Moringa Market Demand: फरवरी माह में मुनगा (सहजन) का सीजन अपने पूरे शबाब पर है और इस समय बिलासपुर पूर्वी भारत के लिए एक बड़े सप्लाई हब के रूप में उभरकर सामने आया है।
Moringa Farming Project: फरवरी माह में मुनगा (सहजन) का सीजन अपने पूरे शबाब पर है और इस समय बिलासपुर पूर्वी भारत के लिए एक बड़े सप्लाई हब के रूप में उभरकर सामने आया है। शहर की बुधवारी और मुख्य सब्जी मंडी से हर दिन 10 टन तक मुनगा बिहार और पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों में भेजा जा रहा है।
कारोबारियों के अनुसार, केवल बाहरी राज्यों के लिए रोजाना 8 से 10 लाख रुपए का व्यापार हो रहा है। मंडी में आने वाला मुनगा सिर्फ शहर के आसपास तक सीमित नहीं है। पाली, पेण्ड्रा और पंडरिया सहित कई ग्रामीण इलाकों से बड़ी मात्रा में मुनगा बिलासपुर की मंडियों में लाया जा रहा है।
कुरूद जिले के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और कुपोषण के खिलाफ प्रभावी पहल के रूप में कुरूद कृषि महाविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद रायपुर द्वारा मोरिंगा सहजन की खेती, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन पर आधारित विशेष परियोजना को मंजूरी दी गई है। इंदिरा गाधी कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध इस महाविद्यालय में अब किसानों को सहजन को हरे सोने में बदलने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
परियोजना के प्रधान अन्वेषक एवं सहायक प्राध्यापक डॉ पीयूष प्रधान ने बताया कि एक वर्ष की इस कार्ययोजना के तहत धमतरी जिले के कुरुव, मोरिंगा की खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में हो रहा विशेष प्रयास। सिरों तथा कबीरधाम जिले के रामपुर ग्राम को प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्र के रूप में चुना गया है।
प्रत्येक केंद्र से 50-50 किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से मोरिंगा की खेती का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस परियोजना के लिए परिषद द्वारा 4.95 लाख रूपए का बजट स्वीकृत किया गया है। परियोजना का संचालन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ नवनीत राणा के मार्गदर्शन में होगा।
परियोजना के अंतर्गत किसानों को मोरिंगा की उन्नत उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन, वैज्ञानिक कटाई, भंडारण पद्धतियों तथा मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मोरिंगा पाउडर, न्यूट्रीशन सप्लीमेंट, चाय, खाद्य पूरक जैसे उत्पादों की जानकारी देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कार्य होगा।
मुनगा, जिसे सहजन या ड्रमस्टिक भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरपूर औषधीय पौधा है। इसकी पत्तियों, फलियों और बीजों में विटामिन A, C, कैल्शियम, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इम्यूनिटी बढ़ाने, हड्डियों को मजबूत करने और शरीर की कमजोरी दूर करने में सहायक माने जाते हैं।
यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, ब्लड शुगर संतुलित रखने और सूजन कम करने में भी मददगार हो सकता है। नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन से त्वचा और बालों को भी लाभ मिलता है, हालांकि किसी बीमारी या गर्भावस्था की स्थिति में उपयोग से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
इसी क्रम में महाविद्यालय के प्रोफेसर हॉ ए कुरैशी को बड़ी उपलब्धि मिली है। उनके द्वारा विकसित टी. दिमित शीपर विद लॉक उपकरण की भारत सरकार द्वारा डिजाइन पेटेंट प्रदान किया गया है। यह उपकरण बागवानी किरहनों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, जिससे कम श्रम में सुरक्षित ढंग से पेड़ों की उंटाई संभव होगी।
डॉ नवनीत राणा ने कहा कि ये उपलब्धियां न केवल संस्थान बल्कि पूरे जिले के लिए, गौरव का विषय हैं। मोरिंगा में प्रचुर मात्रा में पोटीन आयरन, कैल्शियम और विटामिन पाए जाते हैं। यह कम लागत, क जोखिम वाली फसल है।