Egg freezing Cost in India : देश में प्रेग्नेंसी के लिए एग फ्रीजिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह विकल्प सुरक्षित होने के साथ ही महिलाओं को हायर एजुकेशन और करियन की उड़ान भरने की फुर्सत देता है। आइए इस बारे में डॉक्टर से विस्तार से जानते हैं।
Egg freezing Process in India : जयपुर के कपल की शादी को 10 साल बीत गए। पत्नी को कंसीव करने में दिक्कत आ रही थी। उन्हें डॉक्टर ने एग फ्रीज करवाने की सलाह दी। पति ने पत्रिका से बताया कि वह बच्चे की चाह में ऐसा कर रहे हैं लेकिन इसमें हमारा पूरा बजट बिगड़ गया। हमारे कई लाख रुपये अबतक खर्च हो चुके हैं। इन दिनों खासतौर पर शहरों में एग फ्रीजिंग के बहुत से मामले आने लगे हैं। एग फ्रीजिंग क्या प्रोसेस है? इसकी क्यों जरूरत पड़ रही है? यह कितना खर्चीला है? आइए, यहां जानते हैं सबकुछ।
Best Age for Egg Freezing : डॉ. अर्चना झा कहती हैं कि दरअसल देर से शादी के चलते महिलाओं का शरीर मातृत्व का भार सहन नहीं कर पा रहा था। उनके अंडाशय में पर्याप्त अंडे नहीं बन पाते हैं। यही वजह है कि भविष्य में गर्भधारण की योजना बनाने के लिए इन अंडों को सुरक्षित रखना, क्रायो प्रिजर्वेशन करवाना और उसे बैंक में जमा करवाना जरूरी होता है। उन्होंने कहा, "25 से 30 वर्ष तक की आयु वर्ग की महिलाओं को प्रेग्नेंसी की प्लानिंग की ज्यादा दिक्कत नहीं आती है। लेकिन 30 साल के बाद बच्चे की प्लानिंग में दिक्कत आ रही है या आ सकती है। अगर महिलाएं कैरियर के लिए बच्चे की प्लानिंग देर से करना चाहती हों तो उनको इसके लिए फंड की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए उसके लिए उन्हें तैयार रहना चाहिए।'
उन्होंने बताया कि यह महिलाओं में प्रजनन क्षमता में तेजी से गिरावट की ओर भी इशारा करता है, जो सीमित संख्या में अंडों (लगभग 1-2 मिलियन) के साथ पैदा होती हैं, जो यौवनारंभ तक लगभग 300,000-400,000 तक गिर जाती है और इसमें गिरावट जारी रहती है। 35 वर्ष की आयु के बाद इसमें और भी तेजी से गिरावट आती है।
उन्होंने कहा, 'महिलाएं हायर एजुकेशन में जा रही हैं। नौकरी कर रही हैं और कैरियर को तवज्जो दे रही हैं। यह बहुत अच्छी बात है। इन हालात में प्रेग्नेंसी की प्लानिंग में देरी तो होगी, लेकिन मां बनना और फैमिली को आगे बढ़ाना के लिए बच्चा भी चाहिए। ऐसे में पढ़े-लिखे लोगों को, समाज को प्रेग्नेंसी के एक विकल्प के तौर पर एग फ्रीजिंग को प्रमोट करना चाहिए। यह जरूर है कि एग फ्रीजिंग का विकल्प चुनने में अच्छा-खासा पैसा खर्च करना पड़ता है। जाहिर है कि इसके लिए पुख्ता वित्तीय योजना और प्रसव से पहले कई वर्षों का बजट बनाना जरूरी है।"
डॉ. नेहारिका मल्होत्रा, आईवीएफ विशेषज्ञ, रेनबो अस्पताल ने पत्रिका से बताया कि चिकित्सकीय दृष्टि से, महिलाओं के अंडे 20 वर्ष प्लस (20-25) की आयु में सबसे स्वस्थ होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ, विशेषकर 32-35 वर्ष की आयु के बाद, अंडों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में गिरावट आती है, जिससे बाद में प्राकृतिक गर्भधारण मुश्किल हो सकता है।
आजकल कई महिलाएं करियर लक्ष्यों, उच्च शिक्षा, आर्थिक स्थिरता या व्यक्तिगत कारणों से शादी या गर्भावस्था में देरी करती हैं, और अंडाणु फ्रीजिंग उन्हें बिना किसी तत्काल दबाव के अपनी प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने का एक तरीका प्रदान करती है। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि अंडाणु फ्रीजिंग गर्भावस्था की गारंटी नहीं है, बल्कि यह एक प्रजनन बीमा विकल्प है, जो विकल्पों को खुला रखने का एक तरीका है। इसे चुनने से पहले उचित परामर्श, यथार्थवादी अपेक्षाएं और नैतिक चिकित्सा मार्गदर्शन आवश्यक हैं।
लागत की बात करें तो, भारत में अंडाणु फ्रीजिंग की लागत आमतौर पर प्रति चक्र ₹1.5 से ₹2 लाख के बीच होती है, जो क्लिनिक, उपयोग की जाने वाली दवाओं और शहर पर निर्भर करती है। एक कपल ने बताया कि एग फ्रीजिंग से लेकर कंसीव करने में उनका कुल खर्च ₹4-4.5 लाख रुपये आया, जिसमें हार्मोन इंजेक्शन, अल्ट्रासाउंड स्कैन, दवाइयां, परीक्षण, यात्रा और तीन साल के भंडारण का खर्च ₹75,000 शामिल था।
उन्होंने बताया कि मुझे इस प्रोसेस में जाने से पहले पूरे काफी समय से बचत करनी पड़ी। अपने दोस्तों और घर वालों से उधार भी लेना पड़ा। हमें दैनिक खर्चों में कटौती करनी पड़ी और परिवार के कई फंक्शन में शामिल नहीं होने का फैसला लेना पड़ा।
लोअर मिडिल क्लास महिलाएं एग फ्रीजिंग के लिए आगे आ रही हैं? इस सवाल के जवाब में डॉ. नेहारिका ने कहा कि निम्न मध्यम वर्ग की महिलाओं में एग फ्रीजिंग के बारे में जागरूकता निश्चित रूप से बढ़ रही है, लेकिन भारत में अभी भी सभी को यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अच्छी बीमा योजनाओं और किफायती उपायों की आवश्यकता है।
एग फ्रीजिंग को मेडिकल भाषा में ओसाइट क्रायोप्रिज़र्वेशन (Oocyte Cryopreservation) कहते हैं। इस प्रोसेस में महिला के अंडाणुओं को बहुत कम तापमान (–196°C) पर लिक्विड नाइट्रोजन में जमा कर दिया जाता है।
एग फ्रीजिंग की पूरी प्रक्रिया आमतौर पर 2 से 3 हफ्तों में पूरी होती है। इस प्रोसेस में ओवरी को सबसे पहले उत्तेजित (Ovarian Stimulation) किया जाता है। प्रेग्नेंसी की चाहत रखने वाली महिला को 10–12 दिनों तक हार्मोन इंजेक्शन दिए जाते हैं। इस प्रोसेस में एक से ज्यादा अंडाणु विकसित होते हैं।
इसके बाद अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट से अंडाणुओं की ग्रोथ पर नजर रखी जाती है। इसके बाद एग रिट्रीवल (Egg Retrieval) की प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें महिला को हल्की एनेस्थीसिया में योनि मार्ग से एक पतली सुई द्वारा अंडाणु निकाले जाते हैं। यह प्रक्रिया 15–20 मिनट की होती है। इसके बाद अंडाणुओं को तत्काल फ्रीज (Vitrification) कर दिया जाता है। यह आधुनिक तकनीक अंडाणु को सुरक्षित रखने में ज्यादा प्रभावी है।
अब सवाल यह उठता है कि किन महिलाओं को एग फ्रीजिंग की जरूत पड़ती है? इसके जवाब में डॉक्टरों का कहना है कि जो शादी या मातृत्व टालना चाहती हैं, करियर, पढ़ाई या व्यक्तिगत कारणों से, कैंसर जैसी बीमारी के इलाज से पहले और जिनकी उम्र जिनकी उम्र 20–35 साल के बीच है। 20–35 की उम्र एग फ्रीजिंग का बेहतर विकल्प है।
इस तकनीक की मदद से भविष्य में मां बनने का विकल्प सुरक्षित रहता है। उम्र बढ़ने से एग क्वालिटी खराब होने का खतरा कम हो जाता है। इस विकल्प को अपनाकर महिलाएं मानसिक और सामाजिक दबाव से बहुत हदतक राहत पा लेती हैं। हालांकि एग फ्रीजिंग 100 फीसदी गर्भ धारण की गारंटी नहीं देता, लेकिन इसके बावजदू इससे महिलाएं मानसिक और सामाजिक दबाव से राहत पा सकती है।
एग फ्रीजिंग प्रोसेस को लेकर देश में कवरेज का चलन कम है, को देखते हुए आईवीएफ क्लिनिक इसमें पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए ईएमआई का विकल्प भी आईवीएफ क्लिनिक देने लगे हैं। इंदिरा आईवीएफ में प्रजनन विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति अनेजा ने इंडियन एक्सप्रेस से बताया कि हमारा क्लिनिक ईएमआई का विकल्प प्रदान करता है। वे आगे कहती हैं, “अंडाणु निकालने तक की हमारी लागत लगभग 1 लाख रुपये है। फ्रीजिंग का शुल्क 30,000 रुपये प्रति वर्ष है।”