
Bulimia Nervosa : अक्सर बदलते लाइफस्टाइल और मानसिक तनाव के कारण लोग कई तरह की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। इन्हीं में से एक गंभीर समस्या है 'बुलीमिया नर्वोसा'। यह एक ऐसा ईटिंग डिसऑर्डर (Eating Disorder) है, जिससे पीड़ित व्यक्ति पहले तो एक ही बार में बहुत सारा खाना खा लेता है (Binge Eating) और फिर वजन बढ़ने के डर से या ग्लानि (Guilt) के कारण उस खाने को शरीर से बाहर निकालने की कोशिश करने लगता है (Purging)। यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं और किशोरों (Teenagers) में अधिक देखी जाती है। आइए जानते हैं कि आखिर यह ईटिंग डिसऑर्डर क्यों होता है? इसके लक्षण क्या हैं और इसका इलाज कैसे संभव है?
बुलीमिया से पीड़ित व्यक्ति का भोजन और अपने शरीर के वजन पर नियंत्रण नहीं रहता। इस बीमारी में दो मुख्य चक्र (Cycles) होते हैं:
बुलीमिया नर्वोसा का कोई एक सटीक कारण नहीं है। यह शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों का एक जटिल मिश्रण होता है:
बुलीमिया से पूरी तरह ठीक होना संभव है, लेकिन इसके लिए मेडिकल और मनोवैज्ञानिक मदद की जरूरत होती है। इसके इलाज में निम्नलिखित तरीके अपनाए जाते हैं:
एक डाइटीशियन के तौर पर आप उन शुरुआती संकेतों (Early Warning Signs) को कैसे पहचानते हैं जो बताते हैं कि कोई व्यक्ति सामान्य डाइटिंग से आगे बढ़कर बुलीमिया की तरफ बढ़ रहा है?
बुलीमिया नर्वोसा एक गंभीर ईटिंग डिसऑर्डर है, जो सीधे तौर पर हमारे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। इस बीमारी में व्यक्ति कुछ समय के लिए अपने खाने पर से नियंत्रण खो देता है और बहुत ज्यादा मात्रा में खाना शुरू कर देता है। अक्सर लोग सामान्य वजन घटाने की कोशिश और बुलीमिया के बीच का अंतर नहीं समझ पाते। अपने शरीर के वजन को लेकर सचेत होना एक अच्छी बात है। खुद को फिट रखने के लिए एक हेल्दी और संतुलित डाइट (Balanced Diet) लेना भी बेहद तारीफ के काबिल है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब यह कोशिश एक 'जुनून' का रूप ले लेती है।
इस बीमारी की शुरुआत कुछ इस तरह होती है:
आजकल युवाओं में 'क्रैश डाइट' या बहुत सख्त डाइटिंग का चलन है। क्या बहुत ज्यादा भूखा रहना या कैलोरी काउंटिंग करना बुलीमिया नर्वोसा के ट्रिगर पॉइंट बन सकते हैं?
जो लोग वजन घटाने के लिए बहुत ज्यादा सख्त या रिस्ट्रिक्टेड डाइट लेते हैं, क्रैश डाइट्स का सहारा लेते हैं, या हर समय कैलोरी काउंट करके ही खाना खाते हैं, उनमें बुलीमिया नर्वोसा ट्रिगर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, यह कहना बिल्कुल सही नहीं होगा कि हर वो व्यक्ति जो कैलोरी काउंट करता है, वह बुलीमिया का शिकार हो ही जाएगा। लेकिन, यह आदत इस गंभीर बीमारी का रास्ता जरूर खोल सकती है।
स्टार्वेशन मोड (Starvation Mode) और ग्रेलिन का विज्ञान : जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक बहुत कम कैलोरी वाली डाइट लेता है, मील्स स्किप (भोजन छोड़ना) करता है, या खुद को कई घंटों तक भूखा रखता है, तो हमारा शरीर इसे 'स्टार्वेशन' यानी भुखमरी की स्थिति समझने लगता है।
इस स्थिति में शरीर अपनी रक्षा के लिए एक खास वैज्ञानिक प्रक्रिया शुरू करता है:
इसे एक व्यावहारिक उदाहरण से समझें। मान लीजिए आपने वजन घटाने के लिए सुबह से सिर्फ सलाद और ग्रीन टी ली और पूरे दिन खुद को भूखा रखा। शाम होते-होते आपके शरीर और दिमाग की एनर्जी का स्तर बिल्कुल नीचे (Low Energy) चला जाएगा।
ऐसे में जब आपको तीव्र क्रेविंग होगी, तो आप सोचेंगे कि "चलो, सिर्फ एक बिस्किट खा लेता हूं, इससे क्या ही फर्क पड़ेगा? लेकिन जैसे ही आप वह एक बिस्किट खाएंगे, लंबे समय की भूख के कारण आप खुद पर से पूरी तरह नियंत्रण खो देंगे। देखते ही देखते पूरा पैकेट कब खत्म हो जाएगा, आपको पता भी नहीं चलेगा। इसे ही 'बिंज ईटिंग' (Binge Eating) कहते हैं।
इस अनियंत्रित खान-पान के तुरंत बाद मानसिक रूप से भारी अपराधबोध (Guilt) और डर पैदा होता है कि पूरे दिन की मेहनत बर्बाद हो गई और वजन बढ़ जाएगा। इस डर से बाहर निकलने के लिए जब व्यक्ति 'पर्जिंग' (उल्टी करना या दवाइयां लेना) शुरू कर देता है और यही चक्र बार-बार दोहराया जाने लगता है, तो यह बुलीमिया नर्वोसा का रूप ले लेता है।
बुलीमिया के मरीज का जब इलाज शुरू होता है, तो न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन (शरीर में पोषण की कमी दूर करना) कितना चुनौतीपूर्ण होता है?
जब बुलीमिया नर्वोसा से पीड़ित मरीजों को न्यूट्रिशनली ट्रीट करने यानी भोजन के जरिए उनके पुनर्वास (Nutrition Rehabilitation) की बारी आती है, तो शुरुआती चरण में मरीज को लगातार और सटीक काउंसलिंग की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। एक डाइटीशियन के तौर पर इलाज के दौरान इन स्टेप्स को अपनाया जाता है:
बुलीमिया के मरीजों में अनियंत्रित खाने की इच्छा (Binge Urges) को शांत करने के लिए एक डाइटीशियन किस तरह की डाइट स्ट्रेटेजी या माइंडफुल ईटिंग (Mindful Eating) की सलाह देते हैं?