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Bangladesh Population Crisis: जनसंख्या नियंत्रण के लिए बांग्लादेश को मिली थी वाहवाही, अब हुई बेपटरी, पढ़िए पूरी कहानी

Bangladesh Population Crisis: बांग्लादेश को पाकिस्तान से 1971 में आजादी मिली लेकिन सबसे बड़ी समस्या के साथ। यह समस्या थी, यहां तेजी से बढ़ रही आबादी की। 1975 में प्रजनन दर प्रति महिला 6.3 बच्चे थी। 2022 तक आते-आते 2.3 पर पहुंच गई थी। शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़कर भारत निर्वासन के बाद प्रजनन दर में इजाफा दर्ज किया जा रहा है। यह क्यों और कैसे हुआ? विस्तार से पढ़िए।

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Bangladesh contraceptive crisis Bangladesh birth rate

बांग्लादेश में प्रति महिला प्रजनन दर में बढ़ोतरी हुई है। (Photo: IANS)

Bangladesh Population Control : पाकिस्तान से भाषा विवाद के आधार पर 1971 में टूटकर एक नए देश बांग्लादेश का निर्माण हुआ। आजादी के बाद देश तेजी से बढ़ रही आबादी की चुनौती से जूझ रहा था। बांग्लादेश में नई सरकारों का ध्यान इस गंभीर समस्या पर बहुत जल्दी चला गया। शेख मुजीर्बुर रहमान (Sheikh Mujibur Rahman) की सरकार ने जनसंख्या नियंत्रण को राष्ट्रीय विकास नीति का हिस्सा बनाया। इसके बाद विभिन्न सरकारों ने आबादी को काबू में रखने के लिए कई कार्यक्रम चलाए (Bangladesh Family Planning) और उसकी सफलता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा भी गया, लेकिन अब यह एक बार फिर से पटरी से उतरती हुई नजर आ रही है। वहां ऐसा क्या हुआ, इसे समझने का प्रयास करते हैं।

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