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Ground Report Patrika : मिलों में नकदी का संकट, चीनी मिलों की बजाय गुड़ भट्टियों पर बढ़ा किसानों का भरोसा

Ground Report Patrika : मध्य प्रदेश में करीब 3500 से 4000 भट्टी में गुड़ तैयार किया जा रहा है। इस साल 23 लाख क्विंटल गुड़ की तुलना में 20 लाख क्विंटल शक्कर का उत्पादन हुआ है। प्रदेश के चीनी के कटोरे नरसिंहपुर से प्रकाश चौबे की ग्राउंड रिपोर्ट। पढ़िए
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Updated: 8 Sep 2026, 4:43 PM IST
MP Sugarcane
भुगतान में देरी से बदल रहा गन्ने का बाजार (Photo: Rajasthan Patrika)

Ground Report Patrika : देश-दुनिया में शक्कर की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर मची हलचल के बीच प्रदेश में ‘चीनी का कटोरा’ कहे जाने वाले जिले में गन्ना के कारोबार में अलग ही ट्रेंड सामने आ रहा है। शुगर और खांडसारी मिलों के साथ गुड़ भट्टियां गन्ने की खपत का बड़ा वैकल्पिक केंद्र बनती जा रही हैं। किसानों का एक वर्ग मिलों के बजाय सीधे गुड़ भट्टियों का रुख कर रहा है। इसकी प्रमुख वजह मिलों से गन्ने का भुगतान मिलने में लगने वाला समय और खेती के अगले चक्र के लिए तत्काल नकदी की जरूरत है।

आठ शुगर मिल, 11 खांडसारी इकाई

जिले में करीब 65 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। यहां आठ बड़ी शुगर मिलें और 11 खांडसारी इकाइयां संचालित हैं। इसके बावजूद गन्ना सीजन में गुड़ भट्टियों की संख्या बढकऱ 4000 पहुंच गई है। इन पर स्थानीय किसानों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से आने वाले व्यापारी भी गन्ने से गुड़ तैयार करा रहे हैं। इससे गन्ने की खरीद, भट्टी संचालन, श्रमिक, ढुलाई, ईंधन, पैकिंग और परिवहन से लेकर गुड़ की थोक खरीद-बिक्री तक एक समानांतर कारोबार खड़ा हो गया है।

शुगर मिलों में नकदी का संकट, किसान परेशान

शुगर मिल किसानों को करीब 843.21 करोड़ रुपए का गन्ना मूल्य भुगतान का दावा कर रही हैं। हालांकि भुगतान में देरी होने पर किसानों की कार्यशील पूंजी अटक जाती है। खेती की अगली जरूरतों, मजदूरी और अन्य खर्चों के लिए तत्काल राशि की जरूरत के चलते किसान ऐसे बाजार की ओर देख रहे हैं, जहां भुगतान अपेक्षाकृत जल्दी मिल सके। यही कारण है कि गुड़ भट्टियां उनके लिए वैकल्पिक बाजार बन रही हैं।

शक्कर से ज्यादा गुड़ का उत्पादन

जिले में आधिकारिक तौर पर करीब 23 लाख क्विंटल गुड़ उत्पादन का आंकड़ा है, जबकि नरसिंहपुर में शक्कर उत्पादन 20,04,347 (20 लाख) क्विंटल रहा। गन्ने से तैयार होने वाले इन दोनों उत्पादों के आंकड़े जिले में गुड़ कारोबार के बढ़ते आकार की तस्वीर पेश करते हैं। स्थानीय किसानों की मानें तो गुड़ का वास्तविक उत्पादन इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है।

प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार का गणित

गुड़ का कारोबार केवल गन्ना बेचने वाले किसानों तक सीमित नहीं है। भट्टियों पर बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं। गन्ने की ढुलाई, ईंधन की आपूर्ति, गुड़ की पैकिंग, परिवहन और थोक कारोबार में भी लोगों को रोजगार मिलता है। सीजन में दूसरे क्षेत्रों से आने वाले व्यापारी भी यहां तैयार गुड़ की खरीद करते हैं। इस तरह गन्ने के साथ गुड़ का कारोबार भी स्थानीय अर्थव्यवस्था में बड़े समूह को आर्थिक साधन प्रदान करता है।

मिलों के गन्ने पर पड़ रहा असर

गन्ने का एक हिस्सा गुड़ भट्टियों की ओर जाने से शुगर मिलों तक पहुंचने वाले गन्ने की मात्रा पर भी असर पड़ रहा है। इससे जिले में गन्ने की खपत का एक समानांतर बाजार विकसित हो रहा है। कई मर्तबा मिलों को पिराई क्षमता के अनुसार गन्ना उपलब्ध नहीं हो पाता। हालांकि, गुड़ भट्टियों की अपनी सीमाएं भी हैं। भट्टियां अपेक्षाकृत अच्छी गुणवत्ता का गन्ना लेती हैं। ऐसे में हर किसान को भट्टियों में गन्ने का बेहतर भाव मिले, यह जरूरी नहीं है।

फसल बेचने में आसानी और अपेक्षाकृत जल्दी भुगतान से बढ़ा रुझान

नरसिंहपुर जिले के सहायक संचालक गन्ना डॉ. अभिषेक दुबे का कहना है कि गन्ना किसानों का मिलों की बजाय गुड़ निर्माण या भट्टियों की ओर रुझान बढ़ने की कई वजह हैं। इनमें फसल बेचने में आसानी और अपेक्षाकृत जल्दी भुगतान प्रमुख हैं। हालांकि, मिलों में किसानों का हर प्रकार का गन्ना लिया जाता है। ऐसे में किसानों को कई बार कम दाम भी मिलते हैं। गुड़ कारोबार निश्चित रूप से जिले में तेजी से बढ़ रहा है।

Updated on:
8 Sep 2026, 4:43 PM IST
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