
Thermal Power plant : बारिश थमी तो कोयले की सप्लाई सुधरने की उम्मीद जगी, लेकिन देश के बिजलीघरों में संकट अभी टला नहीं है। निगरानी में शामिल 190 थर्मल पावर प्लांटों में से 62 में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा चिंता राजस्थान को लेकर है, जहां राज्य की राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के सभी सात थर्मल पावर प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में हैं। इनकी कुल क्षमता 7,580 मेगावाट है, लेकिन मानक जरूरत के मुकाबले इनके पास सिर्फ 15 प्रतिशत कोयला स्टॉक बचा है।
राजस्थान के किसी भी संयंत्र में स्टॉक 25 प्रतिशत से अधिक नहीं है। इसलिए सभी संयंत्र केन्द्र की निगरानी में हैं। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही ये क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आएंगे। केन्द्र के सहयोग मिलने के कारण किसी भी प्लांट में उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ है।
इस बारिश के दौरान देश के औसत 50 थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का संकट बना रहा। दस सितंबर की दैनिक कोयला स्टाॅक रिपोर्ट के अनुसार अभी 190 निगरानी वाले संयंत्रों में से 62 में कोयले का स्टॉक क्रिटिकल स्तर पर है। इन संयंत्रों की कुल निगरानी क्षमता 2,23,868 मेगावाट है। इन प्लांटों के पास मानक आवश्यकता 576.77 लाख टन के मुकाबले सिर्फ 254.42 लाख टन कोयला उपलब्ध है। यानी मानक स्टॉक का महज 44 प्रतिशत कोयला ही मौजूद है। देश के बिजलीघरों में प्रतिदिन 85 प्रतिशत लोड फैक्टर पर करीब 31.17 लाख टन कोयले की जरूरत होती है। ऐसे में मौजूदा स्टॉक और आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार निगरानी वाले संयंत्रों का औसत पावर लोड फैक्टर करीब 65 प्रतिशत है। जिन तापीय विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार मानक आवश्यकता की तुलना में 25 प्रतिशत से कम है, उन पर कोयला मंत्रालय कड़ी निगरानी रख रहा है।
राजस्थान के सभी सात आरआरवीयूएनएल थर्मल पावर प्लांट क्रिटिकल श्रेणी में हैं। 7,580 मेगावाट की कुल क्षमता वाले इन संयंत्रों में मानक आवश्यकता का सिर्फ 15 प्रतिशत कोयला स्टॉक बचा है। सूरतगढ़ टीपीएस 1500 मेगावाट में महज 11 प्रतिशत और सूरतगढ़ एसटीपीएस 1320 मेगावाट में 12 प्रतिशत कोयला उपलब्ध है। कोटा, छाबड़ा प्रथम, छाबड़ा द्वितीय और कालीसिंध सहित सभी सात संयंत्रों में स्टॉक की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राजस्थान के किसी भी संयंत्र में 25 प्रतिशत से कम कोयला नहीं है। ये सभी केन्द्र की निगरानी में हैं। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही ये क्रिटिकल श्रेणी से बाहर आएंगे।
देश में घरेलू कोयले से चलने वाले 175 संयंत्रों की कुल क्षमता 2,06,094 मेगावाट है। इनके पास मानक आवश्यकता का सिर्फ 41 प्रतिशत कोयला उपलब्ध है। इनमें 57 संयंत्र क्रिटिकल श्रेणी में हैं। वहीं आयातित कोयले से चलने वाले 15 संयंत्रों की क्षमता 17,774 मेगावाट है और इनके पास मानक स्टॉक का 77 प्रतिशत कोयला उपलब्ध है। इनमें भी पांच संयंत्र क्रिटिकल हैं। खदानों के पास स्थित पिटहेड प्लांटों में औसतन 59 प्रतिशत स्टॉक है, जबकि नॉन-पिटहेड प्लांटों में यह घटकर सिर्फ 39 प्रतिशत रह गया है। इससे कोयले की ढुलाई और रेलवे रेक की उपलब्धता का संकट साफ दिखाई दे रहा है।
हरियाणा में तीनों बिजली संयंत्रों में मिलाकर सिर्फ 33 प्रतिशत स्टॉक उपलब्ध है। पानीपत टीपीएस में यह महज 16 प्रतिशत है। महाराष्ट्र में राज्य बिजली उत्पादन कंपनी के संयंत्रों में औसत स्टॉक 32 प्रतिशत है। भुसावल में 31, कोराडी में 23, खापरखेड़ा में 24 और नासिक में 29 प्रतिशत स्टॉक बचा है। उत्तर प्रदेश के राज्य बिजली संयंत्रों में औसत स्टॉक 35 प्रतिशत है। हरदुवागंज और जवाहरपुर संयंत्रों में यह सिर्फ 25 प्रतिशत है।
एनटीपीसी और संयुक्त उपक्रमों के संयंत्रों में कुल स्टॉक 46 प्रतिशत है। तांडा में 24, खरगोन में 23, दादरी में 30 और सिपत में 30 प्रतिशत स्टॉक उपलब्ध है। निजी स्वतंत्र बिजली उत्पादकों के संयंत्रों में कुल स्टॉक 44 प्रतिशत है। अडाणी पावर कवाई में 13, तिरोड़ा में 10, अमरावती में 9 और जीएमआर वरोरा में महज 4 प्रतिशत स्टॉक बचा है।
सीईए ने कोल इंडिया की सीसीएल, एसईसीएल, एनसीएल, एमसीएल और बीसीसीएल जैसी कंपनियों को सब-ग्रुप प्लान के तहत आपूर्ति में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। राजस्थान के थर्मल प्लांटों समेत खुरजा टीपीपी और सासन यूएमपीपी को कैप्टिव खदानों से कोयले की लिफ्टिंग बढ़ाने के लिए कहा गया है। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की बिजली उत्पादन कंपनियों को बंदरगाहों और ट्रांजिट मार्गों में अटके कोयले का तत्काल उठाव कर संयंत्रों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि बारिश के कारण खदानों से आपूर्ति घटने से संयंत्रों में कोयले की कमी हुई। हालांकि कोल इंडिया लिमिटेड ने खनन क्षेत्रों में बारिश में कमी के बीच कोयला उत्पादन और बिजली क्षेत्र के लिए आपूर्ति में सुधार किया है। औसत दैनिक कोयला उत्पादन 35 प्रतिशत तक बढ़ गया है। कोयला मंत्रालय का दावा है कि कैप्टिव खदानें कोयला उत्पादन में मुख्य आधार बनी हुई हैं और इनका उत्पादन लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में कैप्टिव खदानों का उत्पादन 167.44 एमटी था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 184 एमटी हो गया। यह 10.10 प्रतिशत की वृद्धि है। कॉमर्शियल खदानों के साथ कैप्टिव और कमर्शियल सेगमेंट ने मिलकर वित्त वर्ष 2025-26 में 210 एमटी उत्पादन किया, जबकि पिछले वर्ष यह 190.95 एमटी था। कुल घरेलू कोयला उत्पादन में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल घरेलू कोयला उत्पादन 1,039 एमटी रहा और लगातार दूसरे वर्ष एक बिलियन टन से अधिक बना रहा।