
Protest : मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में अपनी मांगें मनवाने के लिए पानी की टंकी व मोबाइल टावर पर चढ़कर विरोध व प्रदर्शन करना एक खतरनाक ट्रेंड बनता जा रहा है। पिछले 6 महीने में जिले में ऐसी 2 से 3 बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें मासूम बच्चों से लेकर युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर प्रशासन को चेतावनी दी है।
हर बार पुलिस प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम को घंटों मशक्कत कर उन्हें समझा-बुझा कर नीचे उतारना पड़ा है। यह सिस्टम दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। अगर आंकड़ो पर गौर करें तो एक साल में शिवपुरी जिला मुख्यालय से लेकर अंचल में 15 से 20 घटनाएं ऐसी हो चुकी है, जिनमें लोग अपनी मांग मनवाने के लिए पानी की टंकी से लेकर मोबाइल टावरों पर चढ़ चुके है। हालांकि अधिकांश मामलो में लोगों की जो मांग होती है, वह सही नही होती, लेकिन प्रशासन कोई अनहोनी न हो, इसलिए उन मांगों को मानने के लिए हां कर देते हैं।
सबसे चर्चित मामला 28 सितंबर 2026 का है, जब शिवपुरी शहर के मनियर बायपास इलाके में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। सरकारी जमीन पर पक्का निर्माण रोकने से नाराज पवन जाटव नाम का युवक अपनी मां रामश्री,पत्नी सपना और 9 महीने के दुधमुंहे बेटे इशांक को लेकर 70 फीट ऊंची जलावर्धन योजना की पानी की टंकी पर चढ़ गया। पवन का आरोप था कि वह 25-30 साल से सर्वे नंबर 454 की सरकारी जमीन पर झोपड़ी बनाकर रह रहा है, लेकिन पड़ोसियों की शिकायत पर पुलिस उसके मामा को थाने ले गई। इससे नाराज होकर उसने परिवार सहित आत्महत्या की धमकी दी। करीब 2 घंटे तक तहसीलदार सिद्धार्थ शर्मा व कोतवाली टीआई रोहित दुबे ने फोन पर समझाइश दी, तब जाकर पीएम आवास का आश्वासन मिलने पर वह नीचे उतरा।
दूसरा मामला 21 अगस्त 2026 को पिछोर का है। मनपुरा गांव निवासी दिनेश सगर नाम का युवक अपनी बेटी की शिक्षा के लिए पानी की टंकी पर चढ़ गया। दिनेश का आरोप था कि उसकी कक्षा 6 में पढ़ने वाली बेटी को सरकारी स्कूल में पूरी किताबें नहीं मिली हैं और मिड डे मील की गुणवत्ता भी खराब है। वह इस मुद्दे पर 22 दिवसीय शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक परिवर्तन जागरूकता यात्रा निकालना चाहता था, जिसके लिए उसने 19 अगस्त को एसडीएम से अनुमति मांगी थी। अनुमति न मिलने पर वह एसडीएम कार्यालय के सामने बनी पानी की टंकी पर पेट्रोल की बोतल लेकर चढ़ गया और कूदने की धमकी देने लगा। पुलिस और प्रशासन ने घंटों समझाइश के बाद उसे नीचे उतारा।
अप्रैल 2026 में तेंदुआ के गणेशखेड़ा गांव के रहने वाले आदिवासी प्रेमी युगल जो कि एक दूसरे से प्रेम करते थे और शादी करना चाहते थे। लेकिन दोनों के परिवार वाले इस रिश्ते के खिलाफ थे और शादी से इनकार कर दिया था। परिजनों के इनकार से परेशान होकर दोनों अचानक गांव में लगे 40 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गए। टावर पर चढ़कर दोनों ऊपर से ही शादी कराने की मांग करने लगे। दोनो को इतनी ऊंचाई पर देखकर गांव में सनसनी फैल गई और बड़ी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलते ही तेंदुआ थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। करीब 3 घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा’ चलता रहा। आखिरकार पुलिस की समझाइश और परिवार वालों के समझौते के आश्वासन के बाद दोनों को सुरक्षित नीचे उतारा गया
विशेषज्ञों का मानना है कि पानी की टंकी या मोबाइल टावर पर चढऩे की घटनाएं प्रशासनिक सुनवाई न होने की हताशा का परिणाम हैं। टंकी व टॉवर ऊंचे होते है, वहां से पूरे शहर का ध्यान खिंचता है और मीडिया कवरेज तुरंत मिलता है। इसलिए लोग इसे सबसे आसान दबाव बनाने का तरीका मानने लगे हैं। हालांकि यह तरीका बेहद खतरनाक है। एक छोटी सी चूक से जान जा सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोगों को समझाइश के साथ-साथ वैधानिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ता है, लेकिन फिर भी यह सिलसिला थम नहीं रहा।