Job Loss India: युवाओं के सामने नौकरी का संकट तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया भर की टेक कंपनियों में लगातार छंटनी हो रही है। AI और ऑटोमेशन के चलते नई भर्तियां कम हो रही हैं। भारत में भी बेरोजगारी दर बढ़ती जा रही है। फ्रेशर्स और छोटे शहरों के युवाओं के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं। बदलती टेक्नोलॉजी के दौर में अब सिर्फ डिग्री नहीं आधुनिक स्किल्स और तकनीकी ज्ञान भी बेहद जरूरी हो गया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
Job Loss India: युवाओं का सपना होता है कि वह अच्छी पढ़ाई करे, मेहनत करे और फिर ऐसी नौकरी पाए, जहां अच्छी सैलरी के साथ बेहतर और सुरक्षित भविष्य मिले। पिछले कुछ दशकों से टेक सेक्टर रोजगार के लिहाज से युवाओं की पहली पसंद है। इसकी वजह वहां लाखों की पैकेज वाली सैलरी और कैरियर में अपेक्षाकृत पारदर्शी विकास है। लेकिन पिछले कुछ महीनों के आंकड़े के अनुसार पूरी दुनिया में बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां अपने कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ भारत में भी इस सेक्टर में बेरोजगारी अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
जनवरी से मार्च की तिमाही में युवा बेरोजगारी दर ने पिछले चार क्वार्टर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। देश के लाखों युवाओं का सपना टूट रहा। आइए यहां समझते हैं कि पूरी दुनिया में क्या हालात बन रहे हैं।
is AI taking Job? दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में छंटनी का दौर लगातार जारी है। साल 2026 में दुनिया भर में 1 लाख से ज्यादा टेक कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं। वहीं भारत में 15 से 29 साल के युवाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 15% तक पहुंच गई है, जो पिछले 4 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। AI और ऑटोमेशन के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से कंपनियां नई भर्तियां कम कर रही हैं। ऐसे हालात में सबसे ज्यादा दबाव उन युवाओं पर पड़ रहा है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में हैं।
Job Cut in Tech Companies: आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में मई तक दुनिया भर में 1,01,550 टेक और स्टार्टअप कर्मचारियों की नौकरियां जा चुकी हैं। इससे पहले 2025 में 1,24,474 कर्मचारियों की छंटनी हुई थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा 1,52,922 तक पहुंच गया था। लगातार तीन साल से हो रही इन कटौतियों से पता चलता है कि टेक इंडस्ट्री में अभी भी उथल-पुथल बनी हुई है। 2024 की पहली तिमाही यानी Q1 में करीब 57 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया था। दूसरी तिमाही Q2 में यह आंकड़ा करीब 43 हजार रहा और तीसरी तिमाही Q3 में करीब 39 हजार कर्मचारियों की छंटनी हुई। वहीं चौथी तिमाही Q4 में यह संख्या घटकर करीब 13 हजार रह गई थी और 2025 में भी हालात ज्यादा नहीं बदले। Q1 में करीब 30 हजार, Q2 में करीब 38 हजार, Q3 में लगभग 27 हजार और Q4 में करीब 29 हजार कर्मचारियों ने अपनी नौकरी गंवाई।
Job Loss in India : साल 2026 की पहली तिमाही Q1 में ही करीब 82 हजार कर्मचारियों की नौकरी चली गई। इसके बाद दूसरी तिमाही Q2 की शुरुआत में ही करीब 20 हजार लोग और नौकरी गंवा चुके हैं। साल के शुरुआती महीनों में ही छंटनी का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंच गया। वहीं भारत में भी नौकरी बाजार को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे ( PLFS ) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2026 तिमाही में 15 से 29 साल के युवाओं की बेरोजगारी दर बढ़कर 15 % तक पहुंच गई। यह चार तिमाहियों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इससे पहले अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में यह दर 14.3% थी।
रिपोर्ट के अनुसार युवाओं में बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है। 2025-26 की पहली तिमाही में 15 से 29 साल आयु वर्ग की बेरोजगारी दर 14.6 % थी। दूसरी तिमाही में यह 14.8 % पहुंच गई। तीसरी तिमाही में मामूली गिरावट के साथ यह 14.3 % रही, लेकिन चौथी तिमाही में फिर बढ़कर 15% हो गई। वहीं 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की कुल बेरोजगारी दर भी पूरी तरह स्थिर नहीं रही। पहली तिमाही में यह 5.4% दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में 5.2 फीसदी%, तीसरी तिमाही में 4.8% और चौथी तिमाही में यह फिर बढ़कर 5% पहुंच गई।
महिलाओं में बेरोजगारी की स्थिति और ज्यादा चिंताजनक है। रिपोर्ट के अनुसार 15 से 29 साल की महिलाओं में बेरोजगारी दर बढ़कर 17.7 % तक पहुंच गई है। इससे पहले अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में यह 16.6% थी। वहीं युवा पुरुषों में बेरोजगारी दर 13.5% से बढ़कर 14 % दर्ज की गई। इसका मतलब साफ है कि नौकरी का दबाव महिलाओं और पुरुषों दोनों पर बढ़ रहा है, लेकिन महिलाओं के लिए हालात ज्यादा कठिन दिखाई दे रहे हैं।
आजकल नौकरियों की कमी का सबसे बड़ा कारण AI और ऑटोमेशन की बढ़ती रफ्तार है। कपनियां कम खर्च और कम लोगों में ज्यादा काम निपटाना चाहती हैं। जो काम पहले एक बड़ी टीम मिलकर करती थी, वही काम अकेले सॉफ्टवेयर या AI टूल्स मिनटों में कर देते हैं। डेटा, कोडिंग, डिजाइनिंग और कस्टमर सपोर्ट जैसे क्षेत्रों में मशीनों का दखल बढ़ गया है। जिससे नई भर्तियां कम हो गई हैं और नौकरी पाना पहले से ज्यादा कठिन हो गया है। इसके अलावा कोरोना काल में टेक कंपनियों ने बड़े स्तर पर भर्ती की थी, क्योंकि उस समय डिजिटल सेक्टर तेजी से बढ़ रहा था और कर्मचारियों की मांग अधिक थी। लेकिन बाद में बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई और कंपनियों पर खर्च कम करने का दबाव बढ़ने लगा। इसी कारण कई कंपनियों ने छंटनी शुरू कर दी, जिसका असर आज भी देखने को मिल रहा है।
भारत में स्टार्टअप सेक्टर भी इस समय दबाव में है। कुछ साल पहले तक स्टार्टअप कंपनियां युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत थीं, लेकिन अब निवेश में कमी और मुनाफे के बढ़ते दबाव के कारण कई कंपनियां खर्च घटा रही हैं। कई स्टार्टअप्स ने नई भर्तियां रोक दी हैं, जबकि कुछ केवल अनुभवी कर्मचारियों को ही मौका दे रही हैं, जिसका सबसे ज्यादा असर फ्रेशर्स पर पड़ रहा है। इसके साथ ही डिग्री और स्किल के बीच बढ़ता अंतर भी बड़ी समस्या बन गया है। हर साल लाखों युवा कॉलेजों से निकलते हैं, लेकिन कंपनियों के अनुसार कई युवाओं में इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार कौशल की कमी है।
केवल कॉलेज की डिग्री अब नौकरी के लिए काफी नहीं है,न कंपनियों उन युवाओं को तलाश रही हैं जिन्हें AI, डेटा एनालिटिक्स और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की गहरी समझ हो। वहीं छोटे शहरों और कस्बों के युवाओं के लिए स्थिति और ज्यादा कठिन होती जा रही है। हर साल लाखों युवा नौकरी की तलाश में बड़े शहरों की तरफ जाते हैं। लेकिन वहां भी अवसर सीमित होते जा रहे हैं। कई युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी में सालों लगा रहे हैं, जबकि निजी कंपनियों में शुरुआती वेतन को लेकर भी असंतोष बढ़ रहा है। इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों के हिसाब से खुद को अपडेट न कर पाना भी बेरोजगारी का एक बड़ा कारण है।