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Patrika Special: “मैं रावण पुत्र…” राजस्थान के गांवों में ‘रावण’ नाम की अनोखी पहचान, सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज

पत्रिका स्पेशल के लिए विनोद नायक की रिपोर्ट : बांसवाड़ा जिले के कई गांवों में दर्जनों लोगों के नाम रावण या रावणलाल हैं। खास बात यह है कि उनके नाम राशन कार्ड समेत सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं।
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Oct 20, 2026
ravan
रावण, राम नाम वाले व्यक्तियों की तस्वीर | Credit- Patrika

घाटोल। बच्चों का नाम राम रखना आम बात है, लेकिन जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले के कुछ गांवों में लोगों के नाम रावण भी देखने को मिलते हैं। यहां रावण नाम वाले एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों लोग हैं। उनका नाम सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पंजीकृत परिवारों की सूची में ग्रामीण क्षेत्रों के कई उपभोक्ताओं के नाम रावण के रूप में दर्ज हैं। इनमें अधिकांश अरथूना ब्लॉक के गांवों के निवासी बताए गए हैं।

रसद विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि शुरुआत में नाम देखकर डेटा एंट्री में गलती की आशंका हुई थी। हालांकि, जब आधार और जन आधार के जरिए सत्यापन किया गया, तो रावण नाम सही पाए गए।

घाटोल से गढ़ी तक, कई गांवों में रावण

सूची के अनुसार, घाटोल ब्लॉक के बस्सी आड़ा गांव में रावण पुत्र फुनिया और पडाल छोटी में रावण पुत्र अलकू के नाम दर्ज हैं। बांसवाड़ा ब्लॉक के चीब गांव में रावण पुत्र भाणजी निनामा के नाम से राशन कार्ड बना हुआ है। अरथूना ब्लॉक के ओड़ा गांव में रावण पाटीदार, मोटी बस्सी में रावण और रावणलाल पाटीदार, कुवालिया में रावण पुत्र गौतम और रावण पुत्र ताजु, बिलोदा में रावण डाबी पुत्र मानेंग, झड़स में रावण और रावण डामोर तथा आंजना में रावण डामोर पुत्र जगजी के नाम सूची में दर्ज हैं। गढ़ी ब्लॉक के बोरी गांव में रावण पाटीदार पुत्र प्रताप का परिवार भी सूची में शामिल है। इनमें से कई लोगों के रोजगार गारंटी कार्ड भी बने हुए हैं।

नाम को लेकर नजरिया अलग-अलग

सूची में पाटीदार, डामोर, डाबी और निनामा परिवारों के लोगों के नाम रावण या रावणलाल के रूप में दर्ज हैं। इससे पता चलता है कि यह नाम अलग-अलग परिवारों में प्रचलित है। हालांकि, ऐसा नहीं लगता कि सभी परिवारों के पास यह नाम रखने की कोई खास वजह है।

इस नाम के साथ जीने की आदत हो गई

शुरुआत में मुझे अपने नाम को लेकर कुछ विचित्र-सा महसूस होता था, लेकिन समय के साथ इसकी आदत हो गई। अब इस नाम के साथ जीने की आदत हो गई है।

- रावण, निवासी बस्सी आड़ा

अलग-अलग दृष्टिकोण

रावण को लेकर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण अलग-अलग रहे हैं। रामायण की परंपरा में रावण को जहां प्रतिपक्षी के रूप में देखा जाता है, वहीं उसके विद्वान होने और शिवभक्ति से जुड़ी कथाएं भी प्रचलित हैं।

राम के साथ जाजम पर रावण

कुवालिया और मोटी बस्सी जैसे गांवों में रामलाल और रामू नाम के लोगों के साथ रावण नाम वाले लोग भी रहते हैं। नाम अलग होने के बावजूद गांवों में लोगों का आपसी मेलजोल सामान्य है। सामाजिक आयोजनों और सुख-दुख के अवसरों पर अलग-अलग नामों वाले लोग साथ बैठते हैं।

Updated on:
20 Oct 2026 03:01 pm
Published on:
20 Oct 2026 03:01 pm