होती है और यह इस रेंज में वाहनों का पता लगा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई कार अचानक ब्रेक लगाती है, तो आस-पास के वाहनों को अलर्ट मिलेगा और वे उसे देखने से पहले ही अपनी गति धीमी कर लेंगे। इससे दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। ओबीयू की लागत 5,000 रुपये से 7,000 रुपये होगी। इससे सबसे पहले नए वाहनों में इंस्टॉल किया जाएगा।

चीन और अमेरिका में भारत के मुकाबले कम होती दुघर्टनाएं

सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली कुल मौतों के मामले में भारत विश्व में पहले स्थान पर है, जो दूसरे और तीसरे स्थान पर रहने वाले देशों से कहीं आगे है। भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में चीन का हिस्सा केवल 36% है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा 25% है। देश में हेलमेट नहीं पहनने के चलते हर रोज 216 से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है।

हर घंटे 20 में से 9 लोगों की मौत हेलमेट नहीं पहनने के चलते

देश में हर रोज 1300 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिसमें 500 लोगों की मौत हो जाती है। सड़क हादसों में हर घंटे 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है, जिसमें 9 लोगों की मौत हेलमेट नहीं पहनने के चलते हो रही है।

देश में सड़क हादसों में हो जाती हैं सैंकड़ों मौतें

  • दुनिया के कुल सड़क हादसों की 11 फीसदी दुघर्टनाएं सिर्फ भारत में होती है
  • भारत में हर साल 4,50,000 लाख से ज्यादा सड़क दुघर्टनाएं होती हैं
  • हर साल 1.5 से 1.8 लाख लोगों की सड़क हादसों में मौत हो जाती है
  • हर रोज 1300 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें 500 लोगों की मौत हो जाती है
  • सड़क हादसों में हर घंटे होने वाली 20 में से 9 की मौत हेलमेट नहीं पहनने से होती है

'बच्चों को साइकिल चलाते समय भी हेलमेट पहनने की आदत डालें'

12 राज्यों में घूम-घूमकर अबतक 75 हजार से ज्यादा हेलमेट बांट चुके राघवेंद्र हेलमेटमैन पत्रिका से बातचीत में कहते हैं कि भारत में आज भी 80 फीसदी लोग डुप्लिकेट हेलमेट लगा रहे हैं। जो लोग हेलमेट पहन भी रहे हैं, वो चालान कटने के डर से पहन रहे हैं। हेलमेट पहने की बात घर, परिवार, समाज से आनी चाहिए, क्योंकि हादसों के बाद सबसे ज्यादा परिवार के लोग ही सफर करते हैं। मेरी लड़ाई लोगों को व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार बनाने की है।

'बच्चों में खुद की सुरक्षा का बीज डालना जरूरी, तभी बनेगा सुरक्षित भारत'

हेलमेट पहनने की आदत कैसे डल सकती है? इस सवाल के जवाब में राघवेंद्र कहते हैं कि हमने सुप्रीम कोर्ट से 4 वर्ष के बच्चों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी इसलिए करवाया ताकि स्कूल जाने के लिए यूनीफॉर्म, जूते, बेल्ट और टाई की तरह सड़क पर आते ही हेलमेट पहनना लोगों को जरूरी लगे। उन्होंने कहा कि बच्चों को साइकिल के साथ हेलमेट भी खरीद कर दें। मां-बाप अपने बच्चों को साइकिल चलाते समय हेलमेट पहनना सुनिश्चित करे ताकि बाइक चलाने की उम्र आते-आते वह खुद ही हेलमेट पहनने को अनिवार्य समझने लग जाएं। जबतक बच्चों में खुद की सुरक्षा का बीज नहीं डलेगा, तब तक इस दिशा में हम विकास नहीं कर पाएंगे।

वर्षसड़क हादसों में मौतें
20151,48,707
20161,50,785
20171,47,913
20181,57,593
20191,58,984
20201,38,383 (कोविड काल)
20211,53,972
20221,68,491
2023 1,72,000*
2024 1,77,000*
Source: MoRTH

V2V कब से लागू करने की है योजना?

सरकार ने अभी तक इस प्रणाली को लागू करने की कोई निश्चित तिथि घोषित नहीं की है। हालांकि, यह सड़क सुरक्षा मंत्रालय (MoRTH) की इस वर्ष की प्रमुख पहल है। MoRTH सचिव उमाशंकर ने मीडिया से बताया कि मंत्रालय मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) के सहयोग से इसके लिए एक मानक तैयार कर रहा है और दूरसंचार विभाग के साथ एक संयुक्त कार्य दल का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि मानकों पर निर्णय होने के बाद, हम एक अधिसूचना जारी करेंगे। शुरुआत में, नए वाहनों में ये ऑन-बोर्ड यूनिट लगाना अनिवार्य होगा। इसके बाद, पुराने वाहनों में भी इसे लगाया जाएगा।

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V2V को लागू करने में क्या हैं चुनौतियां?

  • वी-टू-वी सिस्टम सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात प्रबंधन को बेहतर बनाने का एक समाधान प्रदान करता है। हालांकि, इसकी कुछ सीमाएं और गोपनीयता संबंधी चिंताएं भी हैं। सिस्टम के लिए आवंटित आवृत्ति बैंड सभी वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। इसका मतलब है कि यदि जानकारी का गलत संचार होता है, तो इससे दुर्घटनाएं और जानलेवा हादसे हो सकते हैं।
  • दूसरी समस्या यह है कि इसमें वाहनों, उनके स्थान, चालक के विवरण आदि के बारे में बड़ी मात्रा में डेटा संग्रहीत किया जाएगा। इस डेटा का दुरुपयोग का खतरा पैदा हो जाता है। इसे लागू करने के लिए सरकारी नियमों और विनियमों की आवश्यकता होगी।
  • इस प्रणाली के लिए साइबर हमला एक और चिंता का विषय है। यदि कोई हमलावर प्रणाली पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लेता है, तो इसका दुरुपयोग करके बड़ा सुरक्षा खतरा पैदा किया जा सकता है।

V2V किन देशों में किया जा चुका है लागू?

अमेरिका वी2वी संचार प्रणाली अनुसंधान और उसके कार्यान्वयन में अग्रणी है। इसके साथ ही वहां कड़े नियम भी लागू हैं। इसके अलावा, जर्मनी, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम आदि जैसे कुछ यूरोपीय देश भी नए वाहनों और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में वी2वी को शामिल कर रहे हैं। चीन वी2वी को अपनाने वाला एक और प्रमुख देश है, और जापान ने अपनी स्मार्ट वाहन पहलों के हिस्से के रूप में आईटीएस कनेक्ट कार्यक्रम शुरू किए हैं, जो वी2वी प्रणाली के तहत ड्राइवरों को वास्तविक समय में ट्रैफिक सिग्नल डेटा, ब्लाइंड स्पॉट चेतावनी और आपातकालीन वाहन अलर्ट प्रदान करते हैं।

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इन कार कंपनियों में V2V की सुविधा शुरू

अमेरिका में बिकने वाली फॉक्सवैगन गोल्फ 8 और कैडिलैक जैसी कारों में वी2वी तकनीक से लैस सुरक्षा प्रणाली दी गई है।

इन देशों में भी V2V लागू करने के बारे में चल रहा काम

भारत की तरह, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ब्राजील, मैक्सिको आदि जैसे देश वी2वी संचार प्रणालियों को शुरू करने के लिए प्रारंभिक प्रायोगिक चरणों में हैं।

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